मोदी को युगपुरुष बताने वाली BJP सांसद, जो किसान आंदोलन पर बेतुकी बात कह रही हैं
15 साल के गैप के बाद सांसद बनने वाली जसकौर मीणा कैसे आईं राजनीति में?

राजस्थान का दौसा ज़िला. यहां से सांसद हैं जसकौर मीणा. BJP से हैं. अक्सर खबरों में रहती हैं. नहीं, अपने काम की वजह से नहीं, बल्कि अपने बयानों की वजह से. फिलहाल इनका एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें जसकौर किसान आंदोलन पर बेतुके सवाल करते दिख रही हैं. वो कह रही हैं,
"मोदी जी को लेकर कमेंट्स करने वाले अभी सोच नहीं पा रहे कि मोदी युगपुरुष हैं. मोदी वाकई में इस देश को फिर से जगत गुरु बनाने की ओर ले जा रहे हैं. अभी कृषि कानून का ही देख लीजिए, आतंकवादी बैठे हुए हैं. आतंकवादियों ने AK-47 लिखी हुई है. खालिस्तान का झंडा लगाया हुआ है. इस देश की कितनी रुकावटें हैं, जिन रुकावटों को ध्यान में रखते हुए, दूर करते हुए, मोदी ग्राम विकास के लिए, जन-जन के विकास के लिए, सबका विकास-सबका साथ और सबका विश्वास लेने के लिए आगे बढ़ रहे हैं."
"Terrorists are sitting with AK-47 in the farmers agitation, They have the flag of Khalistan": Rajasthan BJP MP Jaskaur Meena#JaskaurMeena
— The Newsters (@TNewsters) January 20, 2021
#FarmersProtest
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अब इसी बयान की वजह से खड़ा हो गया है नया विवाद. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने BJP सांसद के बयान का वीडियो पोस्ट करते ट्वीट किया,
"ये दौसा से BJP सांसद जसकौर मीणा हैं, किसानों के प्रति इनकी घृणित सोच और अमर्यादित भाषा सुनिए. सत्ता के अहंकार में इतने अंधे हो गए हैं कि इन्हें देश का अन्नदाता आतंकी दिखता है. विरोध करने वालों को आतंकवादी और खालिस्तानी बताने का संस्कार तो इन्हें संघ से ही मिला होगा."
ये दौसा से BJP सांसद जसकौर मीणा हैं, किसानों के प्रति इनकी घृणित सोच और अमर्यादित भाषा सुनिए
सत्ता के अहंकार में इतने अंधे हो गये कि इन्हें देश का अन्नदाता आतंकी दिखता है। विरोध करने वालों को आतंकवादी और खालिस्तानी बताने का संस्कार तो इन्हें संघ से ही मिला होगा#FarmersProtest
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— Rajasthan PCC (@INCRajasthan) January 20, 2021
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के शिक्षा मंत्री और कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा,
"राजस्थान की जनता जसकौर मीणा जी जैसे लोगों को इलेक्ट करने की वजह से शर्मिंदा महसूस कर रही है. सांसद होकर वो ऐसी घृणित मानसिकता रखती हैं."
BJP ने क्या सफाई पेश की?
वीडियो वायरल होने के बाद जसकौर पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने धरने पर बैठे किसानों को आतंकवादी कहा है. इस पर BJP विधायक और प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा,
"जसकौर जी का मकसद किसानों को आतंकवादी कहना नहीं था. उनका मतलब ये था कि कुछ लग जो खालिस्तान की मांग कर रहे हैं, खालिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हैं और खालिस्तान के झंडे लहरा रहे हैं, वो किसानों के आंदोलन में घुसपैठ कर चुके हैं. अगर कांग्रेस वाकई किसानों का भला सोचती है, तो वो राजस्थान के उन सात लाख किसानों को राहत दे देती जो कर्ज़दार हैं और जिन्हें आगे कर्ज़ नहीं मिल रहा है. हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई सब्सिडी फिर से शुरू कर सकती थी."
इस बारे में जसकौर मीणा का पक्ष जानने के लिए हमने उनसे संपर्क करने की कोशिश की. कई बार फोन किया, हर बार उनके असिस्टेंट ने फोन उठाया और सांसद महोदया की व्यस्तता का हवाला देकर बात करवाने से इनकार कर दिया. काफी कोशिशों के बाद चार बजे का वक्त दिया गया, लेकिन तब तक उनका फोन बंद हो चुका था.
