राजा की आलोचना की तो 60 साल की महिला को 43 साल के लिए जेल भेज दिया गया
थाईलैंड में विरोध की हर आवाज़ को दबाने के लिए इस्तेमाल होता है ये काला कानून.
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अंचन का मामला 2014 का है. उन्होंने तब सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो क्लिप शेयर की थीं, जिनका कंटेट राजशाही की आलोचना से भरा था.
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"राजशाही इतिहास की किताबों का हिस्सा है, वर्तमान समय लोकतंत्र का है."
यह कथन मैंने अपने कॉलेज के दिनों में आधुनिक इतिहास की एक किताब में पढ़ा था. इसका मलतब यह है कि वर्तमान यानी हमारा आज का समय लोकतांत्रिक होना चाहिए, जिसमें जनता के पास अपनी दशा और दिशा तय करनी की ताकत हो. ना कि कोई 'पवित्र' राजा या उसका कोई उत्तराधिकारी यह तय करे.
कहने को तो इक्कीसवीं सदी के दो दशक पूरे हो चुके हैं, लेकिन राजशाही अभी भी कई देशों में कायम है. उनमें से एक देश थाईलैंड भी है. यहां की राजशाही को बचाने के लिए कई कानून भी बनाए गए हैं. इनमें से सबसे कुख्यात कानून है- लेसे मेजेस्टे. इसे धारा 112 भी कहा जाता है.
फिलहाल खबर यह है कि इस कानून के तहत थाईलैंड में एक महिला को 43 साल 6 महीने की सजा दी गई है. महिला की उम्र 55 से 60 वर्ष के बीच बताई जा रही है. उसका नाम अंचन है. अंचन पर 29 बार राजशाही को बदनाम करने का आरोप सिद्ध हुआ है. बताया जा रहा है कि थाईलैंड में इस कानून के तहत यह अब तक की रिकॉर्ड सजा है. यह सजा ऐसे समय में हुई है, जब थाईलैंड में पिछले साल जुलाई से ही राजशाही और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि यह सजा प्रदर्शनकारियों को एक कड़ा संदेश देने के लिए दी गई है. क्या है अंचन का पूरा मामला? अंचन का मामला 2014 का है. उसी साल थाईलैंड में तख्ता पलट हुआ था और प्रत्युत चान-ओचा देश के नए प्रधानमंत्री बने थे. उनकी सरकार सैन्य तानाशाही के कलेवर की थी. हालांकि, उन्होंने देश की जनता से लोकतांत्रिक सुधारों का वादा किया था.
अंचन उस समय देश की सिविल सेवा में काम कर रही थीं. उन्होंने फेसबुक और यूट्यूब पर कुछ ऑडियो क्लिप शेयर की थीं. इनमें राजशाही के खिलाफ आलोचना से भरी बाते थीं. इसी के आधार पर अंचन को गिरफ्तार कर लिया गया. वे जनवरी 2015 से नवंबर 2018 तक जेल में रहीं.
सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को दोषी मान लिया. इसकी वजह से उनकी सजा आधी कर दी गई. शुरू में उन्हें 87 साल कैद की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, अंचन का यह भी कहना है कि वो क्लिप उन्होंने अनजाने में शेयर की थीं.
वे कहती हैं-
"मैंने तो सिर्फ क्लिप शेयर की थीं. मुझे लगा कि यह कुछ भी नहीं है. बहुत से लोगों ने इन क्लिप को शेयर किया था. मैंने तो उनके ऊपर कोई कमेंट भी नहीं किया. ये क्लिप तो एक आदमी ने बनाई थीं. वो यह काम बहुत पहले से कर रहा है."
अंचन यह भी कहती हैं कि क्लिप शेयर करते समय उन्होंने इतना नहीं सोचा था. ना ही उन्हें यह एहसास था कि क्लिप का कंटेट सही नहीं है. अंचन ने कहा कि वे 40 साल तक सिविल सेवा में रहीं और रिटायरमेंट के एक साल पहले उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. अगर सजा होती है, तो उन्हें रिटायरमेंट पेंशन भी नहीं मिलेगी.
