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अब बिना टांके और पट्टी करवाएं मोतियाबिंद का इलाज

मोतियाबिंद के नए इलाज के बारे में सबकुछ जानिए

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लेज़र की मदद से बिलकुल परफेक्ट रिजल्ट आ पाता है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लेज़र की मदद से बिलकुल परफेक्ट रिजल्ट आ पाता है
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सरवत
12 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 13 सितंबर 2022, 02:34 PM IST)
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(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

कोमल दिल्ली की रहने वाली हैं. अपने पिताजी की तबियत को लेकर काफ़ी चिंतित चल रही हैं. ऐसे में उन्होंने हमसे मदद मांगी है. कोमल के पिताजी की उम्र 55 साल है. डायबिटिक हैं. पिछले कुछ समय से उन्हें धुंधला दिखना शुरू हुआ है. रोशनी पड़ने पर आंखें चौंधिया जाती हैं. चीज़ें डबल दिखने लगी हैं. चश्मे का नंबर बदलवाने पर भी कोई फ़ायदा नहीं है. जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला उन्हें मोतियाबिंद हो गया है. यानी कैटरेक्ट. डॉक्टर्स ने पिताजी की सर्जरी करवाने को कहा है. साथ ही उन्हें एक ऐसी टेक्नीक के बारे में बताया है जिससे बड़ी आसानी से मोतियाबिंद का इलाज हो जाता है. इसका नाम है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्लेडलेस लेज़र कैटरेक्ट सर्जरी. इसमें रिकवरी भी बड़ी जल्दी होती है. पर क्योंकि ये एक नई टेक्नीक है, इसलिए कोमल के मन में कई सवाल हैं. वो इस सर्जरी के बारे में जानकारी चाहती हैं. साथ ही ये भी जानना चाहती हैं कि क्या ये सेफ़ है?

हमारे देश में मोतियाबिंद एक बहुत ही आम समस्या है. यहां तक कि National Blindness and Visual Impairment Survey के मुताबिक, हमारे देश में आंखों की रोशनी जाने का सबसे बड़ा कारण मोतियाबिंद है. ख़ासतौर पर 50 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में. यही नहीं. इंडिया में चौहत्तर प्रतिशत लोगों को मोतियाबिंद होता है, जिनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है.

ऐसे में ज़रूरी है कि मोतियाबिंद से जुड़े नए इलाजों के बारे में लोगों को सही जानकारी हो. तो सबसे पहले ये जान लेते हैं कि मोतियाबिंद होता क्या है.

मोतियाबिंद क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर राहिल चौधरी ने.

Is Dr. Rahil Chaudhary a good eye doctor? - Quora
डॉक्टर राहिल चौधरी, डायरेक्टर, आई7 आई हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली

-मोतियाबिंद को हम कैटरेक्ट भी कहते हैं

-ये आंखों के अंदर मौजूद लेंस की एक बीमारी है

-आंखों के अंदर मौजूद लेंस शीशे की तरह साफ़ होता है

-लेकिन जैसे बढ़ती उम्र के साथ बाल सफ़ेद हो जाते हैं

-ठीक वैसे ही बढ़ती उम्र के साथ आंखों के अंदर मौजूद ये लेंस भी सफ़ेद हो जाता है

-इसी को मोतियाबिंद या कैटरेक्ट कहते हैं

-अब एक बार ये लेंस सफ़ेद हो गया तो आंख के अंदर जो लाइट आ रही है वो कुछ हद तक रुक जाती है

-पूरे पर्दे तक नहीं पहुंच पाती

-इसलिए मरीज़ को धुंधला दिखता है

-मरीज़ के चश्मे का नंबर बार-बार बदलता रहता है

-सामने से आने वाली लाइट आंखों को चौंधिया देती है

-लाइट फैली हुई दिखती है

-कभी-कभार मरीज़ को डबल दिखना शुरू हो जाता है

-परछाई दिखना शुरू हो जाती है

-सतरंगा सा दिखना शुरू हो जाता है

-अगर इस तरह की कोई भी प्रॉब्लम आंखों में आ रही है और आपकी उम्र 50-60 साल से ऊपर है तो हो सकता है आपको मोतियाबिंद हो

