Marriage age 18 से 21 करने पर Owaisi के बोल
शादी की सही उम्र पर विपक्ष औप सरकार के बीच तना तनी क्यों है?
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छोटी उम्र में मां बनने वाली महिलाओं में पोषण की कमी, एनीमिया, विटामिन और आयरन की कमी देखी जाती है.
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लड़की की शादी की उम्र क्या होनी चाहिए? ये सवाल कोई मुझसे पूछे तो भाई मेरा जवाब तो यही होगा कि जब वो वयस्क हो, और मेंटली इसके लिए तैयार हो. क्योंकि भाई, शादी का मतलब केवल सुंदर-सुंदर कपड़े, लहंगा और जूलरी नहीं होता. शादी एक अलग ही दुनिया है. और इसके लिए आप तैयार न हों तो फिजिकली और मेंटली, ये दोनों तरीकों से आपको बर्बाद कर सकता है. मेरी कुछ सहेलियों की शादी 23-24 में हो गई. कुछ अपने अर्ली 30s में भी शादी के लिए खुद को तैयार नहीं पाती हैं.
लेकिन हर लड़की इतनी खुशनसीब हो कि अपने मन से, अपने मन की उम्र में शादी करे, ऐसा इंडिया में तो पॉसिबल नहीं है. कुछ मां-बाप का बस चले तो लड़की के पैदा होते ही उसे किसी दूसरे के हवाले कर दें और कहें, चलो संकट कटा. चाइल्ड मैरिज की हिस्ट्री है अपने यहां. इसलिए एक्टिव होती हैं सरकारें और वो चुने हुए नेता जो हमारे लिए कानून बनाते हैं. पिछले कुछ दिनों से ये कानून बनाने वाले लोग एक ही बात पर अपना सर फोड़ रहे हैं. कि लड़कियों की शादी की कम से कम उम्र क्या हो.
बवाल हो क्यों रहा है?
बीते दिनों हमरी सहयोगी सोनल आपके लिए एक बढ़िया सा डिस्कशन लेकर आई थीं. इस बात पर कि लडकियों की शादी की न्यूनतम उम्र को 18 से 21 करना कितना सही है और कितना गलत. लेकिन हमारे नेता बढ़िया डिस्कशन करते नहीं. तो इस प्रपोजल के अराउंड अब नेता किस किस तरह की बातें कर रहे हैं. ये बता रही हूं मैं आपको आज म्याऊं में. शुरू से शुरू करते हैं. Prohibition of Child Marriage (Amendment) Bill को केंद्रीय कैबिनेट से मंज़ूरी मिल गई है. ये बिल लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 21 करने की बात करता है. ये बिल संसद में पेश किया जाएगा, दोनों सदनों में अगर ये पास होता है तो फिर कानून लागू हो जाएगा. जिसके बाद भारत में 21 से कम उम्र के लोगों की शादी गैर कानूनी मानी जाएगी. इसकी कवायद शुरू हुई थी 2020 में. सबसे पहले फिनांस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बजट सेशन में इसका ज़िक्र किया था. फिर 15 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से कहा, " सरकार देश की बेटियों के स्वास्थ को लेकर चिंतित है. उन्हें मालन्यूट्रीशन से बचाने के लिए बचाने के लिए ज़रूरी है कि सही उम्र में उनकी शादी हो. इसलिए सरकार ने एक टास्क फ़ोर्स का गठन किया है. और उनके रिकमेंडेशन के आधार पर सरकार फैसला करेगी."सरकार के तर्क क्या हैं?
शादी के उम्र बढ़ाने के पीछे सरकार ने मोटा-मोटी 3 कारण बताए. 1. Maternal Mortality Rate में कमी लाना. यानी बच्चे के जन्म के दौरान महिलाओं की मृत्यु हो जाती है, उसमें कमी लाना. डाटा के अनुसार 1000 बच्चे पैदा होने पर 110 मांओं की मृत्यु हो जाती है. 2. लड़कियों को मालन्यूट्रीशन से बचाना. छोटी उम्र में मां बनने वाली महिलाओं में पोषण की कमी, एनीमिया, विटामिन और आयरन की कमी देखी जाती है. 3. चाइल्ड मैरिज रोकना. हाल ही में आए NFHS सर्वे में आज भी भारत में गांवों में 4 में से 1 लड़की की शादी 18 साल से पहले हो जाती है. ये तो थे सरकार के तर्क. अब जानते हैं कि विपक्ष इसका क्यों विरोध कर रहा है. उनके क्या तर्क हैं. सबसे पहले CPIM नेता बृंदा करात के तर्क जानते हैं. उन्होंने NDTV के लिए ओपिनियन लिखकर अपने तर्क स्पष्ट किए. वो लिखती हैं - 18 साल की लड़की को वयस्क माना जाता है. उसके किए गए सारे एक्शन की रेस्पॉन्सिबिलिटी उसकी है. 18 से 21 साल की कोई लड़की क्राइम करती है तो उसे एडल्ट जेल में डाला जाता है. लेकिन जैसे ही शादी के लिए फैसला लेने की बात आती है तो आप उसे छोटा मानने लगते हैं. ये वीमेन एम्पावरमेंट नहीं है. ये उसे बच्चे की तरह ट्रीट करना है. साथ ही जो लड़कियां अपनी मर्ज़ी से अपनी कास्ट या कम्युनिटी के बाहर शादी करना चाहती हैं, ये फैसला उनके लिए रोड़े की तरह है. और रही बात चाइल्ड मैरिज की तो इसके रूट कॉज को एड्रेस करना चाहिए. ज्यादातर गरीब लोग अपनी बेटी की शादी 18 साल से पहले करा देते हैं. लड़कियों की जल्दी शादी कराने को वो गरीबी से डील करने, ज्यादा दहेज़ ना देने और सेक्सुअल असॉल्ट से बचाने के तरीके की तरह देखते हैं. और इसके सॉल्यूशन ले लिए हमें केरल से सीखना चाहिए. वहां चाइल्ड मैरिज का रेट कम है क्यूंकि लड़कियों को हायर एजुकेशन के लिए काम होता है. दुनिया के ज्यादातर देशों में वयस्क होने और शादी की न्यूनतम उम्र एक यानी कि 18 साल है. यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली में 1989 में इसे लेकर एक रिजॉल्यूशन पास हुआ था, जिसमें भारत ने भी साइन किया था. अब पूरी दुनिया की जो सहमति बनी थी, उसके खिलाफ जाने को लेकर भारत सरकार जो वजह दे रही है वो बिल्कुल भी कंविंसिंग नहीं हैं.विपक्ष ने क्या कहा?