मानवाधिकार संगठन ह्यूमैन राइट्स वॉच के रिसर्चर सुनई फासुक ने न्यूज एजेंसी एपी को बताया, "अंचन के खिलाफ दिया गया कोर्ट का फैसला स्तब्ध करने वाला है. यह संदेश दिया जा रहा है कि राजशाही की जरा सी भी आलोचना बर्दाश्त नहीं की जाएगी. और जो ऐसा करेगा उसे कड़ी से कड़ी से सजा मिलेगी." क्या है Lese Majeste कानून की कहानी? थाईलैंड का यह कानून 1900 से ही अस्तित्व में है. तब देश में पूरी तरह से राजशाही थी. बाद में राजशाही के खिलाफ विरोध हुआ, तो 1932 में देश में संवैधानिक राजशाही लागू कर दी गई. मतलब देश को चलाने का काम पूरी तरह से संसद करेगी और राजा केवल सांकेतिक मुखिया होंगे. हालांकि, राजशाही को बचाने वाला यह कानून जस का तस बना रहा. आज भी यह वैसा का ही वैसा है. हां, बीच में थोड़े बहुत बदलाव हुए हैं, लेकिन इतने नहीं कि इसे लोकतंत्र के पैमाने पर खरा मान लिया जाए. पिछले साल शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में एक मांग यह भी है कि इस कानून को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए.
यह कानून कहता है कि थाईलैंड के राजा और राजपरिवार से जुड़े हुए लोगों की आलोचना और अपमान करने पर 15 साल की सजा होगी. जितनी बार अपमान किया जाएगा, हर बार उतनी ही सजा जुड़ जाएगी. मसलन अगर किसी व्यक्ति ने दो बार राजशाही की आलोचना की तो उसे तीस साल की सजा होगी. इस कानून में विशेष यह है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी के भी खिलाफ इस कानून के तहत मामला दर्ज करा सकता है.

राजपरिवार के एक कार्यक्रम के दौरान थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न.
हालांकि, समय-समय पर थाईलैंड के राजा वहां की सरकार से इस कानून का प्रयोग ना करने की बात कहते रहे हैं. इस बार भी जब प्रदर्शन हो रहे थे, तो देश के वर्तमान राजा महा वजिरालोंगकोर्न ने प्रधानमंत्री प्रत्युत चान-ओचा से इस कानून का प्रयोग ना करने के लिए कहा था. महा वजिरालोंगकोर्न के पिता भी यही बात कहते थे. लेकिन महा वजिरालोंगकोर्न ने दूसरी तरफ देश के संविधान में कुछ संशोधन भी कराए हैं. जिसमें सबसे प्रमुख यह है कि राजा के खिलाफ कोई आरोप ही नहीं लगाया जा सकता. असहमति दबाने के लिए हो रहा है कानून का प्रयोग साल 2014 से पहले थाईलैंड में 'लेसे मेजेस्टे' का इतना प्रयोग नहीं होता था. 2014 के सैन्य तख्तापलट के बाद से देश में 100 से अधिक लोगों के खिलाफ इस कानून के तहत मुकदमा चल चुका है और 44 लोगों को दोषी पाया गया है. 2014 के बाद से ही देश में सरकार और राजशाही के खिलाफ प्रदर्शन भी तेज हुए हैं. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और राजशाही इस कानून का प्रयोग अपने खिलाफ विरोध की आवाजों को दबाने के लिए कर रहे हैं.
दरअसल, थाईलैंड में राजशाही और सैन्य सरकार के पास ना केवल अकूत संपत्ति है, बल्कि पावर भी है. वहीं आम लोगों के आर्थिक हालात अच्छे नहीं है. कोरोना वायरस महामारी के कारण उनके आर्थिक हालात बदतर हो गए. जिसके बाद पिछले साल लोग सड़कों पर आ गए और सरकार और राजशाही में बदलाव की मांग करने लगे.
थाईलैंड में सैन्य सरकार और राजशाही मिलकर काम करते हैं. इन्होंने देश के तमाम बिजनेस और संसाधनों पर कब्जा कर रखा है. कमाई लाखों करोड़ों में हैं. जनता के टैक्स का पैसा भी पूरी तरह से अपने ही ऊपर खर्च कर लिया जाता है. इन सबका हिसाब लेने का अधिकार किसी के पास भी नहीं है.
