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सातवीं के लड़कों ने प्रिंसिपल को लिखी चिट्ठी- लड़कियां धर्राटे काट रही हैं

सातवीं कक्षा के बच्चो नें अपनी कक्षा की लड़कियों के लिए कहा ‘धर्राटे काट रही है’.

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10 मई 2022 (अपडेटेड: 11 मई 2022, 09:57 AM IST)
viral letter to principal, Jawahar navodaya Vidyalaya
लड़कों ने आवेदन में लड़कियों से माफी मंगवाने की बात भी लिखी है. लेफ्ट फोटो- Pixabay, राइट फोटो- वायरल आवेदन पत्र.
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उत्तर प्रदेश का औरेया. यहां तैय्यापुर में है एक स्कूल. जवाहर नवोदय विद्यालय. केंद्र सरकार का आवासीय स्कूल है. यहां से एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर ‘धर्राटे काट रही है’. कक्षा सातवीं ‘अ’ के लड़कों ने लिखी है. इसमें मांग की गई है कि क्लास की लड़कियां माफी मांगें.

क्या लिखा है चिट्ठी में?

ये एक शिकायती चिट्ठी है. स्कूल के प्रिंसिपल के नाम लिखी गई है. इसमें लड़कों ने लिखा है कि क्लास की लड़कियों ने उनके नाम रख दिए हैं. किसी को लल्ला, किसी को डामर तो किसी को रसगुल्ला बुलाती हैं. ये भी लिखा है कि लड़कियां क्लास में खूब हल्ला करती हैं. औकात में रहने की बात करती हैं और डायलॉगबाजी करती हैं. साथ में शोर मचाने वाली लड़कियों के नाम भी इस चिट्ठी में लिखे हैं. साथ में लिखी है एक लाइन- ओम फोम धर्राटे काट रही हैं.

वायरल हो रही चिट्ठी की कॉपी.


चिट्ठी को लेकर प्रिंसिपल ने क्या कहा?
ये तो हुई वायरल चिट्ठी की बात. इसे लेकर हमने बात की नवोदय विद्यालय औरेया के प्रिंसिपल डॉक्टर संजीव गुप्ता से बात की. उन्होंने बताया,

“ये दो महीने पहले की चिट्ठी है, मेरे संज्ञान में आज आई है. इसे लेकर आज मैंने स्टाफ मीटिंग भी की, तब मुझे बताया गया कि लड़कों ने चिट्ठी लिखकर अपने वॉर्डन को दी थी और वॉर्डन ने लड़के-लड़कियों से बात करके मामला सुलझा लिया था. मैंने टीचर्स को मेमो भी दिया है कि ऐसी बातें मुझे ज़रूर बताई जानी चाहिए.”

चिट्ठी पर सोशल मीडिया लहालोट हो रहा

इसे लेकर काफे मज़ेदार कमेंट्स भी आ रहे हैं. कोई लिख रहा है कि इसी बहाने पुरुष आयोग का गठन कर दिया जाना चाहिए तो कोई हैंडराइटिंग की तारीफ कर रहा है. कुछ लोगों ने इस पर टैग दैट पर्सन वाला ट्रेल भी शुरू कर दिया है. कुछ उदाहरण आप भी देखिए,

एक शख्स ने लिखा- गंभीर समस्या है, लड़कियां धर्राटे काट रही हैं.

एक ने लिखा- बराबरी का मतलब है- बराबर मौके, बराबर ईनाम और बराबर सज़ा भी.

कोई लड़कों से पीछे नहीं हटने को कह रहा है तो किसी ने आशंका जताई है कि कहीं लड़के धरने पर न बैठ जाएं.

वायरल चिट्ठी पर आए रिएक्शंस.


अक्सर स्कूलों में लड़के-लड़कियों के बीच इस तरह की लड़ाइयां होती हैं. कौन ज्यादा हल्ला करता है, कौन देर से आता है, कौन लड़ाई करता है, कौन गालियां देता है आदि,आदि. बच्चों की लड़ाई इज़ अ पार्ट ऑफ देयर ग्रोइंग अप. लेकिन इस दिशा में बच्चों की काउंसिलिंग ज़रूर होनी चाहिए कि वो किसी के रंग, बॉडी टाइप के आधार पर उन्हें न चिढ़ाएं और न ही उस आधार पर उनका नाम रखें.

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