मोतियाबिंद का इलाज

-मोतियाबिंद का इलाज सिर्फ़ एक ही है

-एक ऑपरेशन जिससे इस सफ़ेद लेंस को निकाल दिया जाता है

-इसकी जगह एक नया साफ़-सुथरा लेंस लगाया जाता है

-कोई भी योगा, ड्रॉप, गोलियां, जड़ी-बूटी, मसाज, आयुर्वेद, होम्योपैथी इस मोतियाबिंद का इलाज नहीं कर सकती

-इलाज सिर्फ़ एक ही है

-ऑपरेशन से लेंस की सफ़ेदी को निकाला जाए और उसकी जगह एक नया, साफ़-सुथरा लेंस लगाया जाए

-इसको करने के दो तरीके होते हैं

What Are Cataracts? - American Academy of Ophthalmology
बढ़ती उम्र के साथ आंखों के अंदर मौजूद ये लेंस भी सफ़ेद हो जाता है

-पहला ऑपरेशन है जो अब पुराना हो गया है

-जिसको कहते हैं फ़ेको इमल्सिफिकेशन

-अब जो लेटेस्ट ऑपरेशन आया है, उसको कहते हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्लेडलेस लेज़र कैटरेक्ट सर्जरी

कैटरेक्ट के पुराने ऑपरेशन और नई टेक्नोलॉजी में क्या फ़र्क है?

-जो पुराने ऑपरेशन हैं जैसे फ़ेको और फ़ेको इमल्सिफिकेशन

-इसमें मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद नज़र की जो क्वालिटी आएगी

-ये इसपर निर्भर करता है कि डॉक्टर का एक्सपीरियंस कितना है और सर्जरी में कितनी महारत हासिल है

-इसकी क्वालिटी निर्भर करती है कि डॉक्टर ने कितनी अच्छी तरह से ऑपरेशन किया है

-लेकिन एक इंसान का हाथ 100 प्रतिशत सही नहीं हो सकता

-इस खामी को दूर करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्लेडलेस लेज़र सर्जरी को लॉन्च किया गया

-जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लेज़र की मदद से बिलकुल परफेक्ट रिजल्ट आ पाता है

-ऑपरेशन में किसी भी तरह का ब्लेड या चीरा नहीं लगता

-ये काफ़ी सेफ़ ऑपरेशन है

-कॉम्प्लिकेश रेट लगभग ज़ीरो है

-क्वालिटी एकदम परफेक्ट आती है

-रिकवरी काफ़ी फ़ास्ट है

-आज ऑपरेशन हुआ तो कल से दिखना शुरू हो जाता है

-3-4 दिन का परहेज़ करना होता है

-उसके बाद अपने सारे काम शुरू कर सकते हैं

-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑपरेशन की ख़ासियत ये है कि पूरे ऑपरेशन में कोई दर्द नहीं होता

-कोई इंजेक्शन नहीं लगता

Nuclear Cataracts: Symptoms, Causes, and Treatment
ऑपरेशन से लेंस की सफ़ेदी को निकाला जाए और उसकी जगह एक नया, साफ़-सुथरा लेंस लगाया जाए

-कोई टांका नहीं लगता

-कोई ब्लेड नहीं लगता

-कोई पट्टी नहीं लगती

-अस्पताल में भर्ती नहीं होती

-पूरा ऑपरेशन आंखों में ड्रॉप्स डालकर किया जाता है

सर्जरी में किस तरह के लेंस इस्तेमाल किए जाते हैं?

-मोतियाबिंद के ऑपरेशन में जब सफ़ेद लेंस को निकाला जाता है तब इसकी जगह एक साफ़-सुथरा, क्लियर आर्टिफिशियल लेंस लगाया जाता है

-इस आर्टिफिशियल लेंस के 3 तरह के डिज़ाइन होते हैं

-पहला डिज़ाइन है मोनोफ़ोकल

-दूसरा डिज़ाइन है ईडोफ़ लेंस

-तीसरा डिज़ाइन है मल्टीफ़ोकल

-इन तीनों डिज़ाइन में ईडोफ़ वाला लेंस सबसे ज़्यादा कारगर माना जाता है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्लेडलेस लेज़र सर्जरी. ये कितनी कमाल की है, ये आपको पता चल ही गया होगा. इसमें न चीरा लगता है, न पट्टी. अब बात आती है इसकी कीमत की. इसमें एक आंख की सर्जरी की कीमत है एक लाख रुपए. दोनों आंखों के लिए लगभग दो लाख.

वीडियो देखें :

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