जो कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक समूह सैन्य सरकार और राजशाही की जवाबदेही तय करने की कोशिश करता है, उसके खिलाफ यह कानून लगा दिया जाता है. बीते साल शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में भी यही ट्रेंड देखने को मिला. थाईलैंड की एक वॉचडॉग संस्था 'आई लॉ' के अनुसार पिछले साल नबंवर के बाद से अब तक 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें भी प्रमुख नेताओं को ही टारगेट किया गया, जिसकी वजह से विरोध प्रदर्शन ढीले पड़ गए हैं.
हालांकि, ह्यूमन राइट्स वॉच के सुनई फासुक का कहना है कि अब लोग इन सब गिरफ्तारियों से डरने वाले नहीं है. वे परिवर्तन का मन बना चुके हैं. आने वाले दिनों में और बड़े प्रदर्शनों की तैयारी की जा रही है. अंचन को जो सजा सुनाई गई है, वो आग में घी डालने की ही काम करेगी. इससे देश की राजनैतिक हालत और अस्थिर होगी.

थाईलैंड में पिछले साल राजशाही और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरु हुए थे. प्रदर्शनकारी धारी 112 को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं.
अंचन से पहले इस कानून के तहत सजा मिलने के जिस मामले की सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी, वह दो आदमियों से जुड़ा था. 2018 में इन दो आदमियों को राजा की फोटो जलाने के जुर्म में 20-20 साल की सजा हुई थी.
थाईलैंड की राजशाही की आलोचना करने वालों की हत्या की रिपोर्ट्स भी आई हैं. पिछले साल वियतनाम में गिरफ्तारी के बाद थाईलैंड के तीन राजनीतिक कार्यकर्ता गायब हो गए. राजशाही की आलोचना करने के कारण उन्हें देश से निकाल दिया गया था. आज तक उन तीन कार्यकर्ताओं का पता नहीं चला.
इसी तरह लाओस में भी जनवरी 2019 में थाईलैंड के दो राजनीतिक कार्यकर्ताओं की लाश मिली थी. उन्हें सीमेंट से नहला दिया गया था. इन दोनों कार्यकर्ताओं को भी सैन्य सरकार और राजशाही की आलोचना करने की वजह से देश से निकाल दिया गया था.
वीडियो- रेवेंसब्रुख कैंप, वो नाजी यातनाग्रह जहां साधारण जर्मन औरतें पिशाच बन गईं
यह कथन मैंने अपने कॉलेज के दिनों में आधुनिक इतिहास की एक किताब में पढ़ा था. इसका मलतब यह है कि वर्तमान यानी हमारा आज का समय लोकतांत्रिक होना चाहिए, जिसमें जनता के पास अपनी दशा और दिशा तय करनी की ताकत हो. ना कि कोई 'पवित्र' राजा या उसका कोई उत्तराधिकारी यह तय करे.
कहने को तो इक्कीसवीं सदी के दो दशक पूरे हो चुके हैं, लेकिन राजशाही अभी भी कई देशों में कायम है. उनमें से एक देश थाईलैंड भी है. यहां की राजशाही को बचाने के लिए कई कानून भी बनाए गए हैं. इनमें से सबसे कुख्यात कानून है- लेसे मेजेस्टे. इसे धारा 112 भी कहा जाता है.
फिलहाल खबर यह है कि इस कानून के तहत थाईलैंड में एक महिला को 43 साल 6 महीने की सजा दी गई है. महिला की उम्र 55 से 60 वर्ष के बीच बताई जा रही है. उसका नाम अंचन है. अंचन पर 29 बार राजशाही को बदनाम करने का आरोप सिद्ध हुआ है. बताया जा रहा है कि थाईलैंड में इस कानून के तहत यह अब तक की रिकॉर्ड सजा है. यह सजा ऐसे समय में हुई है, जब थाईलैंड में पिछले साल जुलाई से ही राजशाही और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि यह सजा प्रदर्शनकारियों को एक कड़ा संदेश देने के लिए दी गई है. क्या है अंचन का पूरा मामला? अंचन का मामला 2014 का है. उसी साल थाईलैंड में तख्ता पलट हुआ था और प्रत्युत चान-ओचा देश के नए प्रधानमंत्री बने थे. उनकी सरकार सैन्य तानाशाही के कलेवर की थी. हालांकि, उन्होंने देश की जनता से लोकतांत्रिक सुधारों का वादा किया था.
