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बच्चों को होने वाली गलघोंटू बीमारी क्या है और क्यों होती है? हर मां-बाप ये रिपोर्ट पढ़ें

मां-बाप की एक बड़ी लापरवाही की वजह से हो सकती है डिप्थीरिया.

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डिप्थीरिया 1 से 10 प्रतिशत लोगों में जानलेवा हो सकता है
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सरवत
26 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 26 अक्तूबर 2021, 03:13 PM IST)
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(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वक़्त के साथ साइंस ने बहुत तरक्की की. जो बीमारियां एक समय पर जानलेवा थीं, उनसे बचने के लिए वैक्सीन बन गईं. पर दिक्कत ये है कि वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद भी बहुत लोग इन्हें लगवाते नहीं. न खुद को, न अपने बच्चों को. नतीजा? वो खुद बीमार पड़ते हैं, अपने साथ दूसरों को बीमार करते हैं और अंत में ये बीमारियां जानलेवा साबित होती हैं. नहीं हम कोविड की बात नहीं कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं डिप्थीरिया नाम की बीमारी की. हमें सेहत पर मेल किया वेद ने. वो एक NGO के साथ जुड़े हैं. बीमार बच्चों के साथ काम करते हैं. उन्होंने हमें इस टॉपिक से जागरूक करवाया.
डिप्थीरिया बच्चों को होने वाली एक बीमारी है. ये काफ़ी सीरियस इन्फेक्शन है, जो बैक्टीरिया के कारण होता है. इसमें जान जाने का ख़तरा होता है. अब इस बीमारी से बचने का एक बहुत ही आसान तरीका है. वैक्सीन. पर इसके बावजूद कई लोग अपने बच्चों को इसकी वैक्सीन नहीं लगवाते. वेद ऐसे गांवों और डिस्ट्रिक्स में काम कर चुके हैं जहां कई बच्चों की डिप्थीरिया के कारण मौत हो गई. इसलिए वो चाहते हैं हम डिप्थीरिया के बारे में लोगों को जागरूक करें. इस बीमारी से जुड़े रिस्क और बचाव के बारे में अपने शो पर बात करें.
नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक, साल 2018 में दिल्ली में 4 दिनों के अंदर 12 बच्चों की डिप्थीरिया के कारण मौत हो गई. डॉक्टर्स का कहना था कि इन बच्चों को डिप्थीरिया की वैक्सीन नहीं लगी थी. वहीं साल 2020 में इंडिया में डिप्थीरिया के लगभग 3485 मामले सामने आए थे.
जब हमने इस बीमारी के बारे में डॉक्टर्स से बात की तो पता चला ये काफ़ी ख़तरनाक है. तो सबसे पहले जानते हैं डिप्थीरिया क्या है और कैसे फैलता है? डिप्थीरिया क्या होता है? ये हमें बताया डॉक्टर नीतू जैन ने.
Majco Health
डॉक्टर नीतू जैन, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन, पीएसआरआई हॉस्पिटल, नई दिल्ली

-डिप्थीरिया या गलघोंटू आमतौर पर बच्चों की बीमारी होती है.
-आजकल इसके केसेस बहुत कम हैं.
-पूरी दुनिया में ही डिप्थीरिया के केसेस कम हैं.
-ये बीमारी वैक्सीन से रोकी जा सकती है.
-डिप्थीरिया का टीका बचपन में ही बच्चों को लग जाता है.
-10-11 साल की उम्र में बूस्टर डोज़ लगता है.
-ये बूस्टर डोज़ प्रेग्नेंसी में औरतों को भी लगाया जाता है. डिप्थीरिया कैसे फैलता है? -ये बीमारी सांस, हवा या ड्रॉपलेट इन्फेक्शन के ज़रिए फैलती है.
-जब हम खांसते, छींकते हैं तो मुंह या नाक से निकली ड्रॉप्स हवा में फैल जाती हैं.
-यही ड्रॉप्स जब दूसरा इंसान सांस के ज़रिए अंदर लेता है तो ये बीमारी फैलती है.
डिप्थीरिया या गलघोंटू आमतौर पर बच्चों की बीमारी होती है

