यौन शोषण के 70 साल के दोषी को सजा देते हुए कोर्ट ने नाबालिगों के माता-पिता को सलाह दी है
13 साल की पोती से दुष्कर्म करता था सौतेला दादा, कोर्ट ने उम्र की परवाह किए बिना सजा दी.

मुंबई में एक 13 वर्षीय नाबालिग के यौन शोषण के मामले ने हर किसी को हैरान करके रख दिया है. खबरों के मुताबिक बच्ची से दुष्कर्म करने वाला कोई और नहीं, बल्कि 70 वर्षीय सौतेला दादा है. अदालत ने उसे उसकी करनी की सजा दे दी है. बच्चों को यौन शोषण से बचाने वाले कानून यानी पॉक्सो के तहत आरोपी को सात साल की सजा सुनाई गई है.
मामला क्या है?आरोपी मामला दर्ज़ करवाने वाली महिला का सौतेला पिता है. महिला के मुताबिक घटना सितंबर 2014 की है. उस दिन वो किसी काम से बाहर गई थी. वापस लौटी तो देखा कि उसका सौतेला पिता नाबालिग पोती को गलत तरीके से पकड़ कर बैठा था. और फोन पर पॉर्न वीडियो दिखा रहा था. महिला के आने पर आरोपी ने नाबालिग को जाने दिया. लेकिन बाद में मां ने बेटी से पूछा तो उसने बताया कि सौतेला दादा उसका यौन शोषण करता है. उसे मोबाइल पर पॉर्न वीडियो दिखाता है.
कोर्ट का फैसलाइसके बाद महिला ने सौतेले पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. बाद में मामला कोर्ट पहुंचा. आरोपी पर पॉक्सो ऐक्ट के तहत धाराएं लगाई गईं. लगभग 8 साल बाद मामले में कोर्ट का फैसला आया है. उसने आरोपी की उम्र की परवाह किए बिना पीड़िता को न्याय दिया है. इंडिया टुडे से जुडीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई की POCSO अदालत ने अपने फैसले में कहा,
“उम्र या बीमारी को आधार बना कर अपराध को अनदेखा नहीं किया जा सकता है. और न ही आरोपी के प्रति दया की भावना दिखानी चाहिए. उसने नाबालिग के भरोसे को तोड़ा है और उसके साथ मार-पीट भी की है. ये सब नाबालिग के पूरे जीवन पर निशान छोड़ देगा.”
POCSO अधिनियम के हवाले से जज ने कहा,
आरोपी का क्या कहना है?“नाबालिग बच्चों पर होने वाले यौन हमलों से जुड़े अपराधों के लिए कठोर सजा होने की जरूरत है. रेप और यौन अपराध सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर बीमारी है. नाबालिग उन लोगों का आसान शिकार बनते हैं जो हवस पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है.”
ट्रायल के दौरान आरोपी ने अपना बचाव करने की पूरी कोशिश की. उसके वकील ने कोर्ट में बताया,
“उनके खिलाफ पारिवारिक विवाद के कारण मामला दर्ज किया गया है. उनकी सौतेली बेटी ने 25,000 रुपये मांगे थे. जो उन्होंने देने से इनकार कर दिया. जिसके बाद उनके खिलाफ ये केस दर्ज किया गया है.”
लेकिन मेडिकल रिपोर्ट, सबूत और गवाहों के आधार पर नाबालिग के साथ हुई यौन हिंसा की पुष्टि की गई है. ये सब देखने के बाद जज ने कहा,
“आरोपी की गवाही को हम खारिज करते है क्योंकि उसने पहले ऐसा कुछ नहीं बताया था. ये हमारे समाज में कुछ नया नहीं है कि पीड़ित सालों तक चुप रही और हमलों को झेल रही हैं. आरोपी ने पीड़िता से कहा अगर उसने किसी को कुछ बताया तो वो उसके माता-पिता को मार देगा. और नाबालिग धमकी के दबाव में आ गई.”
इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया और उसे सात साल की सजा सुनाई. साथ ही कहा कि माता-पिता कम उम्र के बच्चों को फ़ोन देने से बचें, क्योंकि उन्हें नहीं पता है वो क्या देख रहे हैं. या कोई बड़ा उन्हें क्या दिखा रहा है.
ये खबर हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं मनीषा ने लिखी है.
ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे में शिवलिंग मिलने के दावे के बाद क्या बोले ओवैसी?

