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भारत में खेलों का ये हाल है कि 29 कोचों पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं

जबकि कई लड़कियां डर के मारे शिकायत वापस भी ले लेती हैं

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16 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 16 जनवरी 2020, 03:12 AM IST)
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यौन शोषण के कई मामलों में शिकायतें वापस भी ले ली जाती हैं क्योंकि कोचेज का डर बना रहता है. (बायीं ओर सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)
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स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया. SAI. देश में सरकार के जितने खेल संस्थान, ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट चलते हैं, ये उनको रेगुलेट करती है. उनकी देखरेख और मैनेजमेंट का जिम्मा इसी पर है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक RTI डालने पर ये पता चला है कि  SAI के पास यौन शोषण के कितने मामले आए.

रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस साल में SAI के पास 45 मामले दर्ज कराए गए, यौन शोषण के. इनमें से 29 मामले कोच के खिलाफ दर्ज कराए गए थे. 2014 में उत्तर पूर्व के एक राज्य की पांच लड़कियों ने अपने 50 साल के कोच पर आरोप लगाया था कि उसने उनका यौन शोषण किया. शरीर का नाप लेने के बहाने उन्हें गलत तरीके से छुआ. वजन कराते समय दो लड़कियों को शर्ट उतारने के लिए कहा और एक और लड़की को गले लगाकर चूमने की कोशिश की. सभी लड़कियों की उम्र 14-15 साल थी. SAI के मुताबिक़, कोच के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, और उसे सर्विस से जबरन रिटायर कर दिया गया. मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है.


Run 1744496 1920 700 2014 में हिसार की पांच लड़कियों ने अपने कोच के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई. लेकिन गांव पंचायत ने मामले में दखल देकर शिकायत वापस करवा दी. बाद में हुई जांच में उस कोच को दोषी पाया गया. (सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)

इस पर पार्लियामेंटरी कमिटी की एक रिपोर्ट भी आई जिसने कोचेज़ को मिलने वाली पॉवर और अथॉरिटी को उनके बुरे व्यवहार से लिंक किया. खिलाड़ियों के लिए SAI में इंटरनल कमिटी है जो उनके व्यवहार पर नज़र रखती है, लेकिन ऐसे कोई भी कायदे कानून कोचेज़ के लिए नहीं हैं.

SAI के ही एक ऑफिशियल के मुताबिक, कोच और अधिकारियों के बीच सांठ-गांठ रहती है. इसकी वजह से यौन शोषण की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता. महिला ट्रेनर्स की कमी भी इसकी वजह है. कोच संख्या में कम हैं, इसलिए उन पर एक्शन भी लिया जाए तो उन्हें कहीं भेज देने का ऑप्शन नहीं रहता. RTI में मिली जानकारी के अनुसार जो 29 मामले कोचेज़ के खिलाफ दर्ज हुए, उनमें से सिर्फ दो के कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट किए गए. एक को सस्पेंड किया गया. पांच को बरी किया गया. पांच की सैलरी में से पैसे काटे गए. एक ने पिछले साल आत्महत्या कर ली.

कई कोच जिनके खिलाफ़ शिकायत भी की गई, उन्हें ट्रांसफर कर दिया गया. तिरुवनंतपुरम की एक महिला ने अपने कोच पर यौन शोषण का आरोप लगाया. उसे ट्रांसफर करके औरंगाबाद भेज दिया गया. जहां पर उनके अंडर 50 ट्रेनी हैं. सभी नाबालिग हैं. 2015 में तिरुवनंतपुरम की ही कुछ लड़कियों ने अपने कोच पर यौन शोषण के आरप लगाए थे. लेकिन वो अभी तक वहां का इंचार्ज बना हुआ है.

SAI की पूर्व DG क्या कहती हैं?

SAI को फरवरी 2018 से जुलाई 2019 तक नीलम कपूर ने हेड किया था. डायरेक्टर जनरल थीं. उनका कहना है कि यौन शोषण के मामले असल में रिपोर्ट किए गए मामलों से कहीं ज्यादा हैं. क्योंकि बहुत से मामलों को तो रिपोर्ट भी नहीं किया जाता. कपूर ने बताया कि जब वो इस केस के डिटेल में गईं, तो उन्होंने पाया कि बहुत सारे मामले तो कई साल से अटके पड़े हैं. उनका कहना है कि बहुत से लोगों को ये पता ही नहीं है कि मामलों की रिपोर्ट कहां की जाए, कुछ लोग चुपचाप सबकुछ सहन कर लेते हैं. उनमें से बहुत से लोगों के मन में ये बात है कि अगर वो कुछ भी कहेंगे, तो उनका चयन नहीं होगा.



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