ठंड में सांस लेने पर खांसी आती है? जानिए क्या है इलाज
ठंड में ब्रोंकाइटिस वालों की हालत खराब हो जाती है.
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ब्रोंकाइटिस में फ़ेफ़ड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाली ट्यूब जिन्हें हम ब्रोन्कियल ट्यूब कहते हैं, उनमें संक्रमण हो जाता है.
यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.कुछ दिन पहले मेरी बात हुई हर्षित से. लल्लनटॉप के व्यूअर हैं. 29 साल के हैं. दिल्ली के रहने वाले हैं. ठंड में उनकी सबसे बड़ी परेशानी है, सांस न ले पाना. दरअसल हर्षित को ब्रोंकाइटिस है. एक ऐसी कंडीशन, जिसमें सांस लेने में तकलीफ़ होती है. हर्षित की परेशानी ठंड आते ही बढ़ जाती है. उन्हें खांसी, सांस न ले पाना, थकान, खांसी में बलग़म आना, सीने में जकड़न जैसे लक्षण महसूस होते हैं. ऊपर से वो रहते भी दिल्ली में हैं. इतना प्रदूषण. उसके मारे हालत और बिगड़ जाती है. अब हर्षित चाहते हैं कि हम ब्रोंकाइटिस के बारे में लोगों को सही जानकारी दें. क्योंकि ब्रोंकाइटिस बहुत ही आम दिक्कत है. जिन लोगों को ब्रोंकाइटिस होता है, उनके लिए सर्दियां काटना मुश्किल हो जाता है. तो सबसे पहले तो ये जान लेते हैं कि ब्रोंकाइटिस क्या होता है और ठंड में क्यों बढ़ जाता है?
क्या होता है ब्रोंकाइटिस?
ये हमें बताया डॉक्टर दीपक ने.

डॉक्टर दीपक शुक्ला, एमडी मेडिसिन, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज
-ब्रोंकाइटिस में फ़ेफ़ड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाली ट्यूब जिन्हें हम ब्रोन्कियल ट्यूब कहते हैं, उनमें संक्रमण हो जाता है
-संक्रमण होने के कारण सूजन आ जाती है
-सूजन से सांस लेने में दिक्कत
-खांसी होती है
-खांसी में ज़्यादा बलग़म बनता है
-ये बीमारी ज़्यादातर बीड़ी, सिगरेट पीने वाले या धुएं में काम करने वाले लोगों में देखी जाती है
-ब्रोंकाइटिस के लक्षण 3 से 5 महीने तक देखे जा सकते हैं
-इसमें छाती में जकड़न, ख़ूब सारा बलग़म बनना
-सांस लेने पर सीटी की आवाज़ आना
-खांसी में सफ़ेद, पीले या हरे रंग का बलग़म बनता है
-कुछ मरीजों में बुखार, सर्दी, नाक में पानी आना, गले में ख़राश जैसी समस्या देखी जा सकती है
-ब्रोंकाइटिस के मरीज़ ठंड में ज़्यादा परेशान होते हैं
ब्रोंकाइटिस के लक्षण 3 से 5 महीने तक देखे जा सकते हैं-ठंड में वायु का तापमान कम होता है
-ये ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन का कारण बन सकता है
-इससे सांस लेने में दिक्कत, खांसी बढ़ सकती है
ठंड में ब्रोंकाइटिस ज़्यादा क्यों होता है?
-ठंड में वायरल इन्फेक्शन ज़्यादा हो जाते हैं
-ये वायरल इन्फेक्शन श्वसन तंत्र (सांस लेने वाले अंगों) को संक्रमित करते हैं
-जिससे सांस लेने में समस्याएं बढ़ जाती हैं
-जब भी मौसम बदलता है, ये दिक्कतें देखी जाती हैं
कारण आपको पता चल गया. अब जान लीजिए कुछ ऐसी ग़लतियां जो आपको ज़रूर अवॉइड करनी चाहिए. साथ ही जानिए ब्रोंकाइटिस का इलाज.
क्या ग़लतियां अवॉइड करनी हैं?
-बीड़ी और सिगरेट को छोड़ दें
-धुएं में जब भी जाएं, मास्क पहनें
-कोविड काल है तो सामाजिक दूरी रखें, मास्क पहनें
-ठंड में पूरे कपड़े पहनें
-जिस भी चीज़ से एलर्जी है, जैसे इमली, खटाई आदि, उससे दूर रहें
-ठंडी चीज़ों का सेवन कम करें
-ठंड में एक्सरसाइज़ करने जाएं तो अपनी दवाइयां लेकर जाएं
-ठंड में सूरज निकलने के बाद ही निकलें
-लक्षण दिखने पर तुरंत pulmonologist के पास जाएं
इलाज
-अगर सांस संबंधी समस्या है तो आपको इन्हेलर दिया जाएगा
-इन्हेलर में बहुत ही कम मात्रा में दवाई होती है
-ये सीधे फ़ेफ़ड़ों तक जाती है
-इसका असर तुरंत और लंबे समय तक रहता है
-क्योंकि फ़ेफ़ड़ों में सीधे जाती है इसलिए साइड इफ़ेक्ट बिलकुल न के बराबर होते हैं
-अगर बलग़म ज़्यादा बनता है तो Mucolytics दी जाएगी
-इससे बलग़म एकदम पतला हो जाएगा और बाहर निकल जाएगा
-जब खांसी ज़्यादा होती है और एलर्जी ज़्यादा होती है ऐसे में डॉक्टर आपको Antitussives और Anti-Allergic दे सकते हैं
अगर सांस संबंधी समस्या है तो आपको इन्हेलर दिया जाएगा-अगर इसमें वैक्सीन लगवा लें तो बहुत अच्छा है
-18 से 65 साल के बीच के लोगों को इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए. ये साल में एक बार लगती है
-65 से ऊपर के लोग pneumococcal vaccine लगवा सकते हैं. एक ज़िंदगी में एक बार लगती है
डॉक्टर साहब ने जो टिप्स बताई हैं, उनका सख्ती से पालन कीजिए. कोरोना काल में आप सांस की दिक्कतों से जितना बचकर रहें, उतना अच्छा है.
वीडियो

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