जब भी आपको दुनिया बेगानी लगने लगे, मॉडर्न लव का ये एपिसोड देख लीजिएगा!
सेल्फ लव का रास्ता बहुत सारी लड़कियां नहीं चुन पातीं. वो या तो खुद को कैद कर लेती है या दुनिया की बनाई बंदिशों में पड़ जाती हैं.

“मैं अपनी फेवरेट हूं.”
सालों पहले ‘जब वी मेट’ में गीत ने ये कहा था. फिल्म भी खूब चली और ये डायलॉग भी सुपरहिट हुआ. मिडिल क्लास घर की लड़की. बड़बोली. बबली. खुद से प्यार करने वाली. ये गीत कितनी ही लड़कियों की फेवरेट हुई, कितनों की इंस्पिरेशन बनी. इस गीत से कितनी ही गीत बनी. फिल्मों में, घरों में. वहीं से कल्ट की शुरुआत हुई. इसने लड़कियों को ‘सेल्फ लव’ का पाठ पढ़ाया.
अपना वीकेंड मैंने खर्च किया अमेज़न प्राइम पर आई सीरीज़ ‘मॉडर्न लव’ के नाम. चालीस मिनट के छह एपिसोड की सीरीज़ है, जिसमें शोनाली बोस, हंसल मेहता, ध्रुव सहगल, नुपुर अस्थाना, विशाल भरद्वाज और अलंकृता जैसे डायरेक्टर्स ने अपने नज़रिए से कहानियां दिखाई है. मुंबई की. प्रेम की. ये आपके और मेरे जैसे लोगों की कहानियां हैं जो न्यूयॉर्क टाइम्स के कॉलम से उठाई हुई हैं. अब ये सीरीज़ कैसी है, इनमें क्या क्या है, देखने लायक है या नहीं, इसका ठीक ठाक एनालिसिस तो फिल्म रिव्यू करने वाले ही बता पाएंगे. मैं तो बात करने आई हूं, इसकी कुछ कहानियों की. जो ‘सेल्फ लव’ पर बात करती हैं.
एपिसोड का नाम ‘रातरानी’ है. डायरेक्ट किया है शोनाली बोस ने. यही इस सीरीज़ का पहला एपिसोड भी है. ये कहानी एक कश्मीरी महिला की है. जिसका पति शादी के 10 साल बाद उसे एक दिन छोड़कर चला जाता है, क्यूंकि उसे ‘मज़ा नहीं आ रहा’ होता. इसके बाद शुरू होती है लाली की असल कहानी. मूव ऑन की. खुद से प्यार करने की. अपने लिए जीने की. हम सब की ज़िन्दगी में कोई न कोई ऐसा पल आता ही है, जहां हमें धोखा मिलता है, मन बैठता है, हम दुखी होते हैं. ‘रातरानी’ की लाली उसी फेज़ से निकलने की कोशिश करती है.
शुरुआत में वो वैसे ही भड़भड़ाती है, जैसे कोई भी आम आदमी टूटता है. रोती है, चीखती है, कमज़ोर पड़ती है. जान देने की कोशिश करती है. वो अपनी साइकल जिससे उससे चिढ़ होती है, उसे निकालती है. उसे पोंछती है और उसे चलाना शुरू करती है. दिखता है कि उसे चलाना नहीं आता, दिखता है कि भीड़ से उसे डर लगता है,पर वो साइकल से चलना नहीं छोड़ती. ये कहानी लाली और उसकी साइकल की भी है, साइकिल से चिढ़ और फिर उससे लगाव और फिर उसके जतन की कहानी. साइकिल से दुख के उस फ्लाईओवर को पार करने की भी है, जिसके आगे अक्सर हम खुद को बेबस पाते हैं.
एक सीन है, घर का छज्जा गिर जाता है. सुधरवाने का खर्च 20 हज़ार रुपये बैठता है. लाली कहती है-
“लुत्फी वापस आएगा, इसलिए बनाने का सोचा था मैंने, वो नहीं आया तो? अकेले के लिए इतना पैसा खर्चा क्यों करना”
ये हममें से बहुतों के साथ होता है.अपने प्रिय व्यक्ति के लिए खर्चा करने से पहले हम कभी नहीं सोचते. बच्चों के लिए खर्च करना हो, तब माता-पिता अपनी हैसियत से ज़्यादा खर्च करने में भी नहीं सोचते. उनके लिए महंगे से महंगे कपड़े लेंगे, पर मां अपने लिए कभी उतनी महंगी साड़ी या पापा उतना महंगा शर्ट नहीं खरीदेंगे, या खरीदने से पहले दस बार सोचेंगे.
