बचपन में एक ऐड आया करता था. जिसके आते ही मम्मी किचन में किसी जरूरी काम से चलीजातीं, दादाजी बगलें झांकने लगते और पापा अचानक रिमोट ढूंढने लगते. डीलक्स निरोधका. वैसे तो शायाद हम चुप चाप बिना सवाल किये पूरे ऐड देख भी लेते. लेकिन बड़े लोगोंको कसमसाते हुए देखकर और क्यूरियस हो जाते. ऐसा ही एक ऐड माला-डी गर्भनिरोधक गोलीका भी था.आपको अबतक आइडिया लग ही गया होगा कि आज बात हो रही है नॉटी ऐड्स की. नहीं. असल मेंबात हो रही है गर्भ निरोध यानी कॉन्ट्रासेप्शन की.NFHS की रिपोर्ट कॉन्ट्रासेप्शन के बारे में क्या कहती है?पिछले कुछ दिनों से हम NFHS यानी नेशनल फॅमिली हेल्थ सर्वे की अलग अलग फाइंडिंग्सआपके सामने ला रहे हैं. जैसे बीते दिनों हमने आपको बताया था कि महिलाओं में किस तरहघरेलू हिंसा को लेकर ये समझ बनी हुई है कि उन्हें पीटा जाना ठीक है. इसी सर्वे कीएक और रिपोर्ट कॉन्ट्रासेप्शन पर है. इस रिपोर्ट में आई चीजें पहले तो आपको बतादें:कॉन्डम इस्तेमाल करने वाले पुरुषों की संख्या 10% भी नहीं है (सांकेतिक तस्वीर)1. भारत में 10 में से एक से भी कम पुरुष कॉन्डम का उपयोग करते हैं. यानी कॉन्डम काइस्तेमाल करने वाले पुरुषों की संख्या 10 फीसद से भी कम है. सिर्फ शहरों की बात भीकरें तो भी संख्या कोई बहुत अच्छी नहीं है. शहरों में लगभग 13 फीसद पुरुष कॉन्डम काइस्तेमाल करते हैं.2. वहीं 10 में से लगभगm चार महिलाएं प्रेगनेंसी से बचने के लिए नसबंदी का रास्ताअपनाती हैं. यानी लगभग 38 फीसद महिलाएं नसबंदी करवाती हैं.आप देख सकते हैं कि पुरुषों में ये संख्या औरतों के मुकाबले कितनी कम है. और ये तबहै जब सर्वे में 82 फ़ीसद पुरुषों ने ये स्वीकार किया है कि उन्हें कॉन्डम इस्तेमालकरने के हेल्थ बेनेफिट्स के बारे में मालूम है.अक्सर महिलाओं को मैंने ये कहते पाया है कि उनके पति कॉन्डम यूज नहीं करते क्योंकिउन्हें इसके इस्तेमाल से अजीब सा लगता है. या फिर उन्हें संतुष्ट महसूस नहीं होता.या फिर उन्हें ये लगता है कि अगर प्रेगनेंसी को होने से रोकना है, तो ये उनका कामनहीं है. चूंकि प्रेगनेंसी महिला को होती है, तो ये महिला का ही काम है कि वो इसेरोकने के उपाय लगाए.एक्सपर्ट्स और काउंसलर्स क्या कहते हैं?कॉन्ट्रासेप्टिव और स्टेरलाइज़ेशन यानी नसबंदी मेल और फीमेल दोनों के लिए होता है.लेकिन ये जेंडर स्पेसिफिक कैसे बन गया इसे समझने के लिए हमने बात की कुछ ऐसे लोगोंसे जो लंबे समय से ग्राउंड पर काम कर रहे हैं.