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'झूठे मामलों की वजह से हमारे यहां रेप केसेस सबसे ज्यादा,' राजस्थान के सीनियर पुलिस अधिकारी बोले

NCRB की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में हर दिन रेप के 17 मामले दर्ज होते हैं.

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ADGP Ravi Prakash Meharda
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सोम शेखर
2 सितंबर 2022 (Updated: 2 सितंबर 2022, 02:15 PM IST)
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हाल में NCRB की रिपोर्ट आई. साल भर में कितने अपराध हुए, किन मामलों से जुड़े अपराध ज़्यादा हुए, किसमें कम हुए, सबका ब्योरा आता है NRCB की सालाना रिपोर्ट में. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, साल 2021 में भारत में रेप के 31 हज़ार 677 मामले दर्ज हुए. माने हर दिन औसतन 87 मामले. राज्यों की बात करें तो रेप के सबसे ज्यादा मामले राजस्थान में दर्ज किए गए. 6337 मामले माने हर दिन औसतन 17 मामले. वहीं दूसरे नंबर पर रहे उत्तर प्रदेश में रेप के 2845 मामले दर्ज किए गए. 

NCRB डेटा सामने आने के बाद राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार और राजस्थान पुलिस की तीखी आलोचना हो रही है. राजस्थान के ADGP (क्राइम) रवि प्रकाश मेहरदा ने NCRB डेटा को लेकर मीडिया से कहा,

"ये प्रसारित किया जा रहा है कि बलात्कार के मामलों में राजस्थान देश में नंबर एक पर है. सबसे पहले तो इसमें ये बात है कि राजस्थान में राज्य सरकार की मुफ़्त (केस) रजिस्ट्रेशन की नीति है. जब भी संज्ञेय अपराध की कोई रिपोर्ट थाने में आती है, तो हम उसे FIR के रूप में ही दर्ज करते हैं. शुरुआत में हम फ़िल्टर नहीं करते कि मामला सही है या ग़लत. सभी मामले दर्ज करते हैं."

क्या है ये मुफ़्त केस रजिस्ट्रेशन पॉलिसी?

राजस्थान सरकार ने अपराधों के मामले में पुलिस थानों में FIR दर्ज करना अनिवार्य कर रखा है. अमूमन क्राइम के मामलों में  इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोत गहलोत कहते रहे हैं कि राज्य सरकार की इस नीति की वजह से हर फरियादी को शिकायत दर्ज कराने में साहस मिला है. और, इसी वजह से केसेज़ की संख्या में बढ़ोतरी हुई है.

ADGP ने आगे बताया कि 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं से रेप के 48 फीसदी मामलों में जांच के बाद कोई मामला नहीं बनता या मामला झूठा निकलता है. फिर आरोपी के ख़िलाफ़ कोई चार्ज-शीट दायर नहीं की जा सकती है. कहा,

"राजस्थान में जब बलात्कार के मामलों की बात आती है, तो एक फ़ाइनल रिपोर्ट दर्ज की जाती है. 48% फ़ाइनल रिपोर्ट्स में ये निकलता है कि मामले झूठे हैं. ये 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं के मामले हैं. इससे भी ज़रूरी बात ये है कि जब नाबालिग लड़कियों की बात आती है, जिसमें पॉक्सो ऐक्ट के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं, तो इन मामलों में राजस्थान देश में 12वें नंबर पर है. हम इसमें और सुधार करेंगे. लेकिन इसका मतलब ये है कि जो दिखाया और फैलाया जा रहा है, स्थिति उससे अलग है.

आंकड़ों के हिसाब से मामले ज़्यादा दिखाई दे रहे हैं, लेकिन हमें फ़ाइनल रिपोर्ट्स और निपटान प्रतिशत को ध्यान में रखना होगा. निपटान, पेंडेंसी और कन्विक्शन में राजस्थान का प्रदर्शन बेहतर है."

विपक्षी पार्टियों ने राज्य में अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि वर्तमान शासन के तहत कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. इस मामले में अभी तक अशोक गहलोत की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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