लाली फैसला करती है कि वो घर को मेन्टेन करेगी, लुत्फी के लिए नहीं, अपने लिए छज्जा बनवाएगी. इसके लिए डबल मेहनत करती है. रात को सड़क किनारे काहवा बेचना शुरू करती है. लोग काहवा पीते ही कह उठते हैं- “क्या बात है”
सोचिए, जिसे कोई ये कहकर रिजेक्ट करे कि मज़ा नहीं आ रहा, दुनिया उसके बनाए काहवा पर क्या बात है कह उठे तो क्या कॉन्फिडेंस और खुशी मिली होगी. लाली ने अपने काहवा का नाम रखा रात रानी स्पेशल. लोगों ने पसंद किया और धंधा चल पड़ा. काहवा पिलाते हुए लाली कहती है,
“लोग बोलते हैं रातरानी की फूलों की महक से सांप निकल आते हैं. उसकी महक दबाने के लिए लोग उसके बाजू में एक और पेड़ लगा देते हैं. दिन का राजा. अब दिन का राजालगाओ, या बैंड का बाजा बजाओ, उससे रातरानी की खुशबू तो कम नहीं होगी न..”
लाली ने वो सारी चीज़ें की, जिससे उसे खुशी मिलती, जिसके लिए उसे रोका गया, मना किया गया. दिल टूटने के बाद उसके पास दो ऑप्शन थे. रोते, बिलखते, रिग्रेट करते ज़िन्दगी काटना. दूसरा, उससे जूझकर निकलना. खुद से प्यार करना. और अपने हिसाब से ज़िंदगी जीना. उसने दूसरा वाला रास्ता चुना. छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी का ठिकाना खोजा और हर उस चीज़ को एन्जॉय करने लगी जो उसे बोझिल लगती थीं.
सेल्फ लव. ये एक ऐसी चीज़ है जिसका मतलब हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकता है. किसी के लिए अपनी बिज़ी शिड्यूल से समय निकालकर गर्म पानी में पांव डालना सेल्फ लव हो सकता है. किसी के लिए पति-बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच से थोड़ा समय निकालकर या छिपकर अपनी पसंदीदा आइसक्रीम खाना सेल्फ लव हो सकता है. किसी के लिए सेल्फ लव कुछ न करना, दिनभर सोते रहना हो सकता है. कोई भी ऐसी चीज़ जो आपको खुशी दी, आपको थोड़ा सुकून दे वो सेल्फ लव का एक पार्ट होता है. इंटरनेट की परिभाषा पर जाऊं तो कुछ ऐसा करना जो आपकी वेलबींग और खुशी के लिए ज़रूरी है, सेल्फ लव केवल ऐक्शन नहीं होता, सोच भी होती है. खुद के लिए अच्छा सोचना, खुद को लेकर पॉसिटिव सोचना. सेल्फ डाउट से बाहर निकलना.
कई बार जब हमारा कोई काम बिगड़ रहा होता है तो उसका सॉल्यूशन खोजने की जगह, उसे और बेहतर तरीके से करने की जगह हम खुद में कमियां खोजने लगते हैं. हम खुद को कमतर आंकने लगते हैं, जबकि हमारा फेलियर सिचुएशनल भी हो सकता है, हमारे लाइफ में आई परेशानियों की वजह पूरी तरह बाहरी भी हो सकती हैं.
सेल्फ लव का रास्ता बहुत सारी लड़कियां नहीं चुन पातीं. वो या तो खुद को कैद कर लेती है या दुनिया की बनाई बंदिशों में पड़ जाती हैं. गीत की तरह ही लाली लड़कियों को खुद से प्यार करना सिखाती है, खुद के लिए जीना सिखाती है. लाली बताती है कि अपने लिए रुपये खर्च करने में बुराई नहीं है, वो बताती है कि खुद को चुनना असल में अच्छा है.
जब भी हम प्यार, मोहब्बत, इश्क, प्रेम जैसे शब्द सुनते हैं तो इसमें खुद के लिए प्यार वाला रिश्ता कभी नहीं इमैजिन करते. जबकि वो सबसे ज्यादा ज़रूरी है, जब हम खुद से प्रेम करेंगे तो ही किसी और से उतना प्रेम कर पाएंगे जितना हम चाहते हैं.
वीडियो म्याऊं: टूटे दिल का पक्का इलाज, 'मॉडर्न लव' ने ये कला लड़कियों दी