अंचन उस समय देश की सिविल सेवा में काम कर रही थीं. उन्होंने फेसबुक और यूट्यूब पर कुछ ऑडियो क्लिप शेयर की थीं. इनमें राजशाही के खिलाफ आलोचना से भरी बाते थीं. इसी के आधार पर अंचन को गिरफ्तार कर लिया गया. वे जनवरी 2015 से नवंबर 2018 तक जेल में रहीं.
सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को दोषी मान लिया. इसकी वजह से उनकी सजा आधी कर दी गई. शुरू में उन्हें 87 साल कैद की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, अंचन का यह भी कहना है कि वो क्लिप उन्होंने अनजाने में शेयर की थीं.
वे कहती हैं-
"मैंने तो सिर्फ क्लिप शेयर की थीं. मुझे लगा कि यह कुछ भी नहीं है. बहुत से लोगों ने इन क्लिप को शेयर किया था. मैंने तो उनके ऊपर कोई कमेंट भी नहीं किया. ये क्लिप तो एक आदमी ने बनाई थीं. वो यह काम बहुत पहले से कर रहा है."
अंचन यह भी कहती हैं कि क्लिप शेयर करते समय उन्होंने इतना नहीं सोचा था. ना ही उन्हें यह एहसास था कि क्लिप का कंटेट सही नहीं है. अंचन ने कहा कि वे 40 साल तक सिविल सेवा में रहीं और रिटायरमेंट के एक साल पहले उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. अगर सजा होती है, तो उन्हें रिटायरमेंट पेंशन भी नहीं मिलेगी.
मानवाधिकार संगठन ह्यूमैन राइट्स वॉच के रिसर्चर सुनई फासुक ने न्यूज एजेंसी एपी को बताया, "अंचन के खिलाफ दिया गया कोर्ट का फैसला स्तब्ध करने वाला है. यह संदेश दिया जा रहा है कि राजशाही की जरा सी भी आलोचना बर्दाश्त नहीं की जाएगी. और जो ऐसा करेगा उसे कड़ी से कड़ी से सजा मिलेगी." क्या है Lese Majeste कानून की कहानी? थाईलैंड का यह कानून 1900 से ही अस्तित्व में है. तब देश में पूरी तरह से राजशाही थी. बाद में राजशाही के खिलाफ विरोध हुआ, तो 1932 में देश में संवैधानिक राजशाही लागू कर दी गई. मतलब देश को चलाने का काम पूरी तरह से संसद करेगी और राजा केवल सांकेतिक मुखिया होंगे. हालांकि, राजशाही को बचाने वाला यह कानून जस का तस बना रहा. आज भी यह वैसा का ही वैसा है. हां, बीच में थोड़े बहुत बदलाव हुए हैं, लेकिन इतने नहीं कि इसे लोकतंत्र के पैमाने पर खरा मान लिया जाए. पिछले साल शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में एक मांग यह भी है कि इस कानून को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए.
यह कानून कहता है कि थाईलैंड के राजा और राजपरिवार से जुड़े हुए लोगों की आलोचना और अपमान करने पर 15 साल की सजा होगी. जितनी बार अपमान किया जाएगा, हर बार उतनी ही सजा जुड़ जाएगी. मसलन अगर किसी व्यक्ति ने दो बार राजशाही की आलोचना की तो उसे तीस साल की सजा होगी. इस कानून में विशेष यह है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी के भी खिलाफ इस कानून के तहत मामला दर्ज करा सकता है.

राजपरिवार के एक कार्यक्रम के दौरान थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न.
