हिंदू हो या मुस्लिम, महिलाओं को नौकरी नहीं मिल रही! वजह जान लीजिए
ऑक्सफैम की रिपोर्ट में पता चली महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव की वजह.

ऑक्सफैम (Oxfam) की एक नई रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत के गांवों में महिला को महिला होने की वजह से 100% भेदभाव (gender discrimination) का सामना कर पड़ता है. शहरों का हाल बहुत अच्छा नहीं है. शहरों में भी महिलाओं के काम पाने की संभावना केवल दो प्रतिशत ही है. वजह? सामाजिक ढर्रा और एम्प्लॉयर्स के पूर्वाग्रह. 14 सितंबर को प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक़, महिलाओं की वेतन पुरुषों की तुलना में 67 प्रतिशत कम है. यानी अगर पुरुषों को किसी काम के 100 रुपये मिलते हैं तो महिलाओं को उसी काम के 33 रुपये ही मिलते हैं.
लिंग का भेद, जाति और धर्म से भी बड़ाऑक्सफैम. 21 स्वतंत्र संगठनों का एक परिसंघ. ऑक्सफैम इंटरनेशनल नाम की संस्था के नेतृत्व में स्थापित हुआ. 1942 में. अपनी वेबसाइट के 'अबाउट अस' में ऑक्सफैम वालों ने लिखा है कि ऑक्सफैम एक वैश्विक आंदोलन है, जो ग़रीबी और अन्याय को ख़त्म करने के लिए ग़ैर-बराबरी के खिलाफ़ लड़ रहा है. ये संस्था सालाना असमानता, बेरोज़गारी और ग़रीबी पर एक रिपोर्ट जारी करती है. इस साल भी की. 'इंडिया डिस्क्रिमिनेशन रिपोर्ट 2022' नाम से.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव इस क़दर है कि धर्म और जाति का भेद पीछे छूट जाता है. महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति चाहे जो हो, उनके साथ भयंकर भेदभाव किया जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है,
वजह क्या है?रिपोर्ट के प्रमुख लेखक प्रोफेसर अमिताभ कुंडू कहते हैं,
रिपोर्ट में इससे निपटने के भी कई तरीक़े बताए हैं. लिखा है कि महिलाओं की लेबर-फ़ोर्स में भागीदारी के अंतर को पाटने के लिए, भारत सरकार को संभावित एम्प्लॉयर्स को इंसेंटिव देना होगा. ताकि वो महिलाओं को बेहतर वेतन, ट्रेनिंग और नौकरी में कोटा दे सकें.
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