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डायबिटिक नहीं हैं, लेकिन तोंद निकल आई है, आगे डायबिटीज का खतरा है या नहीं?

डायबिटीज और पेट की चर्बी का आपस में क्या कनेक्शन है?

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13 जुलाई 2023 (अपडेटेड: 13 जुलाई 2023, 05:25 PM IST)
what is diabetic belly and how to treat it?
पेट की चर्बी और डायबिटीज में एक कॉमन लिंक है 'इंसुलिन रेजिस्टेंस'. इसका मतलब है कि शरीर में इंसुलिन बन तो रहा है लेकिन इसका ठीक से असर नहीं हो पा रहा.
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आपने एक चीज़ नोटिस की है. जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज होता है, उनमें से ज़्यादातर लोगों के पेट पर चर्बी जमा होती है. इसे कहते हैं डायबिटिक बेली. आसान भाषा में कहें तो तोंद. ये पेट की चर्बी केवल आपके कपड़ों को टाइट नहीं कर रही. ये चर्बी ख़ासतौर पर आपके दिल की दुश्मन भी होती है. जिन लोगों को डायबिटीज अभी नहीं है, पर पेट पर चर्बी जमा है, उन्हें भी आगे जाकर डायबिटीज का ख़तरा होता है. अब डायबिटीज और पेट की चर्बी का आपस में क्या कनेक्शन है, इस सवाल का जवाब जानेंगे. साथ ही जानेंगे ऐसा क्यों होता है और इसका इलाज क्या है.

डायबिटिक बेली क्या होती है?

ये हमें बताया डॉक्टर स्नेहा कोठारी ने.

Dr Sneha Kothari - Global Hospitals Group
डॉक्टर स्नेहा कोठारी, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, ग्लोबल हॉस्पिटल्स, मुंबई

अक्सर टाइप 2 डायबिटीज मरीजों के पेट पर ज्यादा चर्बी जमा होती है. वहीं कुछ मरीज ऐसे भी होते हैं जिनके पेट और कमर पर चर्बी है, लेकिन उन्हें डायबिटीज नहीं है. 'डायबिटिक बेली' यानी पेट पर जमा होने वाली चर्बी. ये चर्बी दो तरह की होती है- विसेरल फैट (Visceral Fat) और सबक्यूटेनियस फैट (Subcutaneous Fat). विसेरल फैट यानी लिवर, आंतें, पैंक्रियास, पेट जैसे अंगों के आसपास जमा होने वाली चर्बी. वहीं सबक्यूटेनियस फैट का मतलब है स्किन के नीचे जमा होने वाली चर्बी. इन दोनों में काफी अंतर है और विसेरल फैट को कम करना मुश्किल होता है. विसेरल फैट के मरीजों को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, स्ट्रोक, लकवा और दिल से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा रहता है.

डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के पेट पर चर्बी क्यों जमा होती है?

पेट की चर्बी और डायबिटीज में एक कॉमन लिंक है 'इंसुलिन रेजिस्टेंस'. इसका मतलब है कि शरीर में इंसुलिन बन तो रहा है लेकिन इसका ठीक से असर नहीं हो पा रहा. जैसे कि टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर ज़्यादा होती है. बढ़ी हुई शुगर को कंट्रोल करने के लिए शरीर इंसुलिन हॉर्मोन बनाता है. इंसुलिन बढ़ी हुई शुगर को कम करने के लिए फैट में बदल देता है जो पेट के आसपास जमा हो जाती है. इस वजह से टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के पेट पर ज्यादा चर्बी होती है. वहीं पेट पर ज्यादा चर्बी वाले लोग ज्यादातर टाइप 2 डायबिटीज के होते हैं. ये दोनों चीजें आपस में एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं.

Is this how abdominal fat leads to diabetes?
अक्सर टाइप 2 डायबिटीज मरीजों के पेट पर ज्यादा चर्बी जमा होती है.
इससे निपटने के लिए क्या करें?

विसेरल फैट और सबक्यूटेनियस फैट में काफी अंतर है. विसेरल फैट को कम करना इतना आसान नहीं है. इसे कम करने के लिए आपको लाइफस्टाइल में बदलाव करना होगा. जैसे कि रोज एक्सरसाइज करें, हफ्ते में करीब 150 मिनट (ढाई घंटे) एरोबिक्स ऐक्टिविटी जरूर करें. हफ्ते में 2 से 3 दिन वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज भी जरूर करें. अपनी डाइट में भी बदलाव करें जैसे रिफाइंड कार्ब्स, मैदा, बेकरी वाली चीजें और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम करें. साथ ही साबूत आनज, हेल्दी खाना, फल-सब्जियां, प्रोटीन और सलाद का सेवन ज्यादा करें. सूखे मेवों को भी डाइट में शामिल करें और शराब का सेवन कम कर दें. कभी-कभी स्ट्रेस के कारण भी शरीर में कोर्टिसोल हॉर्मोन ज्यादा बनता है. ये पेट की चर्बी को बढ़ा देता है. रात में 6 से 8 घंटे की नींद लें. पेट की चर्बी को कम करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव करें, एक्सरसाइज करें और हेल्दी खाना खाएं. 

(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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