मोबियस फाउंडेशन लम्बे समय से लोगों को फैमिली प्लानिंग के बारे में बता रहा है,उनकी कॉउंसलिंग के ज़रिये कॉन्ट्रासेप्शन, स्टेरलाइज़ेशन और फैमिली प्लानिंगके तरीक़े के बारे में अवेयर कर रहा है. हमने उनके CEO डॉ राम से बात की और जाना किइस काम को करने में उन्हें कौन सी कठिनाइओं का सामना करना पड़ता है. "जो हाई टोटलफर्टिलिटी रेट वाले ज़िले हैं, ख़ासतौर से उत्तर प्रदेश और बिहार में ज़्यादा हैं.यूपी में कुल 11 ज़िले इसमें आईडेंटिफाई किए गए हैं. राष्ट्रीय स्तर पर यह समस्याहै, कल्चरली और पॉलिसी लेवल पर भी, कि ज़्यादातर महिलाओं के गर्भ निरोध पर ज़ोर है.पुरुष कम हैं. अभी हमारे साथी ग्राउंड पर काम कर रहे हैं और वे बताते हैं किपुरुषों को स्टरलाइज़ेशन के लिए कन्विंस करना बहुत मुश्किल होता है." मैंने मोबियसफाउंडेशन के श्रवण से भी बात की. श्रवण रोज़ ग्राउंड पर जाते हैं, लोगों से मिलतेहैं. हमने उनसे पूछा कि ग्राउंड पर उन्हें लोगों से क्या बात सुनने को मिलती है-"जो ग्राउंड पर हक़ीक़त हमें दिखती है पुरुष नसबंदी से संबंधित, वो है पुरुष कीपौरूष से जुड़ी मानसिकता. कि कहीं हमारा पौरूष न चला जाए. जब हम लोग गांव में लोगोंको काउंसलिंग करने जाते हैं, जो खुलकर बात सामने आती है वह यही है कि पुरुषों कोलगता है कि कहीं उनकी पौरूष शक्ति ना चली जाए. और पौरूष चले जाने पर वह स्त्री केसामने छोटा महसूस करेंगे.हमारे जागरूकता अभियान का मुख्य कारक यही है कि हम लोगों को बताते हैं कि नसबंदी केबाद भी आप अपना व्यावहारिक और वैवाहिक जीवन वैसे ही व्यतीत कर सकते हैं जैसे आपकरते हैं. नीम हकीम द्वारा फैलाई गई भ्रांतियां और पुरुष प्रधान संस्कृति इसकाउंसलिंग में आड़े आती है."कॉन्ट्रासेप्टिव और स्टेरलाइज़ेशन, मेल और फीमेल दोनों के लिए होता है. तो ये जेंडरस्पेसिफिक कैसे बन गया?महिलाओं के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं. जैसे गोलियां, इंजेक्शन या नसबंदी. हम येनहीं कह रहे हैं कि महिलाएं ये ऑप्शन न अपनाएं. उन्हें ज़रूर ये ऑप्शन अपनाने चाहिए.लेकिन ये ऑप्शन अपनाने में पुरुष हिचकते क्यों हैं, ये सवाल है. अगर महिला गर्भवतीहोने से बचने के लिए या दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिए कदम उठा सकती है तोपुरुष क्यों नहीं? क्या एक पति पत्नी के रिलेशनशिप में पुरुष का का केवल सेक्स कोएन्जॉय करना है? क्या उसका काम अपनी पत्नी की रिप्रोडक्टिव हेल्थ का खयाल रखना नहींहै? क्या पति के हिस्से मज़े और पत्नी के हिस्से ज्म्मेदारियां आएं, ये सेक्स कीपरिभाषा है? एक पुरुष जब 'मज़ा नहीं आता' कहकर कॉन्डम का इस्तेमाल करने से मना करदेता है, उसी वक़्त वो अपनी पत्नी को गोलियों और इंजेक्शन या एक अनचाही प्रेगनेंसीके हवाले कर देता है? क्या यही मर्दानगी है?आप इन सवालों के बारे में सोचिएगा. और अपनी राय मुझे ज़रूर बताइएगा कमेंट बॉक्स में.