The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Oddnaari
  • Supreme court restores dissolved marriage, says marriages are very important for women in Indian society

18 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी को सुप्रीम कोर्ट ने तलाक क्यों नहीं दिया?

कोर्ट ने कहा कि एक महिला के लिए शादीशुदा होना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. वो पति से अलग रहते हुए भी उसके सिंदूर के सहारे अपना जीवन काट सकती है.

Advertisement
pic
19 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 19 अगस्त 2022, 07:31 PM IST)
Divorce
हिंदू धर्म में विवाहित महिला के सुहाग और सिंदूर की अहमियत होती है: सुप्रीम कोर्ट (फोटो : PTI)
Quick AI Highlights
Click here to view more

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को 18 साल से अलग रह रहे एक पति-पत्नी के तलाक को रद्द कर दिया. पति की अर्ज़ी पर हाईकोर्ट ने तलाक दिया. लेकिन पत्नी तलाक नहीं चाहती थी. वो सुप्रीम कोर्ट गई और कोर्ट ने तलाक के फैसले को पलट दिया. तलाक के लिए पति ने तर्क दिया था कि वो अब साधू बन चुका है और गृहस्थ जीवन से उसे कोई लेना देना नहीं है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई बार एक महिला के लिए शादीशुदा होना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. वो पति से अलग रहते हुए भी उसके सिंदूर के सहारे अपना जीवन काट सकती है. 

जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट्ट की पीठ ने ये भी कहा कि 18 साल से अलग रह रहे दंपत्ति के लिए अलग रहना अब असंभव हो सकता है. लेकिन जिस तरह का व्यवहार समाज महिलाओं के साथ करता है और चूंकि खुद महिला के लिए ये महत्वपूर्ण है कि वो शादीशुदा रहे, इन दोनों बातों को ध्यान में रखते हुए दंपत्ति के तलाक को रद्द किया जाता है.

कैसे हुआ था तलाक

महिला का पति मध्य प्रदेश के भिंड का रहने वाला है. पति ने पहले फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दी थी. तर्क दिया था कि उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई है और अलग रहती है. पत्नी तलाक नहीं चाहती थी. साल 2008 में फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्ज़ी खारिज कर दी. इसके बाद पति मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा. ग्वालियर बेंच में उसने तलाक की अर्ज़ी दी.

 2014 में हाईकोर्ट ने तलाक की मंजूरी दे दी. इसके साथ ही पति को आदेश दिया की वो पत्नी को 5 लाख रुपये दे. इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए कहा, लेकिन हाईकोर्ट ने दूसरी बार भी तलाक का फैसला दिया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई.

कोर्ट में पति की तरफ से तलाक़ के पीछे तर्क दिया गया कि अब वो साधु बन चुका है. उसने सब कुछ त्याग दिया है. सुप्रीम कोर्ट की पीठ का कहना है कि यदि पति साधु ही बन गया है, तो उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए की शादी रद्द है या बहाल . इसके अलावा पीठ ने ये भी कहा कि पति की तरफ से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय के बाद जो राशि महिला को दी गयी थी वो उससे वापस नहीं ली जाएगी.

बिलकिस बानो ने गैंग रेप के 11 दोषियों की रिहाई के बाद गुजरात सरकार से क्या मांगा

Advertisement

Advertisement

()