AIMIM चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-"18 की उम्र में भारत के नागरिक कॉन्ट्रैक्ट साइन कर सकते हैं, बिज़नस शुरू कर सकते हैं, PM चुन सकते हैं, MP और MLA तक इलेक्ट कर सकते हैं. मुझे लगता है कुछ बदलना ही है तो लड़कों की शादी की उम्र बदलनी चाहिए. उन्हें भी 18 साल की उम्र में शादी का अधिकार देना चाहिए"सपा सांसद शफिकुर रहमान बर्क ने कहा-
"भारत एक गरीब देश है. हर कोई अपनी बेटी की शादी जल्दी करना चाहता है. मैं इस बिल को पार्लियामेंट में सपोर्ट नहीं करूँगा"कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा-
"मेरे विचार में लड़के और लड़कियों की शादी की उम्र समान होनी चाहिए यानी 21 साल. पर ये कानून 2023 में इम्प्लीमेंट होना चाहिए. 2022 में जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि लोगों को बताया जा सके कि क्यों लड़कों और लड़कियों की शादी 21 साल के बाद करें."TMC सांसद डोला सेन ने कहा -
"हम क्या खायेंगे, क्या पहनेंगे, कितने साल पर शादी करेंगे, सब मोदी जी के हाथ में है."सपा की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कहा,
"यह अच्छा फैसला है. इससे लड़कियों को पढ़ने का मौका मिलेगा. लड़कियां ज्यादा स्वतंत्र हो सकेंगी. उन्हें नौकरी करने के बेहतर अवसर मिलेंगे."शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा-
"जो भी फैसले हो रहे हैं, महिलाओं को बगैर पूछे, बिना उनकी राय लिए. कैबिनेट ये फैसला करेगी कि कितनी पढ़ाई करनी है, किससे शादी करनी है, कब बच्चा पैदा करना है, तो महिलाएं क्या करेंगी?"तो ये थे कुछ तर्क इस विषय पर विपक्षी नेताओं के. इसके अलावा हमने अमिता पित्रे से भी बात की थी. वो ऑक्सफेम इंडिया में जेंडर जस्टिस की लीड स्पेशलिस्ट हैं. आप उनके भी तर्क सुनिए -
"आधी मेटरनल डेथ्स 21 साल से नीचे हुई हैं लेकिन आधी 21 साल से ऊपर भी तो हुई हैं. NFHS-5 में क्या निकल कर आया? बच्चों और महिलाओं का कुपोषण बिल्कुल कम नहीं हुआ है भारत में. तो अगर आप कुपोषित है तो 21 के ऊपर बच्चा करना भी बहुत ख़तरनाक है. हमारे यहां मैटरनल डेथ ज़्यादा है क्योंकि एनीमिया, आयरन की कमी, इसका मुख्य कारण है. और उसके लिए हम कुछ नहीं करते."एक आम लड़की के तौर पर जब मैंने दोनों पक्षों की बातें सुनती हूं, तो दोनों ही सेंसिबल लगती हैं. लेकिन 18 साल की लड़की की शादी इसलिए कर देनी चाहिए क्योंकि उसके पिता गरीब हैं, इससे वाहियात तर्क तो शायद दिया ही नहीं जा सकता. आदर्श देश तो वही होगा जिसमें लड़कियां अपने मन से प्रेम और विवाह कर सकें. और अपने मन से ही उस रिश्ते से बाहर आने की छूट भी उन्हें हो. हमें 2021 में लड़कियों की शादी की मिनिमम एज डिस्कस करनी पड़ रही है. ये अपने आप में इस बात का सबूत है कि महिलाओं के मामले में, हम एक कल्चर के तौर पर बहुत पीछे खड़े हैं. आपकी क्या राय है इस मसले पर मुझे कमेंट सेक्शन में बताइए. कल फिर मिलेंगे एक नए टॉपिक के साथ. तब तक अपना ख्याल रखिये. शुक्रिया.

