बिना सिगरेट पिए भी खराब हो सकते हैं फेफड़े, लंबे वक्त से खांसी हो तो तुरंत इलाज है जरूरी
न्यूमोकोनियोसिस का कोई सीधा इलाज नहीं है.

ग्वालियर से हमें अंकित का मेल आया है. उनके पिता ग्वालियर में पत्थरों की खदान में काम करते हैं. लंबे समय से उन्होंने खांसी (Chronic Cough) हो रही थी. तो अंकित के पिता ने नॉर्मल खांसी की दवा ले ली, ये सोचकर कि शायद ये मौसम बदलने के साथ होने वाली खांसी है. पहले तो उन्हें आराम लगा, लेकिन फिर उन्होंने दोबारा खांसी शुरू हो गई. इस बार की खांसी पहले से ज्यादा गंभीर थी, क्योंकि उन्हें खांसते वक्त गले और सीने में दर्द हो रहा था. तकलीफ और बढ़ने पर वो डॉक्टर के पास पहुंचे, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि खदान में काम करने की वजह से उनके फेफड़ों में काफी ज्यादा डस्ट चली गई है. इस वजह से उन्हें न्यूमोकोनियोसिस (Pneumoconiosis) नाम की समस्या हो गई है. क्या है न्यूमोकोनियोसिस और इस समस्या का इलाज कैसे होता है डॉक्टर से जानिए.
न्यूमोकोनियोसिस क्या है और किन लोगों ये समस्या ज्यादा होती है?ये हमें बताया डॉ दीपक शुक्ला ने.

न्यूमोकोनियोसिस (Pneumoconiosis) फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है. इस समस्या में धूल भरी जगह पर काम करने के कारण फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. जैसे कि अगर कोई व्यक्ति लोहे की फैक्ट्री, पत्थर या कोयले की खदान में करने वाले व्यक्ति के फेफड़ों में सांस के साथ धूल के कण अंदर जाते हैं. इससे फेफड़ों में सूजन, इंफेक्शन या फाइब्रोसिस (Lung Fibrosis) (फेफड़ों के टिशू का मोटा हो जाना) की समस्या हो सकती है.
फाइब्रोसिस के कारण फेफड़ों में मौजूद एयरवेज सिकुड़ जाते हैं. ये समस्या लंबे समय तक धूल भरे वातावरण में काम करने से होती है. एक-दो दिन धूल में रहने से ये समस्या नहीं होती. न्यूमोकोनियोसिस की समस्या लंबे समय तक धूल में काम करने वाले लोगों को ही होती है. जैसे कि -
> कोयले की खदान में काम करने वाले व्यक्ति को 'ब्लैक लंग डिजीज' (Black Lung disease) हो सकती है.
> जो लोग सिलिका डस्ट में काम करते हैं उन्हें 'सिलिकोसिस' (Silicosis) की समस्या हो सकती है.
> जो मरीज एस्बस्ट डस्ट में काम करते हैं उन्हें 'एस्बेस्टोसिस' (Asbestosis) हो सकती है.
> अलग-अलग तरह की धूल में काम करने से अलग-अलग समस्याएं होती हैं. ग्रेनाइट और संगमरमर की खदानों में काम करने वाले लोगों को भी ये दिक्कत हो जाती है.
न्यूमोकोनियोसिस के लक्षण> सांस लेने में तकलीफ होना,
> सांस लेते समय खांसी आना,
> खांसी में बलगम आना,
> बार-बार फेफड़ों में इंफेक्शन होना.
इलाज> न्यूमोकोनियोसिस का कोई इलाज नहीं है.
> इसकी जांच CT स्कैन और एक्स-रे के द्वारा की जाती है.
> चूंकि इलाज नहीं है इसलिए जो लक्षण दिख रहें हैं उन्हीं का इलाज किया जाता है.
> जैसे किसी की सांस फूल रही है तो इसका इलाज होगा, या किसी को खांसी आ रही है तो खांसी का इलाज किया जाएगा.
> अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है तो फेफड़ा ट्रांसप्लांट (Lung transplant) करने की जरूरत भी पड़ सकती है.
बचाव> अगर किसी धूल वाली जगह पर काम कर रहे हैं तो मास्क लगाएं, सभी गाइडलाइंस को फॉलो करें.
> धूल वाली जगह पर कम से कम जाएं.
(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: खांसी ठीक नहीं हो रही, सांस में भी तकलीफ है? बड़ी दिक्कत हो सकती है

