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कैंसर के करोड़ों केस सामने आ रहे हैं, इन 4 कैंसरों को पकड़ने की तरकीब डॉक्टर से जान लीजिए

40 की उम्र पार कर चुके पुरुषों को कई बीमारियों का खतरा होता है. खासकर कैंसर का. उन्हें प्रोस्टेट कैंसर, कोलन कैंसर, लंग कैंसर और मुंह के कैंसर से बचने की ज़रूरत है. समय से पहले इनका कैसे पता लगाएं?

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सरवत
| अदिति अग्निहोत्री
15 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 02:44 PM IST)
most common cancers in men above 40 and how to reduce risk
पुरुषों में उम्र बढ़ने पर कैंसर का रिस्क भी बढ़ता जाता है
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40 की उम्र पार करते ही हमारे शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं. हमारी इम्यूनिटी कमज़ोर होने लगती है. दिल से जुड़ी बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है. टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा रहता है. कुछ लोगों में मोतियाबिंद की शुरुआत हो जाती है. इसके अलावा, कुछ तरह के कैंसर का रिस्क भी बढ़ जाता है. खासकर पुरुषों में.

कैंसर के मामले भारत समेत दुनियाभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं. WHO के मुताबिक, साल 2022 में कैंसर के 2 करोड़ नए मामले सामने आए थे. 97 लाख मौतें भी हुई थीं. बहुत सारे मामलों में कैंसर को समय रहते रोका जा सकता है. हालांकि, इसके लिए ज़रूरी है कैंसर के लक्षणों को पहचानना और 40 साल की उम्र के बाद कुछ आम टेस्ट करवाना. इससे बड़ी आसानी से कैंसर को पकड़ा जा सकता है.

40 पार करने के बाद पुरुषों को कौन-कौन से कैंसर से सतर्क रहना चाहिए? और, इनसे बचने के लिए क्या टेस्ट कराने चाहिए? हमें बताया डॉक्टर अमित उपाध्याय ने. 

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डॉ. अमित उपाध्याय, सीनियर कंसल्टेंट, ऑन्कोलॉजी, पीएसआरआई हॉस्पिटल
प्रोस्टेट कैंसर

40 साल की उम्र के बाद पुरुषों को होने वाले कैंसर में सबसे आम प्रोस्टेट कैंसर है. प्रोस्टेट कैंसर में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे यूरिन में रुकावट आना. रात में बार-बार यूरिन के लिए उठना और यूरिन पास करने के बाद भी ऐसा लगना कि पूरा यूरिन पास नहीं हुआ है.

प्रोस्टेट कैंसर उम्र से जुड़ी बीमारी है. बिना कैंसर के भी प्रोस्टेट का बढ़ना बहुत आम है. लिहाज़ा ये जानना बहुत ज़रूरी हो जाता है कि प्रोस्टेट में दिक्कत कैंसर की वजह से है या बिना कैंसर. इसके लिए 40 पार कर चुके लोगों को हर साल PSA (प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन) टेस्ट कराने के लिए कहा जाता है. अगर PSA की वैल्यू 2.5 से ज़्यादा निकलती है तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए, ये जांचने के लिए कि कहीं प्रोस्टेट कैंसर तो नहीं हो गया है.

कोलन कैंसर

दूसरा सबसे आम कैंसर है कोलन कैंसर यानी आंतों का कैंसर. इसे कोलोरेक्टल कैंसर भी कहते हैं और ये आंत या मलाशय में होता है. ये कैंसर विकसित देशों में बहुत आम है. इसकी वजह डाइट में फाइबर, फलों, सब्ज़ियों का कम होना और प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट का ज़्यादा होना है. ये आम कारण हैं जो कोलन कैंसर को बढ़ाते हैं क्योंकि ये आंतों से जुड़ा कैंसर है, इसलिए इसके लक्षण पेट से जुड़े होते हैं. जैसे बार-बार डायरिया होना. कब्ज़ की दिक्कत रहना. स्टूल पास करते वक्त खून आना. बिना किसी वजह एडल्ट्स में खून की कमी हो जाना. ये लक्षण आंतों के कैंसर की ओर इशारा करते हैं.

इस कैंसर का पता करने के लिए कोलोनोस्कोपी कराई जाती है. इसे 50 साल की उम्र के बाद, हर 10 साल में एक बार कराना चाहिए. हालांकि अगर परिवार में किसी को कोलन कैंसर या पॉलीप्स हुआ है या किसी को इंफ्लामेटरी बॉवल डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस रहा है तो ऐसे लोगों को 40 साल के बाद, हर 5 साल में कोलोनोस्कोपी करानी चाहिए. स्टूल ऑकल्ट ब्लड नाम का एक टेस्ट भी होता है. ये दिखाता है कि कहीं स्टूल में खून तो नहीं आ रहा. इस टेस्ट को भी साल में एक बार ज़रूर कराना चाहिए. इससे कैंसर का जल्दी पता लगाने में मदद मिलती है.

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स्मोकिंग करने वालों में फेफड़ों का कैंसर होना आम है
लंग कैंसर

तीसरा सबसे आम फेफड़ों का कैंसर है. इसका जल्दी पता चलना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ये बहुत तेज़ी से फैलता है और जानलेवा हो सकता है. अगर कोई सिगरेट पीता है या पहले पीता रहा है तो उन्हें साल में एक बार लो-डोज़ सीटी टेस्ट कराना चाहिए. ये टेस्ट न करा सकें तो बीच-बीच में कम से कम एक एक्सरे ज़रूर कराते रहें.

मुंह का कैंसर

भारत में मुंह का कैंसर भी बहुत आम है. इसे ओरल कैविटी का कैंसर भी बोलते हैं. ये स्मोकिंग करने वालों और तंबाकू खाने वालों में बहुत आम है. अगर मुंह या जीभ में कोई अल्सर है जो ठीक नहीं हो रहा. मसूड़ों या मुंह में कहीं से खून आ रहा है. मुंह के अंदर या ज़ुबान पर सफेद रंग के चक्कते हैं जो ठीक नहीं हो रहे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. ये मुंह का कैंसर हो सकता है.

बचाव

कुछ चीज़ों को अपनाकर हम खुद को कैंसर से बचा सकते हैं. जैसे हेल्दी लाइफस्टाइल. मोटापे से बचें. खाने में फल और सब्ज़ियों को शामिल करें. रोज़ एक्सरसाइज़ करें. बहुत आलस न करें. समय-समय पर अपना हेल्थ चेकअप कराएं. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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