हालांकि, समय-समय पर थाईलैंड के राजा वहां की सरकार से इस कानून का प्रयोग ना करने की बात कहते रहे हैं. इस बार भी जब प्रदर्शन हो रहे थे, तो देश के वर्तमान राजा महा वजिरालोंगकोर्न ने प्रधानमंत्री प्रत्युत चान-ओचा से इस कानून का प्रयोग ना करने के लिए कहा था. महा वजिरालोंगकोर्न के पिता भी यही बात कहते थे. लेकिन महा वजिरालोंगकोर्न ने दूसरी तरफ देश के संविधान में कुछ संशोधन भी कराए हैं. जिसमें सबसे प्रमुख यह है कि राजा के खिलाफ कोई आरोप ही नहीं लगाया जा सकता. असहमति दबाने के लिए हो रहा है कानून का प्रयोग साल 2014 से पहले थाईलैंड में 'लेसे मेजेस्टे' का इतना प्रयोग नहीं होता था. 2014 के सैन्य तख्तापलट के बाद से देश में 100 से अधिक लोगों के खिलाफ इस कानून के तहत मुकदमा चल चुका है और 44 लोगों को दोषी पाया गया है. 2014 के बाद से ही देश में सरकार और राजशाही के खिलाफ प्रदर्शन भी तेज हुए हैं. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और राजशाही इस कानून का प्रयोग अपने खिलाफ विरोध की आवाजों को दबाने के लिए कर रहे हैं.
दरअसल, थाईलैंड में राजशाही और सैन्य सरकार के पास ना केवल अकूत संपत्ति है, बल्कि पावर भी है. वहीं आम लोगों के आर्थिक हालात अच्छे नहीं है. कोरोना वायरस महामारी के कारण उनके आर्थिक हालात बदतर हो गए. जिसके बाद पिछले साल लोग सड़कों पर आ गए और सरकार और राजशाही में बदलाव की मांग करने लगे.
थाईलैंड में सैन्य सरकार और राजशाही मिलकर काम करते हैं. इन्होंने देश के तमाम बिजनेस और संसाधनों पर कब्जा कर रखा है. कमाई लाखों करोड़ों में हैं. जनता के टैक्स का पैसा भी पूरी तरह से अपने ही ऊपर खर्च कर लिया जाता है. इन सबका हिसाब लेने का अधिकार किसी के पास भी नहीं है.
जो कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक समूह सैन्य सरकार और राजशाही की जवाबदेही तय करने की कोशिश करता है, उसके खिलाफ यह कानून लगा दिया जाता है. बीते साल शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में भी यही ट्रेंड देखने को मिला. थाईलैंड की एक वॉचडॉग संस्था 'आई लॉ' के अनुसार पिछले साल नबंवर के बाद से अब तक 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें भी प्रमुख नेताओं को ही टारगेट किया गया, जिसकी वजह से विरोध प्रदर्शन ढीले पड़ गए हैं.
हालांकि, ह्यूमन राइट्स वॉच के सुनई फासुक का कहना है कि अब लोग इन सब गिरफ्तारियों से डरने वाले नहीं है. वे परिवर्तन का मन बना चुके हैं. आने वाले दिनों में और बड़े प्रदर्शनों की तैयारी की जा रही है. अंचन को जो सजा सुनाई गई है, वो आग में घी डालने की ही काम करेगी. इससे देश की राजनैतिक हालत और अस्थिर होगी.

थाईलैंड में पिछले साल राजशाही और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरु हुए थे. प्रदर्शनकारी धारी 112 को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं.
अंचन से पहले इस कानून के तहत सजा मिलने के जिस मामले की सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी, वह दो आदमियों से जुड़ा था. 2018 में इन दो आदमियों को राजा की फोटो जलाने के जुर्म में 20-20 साल की सजा हुई थी.
थाईलैंड की राजशाही की आलोचना करने वालों की हत्या की रिपोर्ट्स भी आई हैं. पिछले साल वियतनाम में गिरफ्तारी के बाद थाईलैंड के तीन राजनीतिक कार्यकर्ता गायब हो गए. राजशाही की आलोचना करने के कारण उन्हें देश से निकाल दिया गया था. आज तक उन तीन कार्यकर्ताओं का पता नहीं चला.
इसी तरह लाओस में भी जनवरी 2019 में थाईलैंड के दो राजनीतिक कार्यकर्ताओं की लाश मिली थी. उन्हें सीमेंट से नहला दिया गया था. इन दोनों कार्यकर्ताओं को भी सैन्य सरकार और राजशाही की आलोचना करने की वजह से देश से निकाल दिया गया था.
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