डिप्थीरिया या गलघोंटू आमतौर पर बच्चों की बीमारी होती है

-इसके अलावा गंदे हाथों यानी जिनपर मुंह या नाक से निकले ड्रॉपलेट्स लगे हों, उन हाथों से किसी चीज़ को छुआ, वही चीज़ कोई और छुए और अपने मुंह पर वो हाथ लगाए तो ये बीमारी फैल सकती है. लक्षण -बुखार आना
-निगलने में दिक्कत होना
-सांस लेने में दिक्कत होना
-खांसी होना
-गले में सूजन या गले के अंदर मौजूद ग्रंथियों का बढ़ जाना
-बहुत ज़्यादा कमज़ोरी होना
ये बीमारी सांस, हवा या ड्रॉपलेट इन्फेक्शन के ज़रिए फैलती है

ये बीमारी सांस, हवा या ड्रॉपलेट इन्फेक्शन के ज़रिए फैलती है

-एक्स्पोज़र के 1-10 दिन बाद मरीज़ में लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं और बीमारी बहुत दिनों तक रह सकती है. डायग्नोसिस -देखने या जांच करने में पेशेंट की नाक और गले में ग्रे रंग की मेम्ब्रेन (झिल्ली) दिखाई देती है.
-इस झिल्ली से अगर स्वैब लिया जाए और कल्चर के लिए भेजा जाए, तो उसमें डिप्थीरिया का बैक्टीरिया पाया जाता है, जिसका नाम है कॉरिन बैक्टीरियम डिपथीरी (Coryn Bacterium Diphtheriae).
-इससे जांच में साफ़ तौर पर पता चल जाता है. हेल्थ रिस्क -डिप्थीरिया आसपास के टिशू यानी ऊतक को नुकसान पहुंचाता है.
-इससे लंग्स फाइब्रोसिस या लंग इन्फेक्शन हो सकता है.
-ये खून के रास्ते दिल तक पहुंच सकता है.
-दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है.
-उसके कारण मायोकार्डिटिस (दिल की मध्यम परत में आने वाली सूजन) हो सकता है.
-दिल ठीक से काम नहीं कर पाता.
-आगे जाकर पेशेंट को सांस लेने में दिक्कत या हार्ट फेलियर हो सकता है.
-ये बीमारी किडनी पर भी असर करती है.
एक्स्पोज़र के 1-10 दिन बाद मरीज़ में लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं और बीमारी बहुत दिनों तक रह सकती है

एक्स्पोज़र के 1-10 दिन बाद मरीज़ में लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं और बीमारी बहुत दिनों तक रह सकती है

-नसों को नुकसान पहुंचता है.
-गले की मांसपेशियां कमज़ोर पड़ सकती हैं.
-कमज़ोरी हो सकती है.
-पेशेंट को पैरालिसिस भी हो सकता है.
-ये अपने आप में काफ़ी ख़तरनाक बीमारी है. इलाज -जल्दी डायग्नोसिस हो जाए तो इसका इलाज संभव है.
-इसमें सिंपल एंटीबायोटिक दी जाती हैं.
-जैसे पेनिसिलिन या इरिथ्रोमाइसिन.
-इनसे इलाज किया जा सकता है. बचाव -इस बीमारी से बचाव बहुत आसान है. अगर वैक्सीन समय पर ली जाए तो.
-लक्षण आने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए.
-डिप्थीरिया 1 से 10 प्रतिशत लोगों में जानलेवा हो सकता है.
वैक्सीन लगवाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है

वैक्सीन लगवाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है

-इस बीमारी का इलाज किया भी जाए तो भी ठीक होने में बहुत समय लगता है.
-बीमारी से बचना आसान है.
-वैक्सीन लगवाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है.
-साथ ही साफ़-सफ़ाई रखने से भी इस बीमारी से बच सकते हैं.
आपने डॉक्टर की बातें सुनीं. डिप्थीरिया कितनी ख़तरनाक हो सकती है, इसका सेहत पर क्या असर पड़ता है, ये तो आपको समझ में आ ही गया होगा. इलाज से आसान और बेहतर है बचाव. वो भी बेहद सिंपल. करना सिर्फ़ इतना है कि वैक्सीन लगवानी है. ये बच्चों को लगती है. इसलिए अपने डॉक्टर से सलाह करके अपने बच्चों को ये वैक्सीन ज़रूर लगवाएं.

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