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मुरादाबाद केसः लड़की बोली- इंजेक्शन से मेरा गर्भपात हो गया, तो अस्पताल ने ये सफाई दी

लड़की ने कहा कि उसे शेल्टर होम में टॉर्चर किया गया.

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डॉक्टर निर्मला पाठक. मुरादाबाद महिला डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में एक्टिंग चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट हैं. (फोटो- शरत गौतम)
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लालिमा
16 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 16 दिसंबर 2020, 11:25 AM IST)
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उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद. यहां 'एंटी कन्वर्जन लॉ' यानी धर्मांतरण विरोधी कानून का एक मामला सामने आया था. 5 दिसंबर को दो लड़कों को गिरफ्तार किया गया था, एक लड़की को शेल्टर होम (नारी निकेतन) भेजा गया था. 14 दिसंबर को लड़की का बयान लेने के बाद उसे ससुराल पहुंचा दिया गया था, जिसके बाद लड़की ने 'गर्भपात' होने की बात कही थी. आरोप लगाया था कि शेल्टर होम में बुरा बर्ताव हुआ, और पेट में दर्द होने की शिकायत के बाद अस्पताल में इंजेक्शन दिया गया था, इसके बाद उसे ब्लीडिंग हुई और उसका गर्भपात हो गया. अब इन आरोपों पर अस्पताल की तरफ से सफाई दी गई है. अस्पताल का कहना है कि अल्ट्रा साउंड में भ्रूण बच्चे दानी के अंदर ही दिख रहा है, हालांकि धड़कन के बारे में पता नहीं चला था.

और क्या कहा अस्पताल ने?

डॉक्टर निर्मला पाठक. मुरादाबाद महिला डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में एक्टिंग चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट हैं. 'इंडिया टुडे' के शरद गौतम की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर निर्मला ने कहा कि लड़की के साथ अस्पताल में बहुत अच्छा बर्ताव किया गया था. गर्भपात के आरोपों पर बोलीं-

"पेट में दर्द, करीब तीन महीने का एमेनोरिया (पीरियड्स का न आना), और हल्की-हल्की ब्लीडिंग के बाद वो यहां पर एडमिट हुई थी. 13 तारीख को एडमिट हुई थी, तब ब्लीडिंग रोकने के लिए इंजेक्शन दिया, पेट में दर्द न हो उसकी दवा दी गई. फिर अल्ट्रा साउंड कराया गया. अल्ट्रा साउंड में फीटस (भ्रूण) तो दिख रहा है अंदर. ये कि सात हफ्ते पांच दिन का फीटस है. लेकिन उसमें धड़कन का पता नहीं चल रहा था. हमारे अल्ट्रा सोनोलॉजिस्ट ने सलाह दी थी कि TVS (ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रा साउंड) कराया जाए. TVS हमारे यहां होता नहीं है. इसके लिए हमने उसको मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया. रेफरल का फॉर्म भी दिया. जो भी उसके साथ थे, वो लिखकर गए कि वो उसे निजी वाहन से लेकर जा रहे हैं. बर्ताव तो सबने अच्छा ही किया था उसके साथ. आरोप गलत लगाए गए."

डॉक्टर ने आगे कहा कि प्रेग्नेंसी के दौरान जब भी पेट में दर्द हो, या ब्लीडिंग हो, तो भ्रूण के लिए रिस्क हो जाता है. डॉक्टर ने कहा,

"पेशेंट जब गई है, तब उसकी जनरल कंडीशन तो ठीक थी. बच्चे का तो रिस्क होता ही है. जब पेट में दर्द हो रहा है, स्पॉटिंग (ब्लीडिंग) हो रही है. तो रिस्क हो जाता है. हमने जो ट्रीटमेंट दिया वो सब लिखा हुआ है हमारे पास."

क्या आरोप लगाए थे लड़की ने?

लड़की का आरोप है कि उसकी प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना चल रहा था, शेल्टर में रखे जाने के दौरान उसका गर्भपात हो गया. घर लौटकर आने के बाद लड़की ने कहा-

“मुझे वहां (नारी निकेतन) में टॉर्चर किया गया. तीन दिन से अचानक मेरे पेट में दर्द हुआ. उन्होंने मुझे दिखाया नहीं. जब ज्यादा तबीयत खराब हुई, तो अस्पताल ले गए. 11 दिसंबर को शाम को मुझे एक इंजेक्शन लगा था, तब थोड़ी ब्लीडिंग हुई थी. दो दिन बाद चार इंजेक्शन लगे, दवा दी गई, उसके बाद बहुत ब्लीडिंग हुई. बहुत तबीयत खराब हो गई. ब्लीडिंग फिर नहीं रुकी. पेट में दर्द था. उसके बाद ब्लड लिया गया. फिर इंजेक्शन लगाया गया. इंजेक्शन की वजह से मेरा गर्भपात हो गया."

पुलिस का क्या कहना है?

‘दी लल्लनटॉप’ को मुरादाबार SP प्रभाकर चौधरी के ऑफिस की तरफ से कहा गया था- डॉक्टर से जो रिपोर्ट मिली है, उसके आधार पर हम ये कह सकते हैं कि मिसकैरेज नहीं हुआ है.

कब-क्या हुआ?

पुलिस ने एंटी-कन्वर्ज़न लॉ के तहत राशिद और सलीम नाम के दो मुस्लिम भाइयों को 5 दिसंबर के दिन गिरफ्तार किया था. राशिद की पत्नी पिंकी को शेल्टर होम भेज दिया. पिंकी हिंदू है. 14 दिसंबर को उसने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि वह 22 बरस की है, बालिग है. उसने राशिद के साथ अपनी मर्ज़ी से जुलाई में शादी की थी. वह उसी के परिवार के साथ रहना चाहती है. लड़की के इस बयान के बाद अदालत ने उसे लड़के के परिवार के पास भेज दिया था.

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