जसकौर के पुराने अजब-गजब बयान
- जुलाई 2020. जसकौर ने कहा था,
"हम तो आध्यात्मिक शक्ति के पुजारी हैं. आध्यात्मिक शक्ति के हिसाब से चलते हैं. निश्चित भगवान राम का मंदिर बनते ही कोरोना देश से भागेगा."
- अक्टूबर 2020 में जसकौर एक सरपंच समारोह में बोल रही थीं. इस दौरान गांववालों से कहा कि वो अपने बच्चों को रेलवे का गैंगमेन न बनाएं. कहा,
"लड़कों को गैंगमेन बनाकर मद्रास मत भेजो, वो गैंगमेन बीमारी लेकर घर आएगा और लुगाई (पत्नी) उसे छोड़कर चली जाएगी. ये पक्की बात बता रही है."
इस बयान के बाद गैंगमेन वर्ग के लोगों ने सांसद का विरोध किया. काफी बवाल होने के बाद BJP सांसद ने अपना बयान वापस लिया था.
- अक्टूबर 2020 में ही जसकौर मीणा अपने एक विरोधी नेता के खिलाफ बोल रही थीं. तब उन्होंने 'लंगूर' शब्द का इस्तेमाल किया था. कहा था,
"मीणा समाज को कुछ लोगों ने बदनाम कर रखा है. मेरे खिलाफ ज़बरदस्त मीटिंग करा दी गई थी. और एक ही है वो लंगूर, जो मीटिंग कराता है."
हालांकि जसकौर मीणा ने किसी नेता का नाम नहीं लिया था. लेकिन इस बयान का भी जमकर विरोध हुआ था.
- दिसंबर 2020 में भी किसान आंदोलन को लेकर एक बयान दिया था. NBT की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था,
"जिस तरह से वोट की राजनीति की जा रही है, जो भ्रम फैलाया जा रहा है, जिस तरह से भारत सरकार की किसानों के हित की योजनाओं और बिलों के विरोध के रूप में सड़कों पर बैठे हैं, अफसोस है कि मुझे लगता है कि या तो वो आतंकवादियों से, या खालिस्तान वालों से, नक्सलवादियों से प्रभावित होकर, उनके पैसे से दाना चुग रहे हैं."
कौन हैं जसकौर मीणा, कैसे बनीं सांसद?
राजस्थान के लालसोट के मंडावरी गांव की रहने वाली हैं. 3 मई, 1947 में जन्म हुआ. अभी 72 बरस की हैं. सवाई माधोपुर में जिला शिक्षा अधिकारी रह चुकी हैं. राजस्थान यूनिवर्सिटी बीएड किया. फिर नौकरी के दौरान ही राजनीति में इनकी एंट्री हुई. 'लोकसभा टीवी' में दिए एक इंटरव्यू में जसकौर कहती हैं,
"घरवालों ने तो ये सोचकर पढ़ाया था कि शादी के बाद ससुराल से अपने हाथ से चिट्ठी वगैरह लिख सकूं. 10वीं के बाद स्कूल या कॉलेज नहीं गई. आगे की पढ़ाई प्राइवेट ही की. 1967 में मेरी बेटी हो गई थी, वो गोद में ही थी और मैंने बीए पूरा किया. 69-70 में मैंने बीएड कर लिया. दुखों में. बीएड करते ही मुझे थर्ड ग्रेड की नौकरी मिल गई. मुझे बड़ा अच्छा लगा, क्योंकि मैं टीचर बन गई थी. मैंने मन से अपना काम किया. मेरा सफर आज जब मैं याद करती हूं तो गर्व भी होता है और दिल हिल भी जाता है, ये सोचकर कि मैंने ये सब कैसे कर लिया उन मुसीबतों में."

जसकौर मीणा पहली बार 1999 में सवाई माधोपुर से BJP सांसद बनी थीं. (फोटो- फेसबुक)
'न्यूज़ 18' की रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 के दौरान जसकौर राज्य के शिक्षा विभाग में अधिकारी के तौर पर काम कर रही थीं. उस दौरान वो तत्कालीन शिक्षा मंत्री गुलाबचंद कटारिया के संपर्क में आईं. और 1999 में कटारिया और संघ की सलाह पर ही उन्हें सवाई माधोपुर से लोकसभा टिकट दिलाया गया. उस दौरान सवाई माधोपुर रिज़र्व सीट थी. जसकौर ने चुनाव जीता और संसद पहुंचीं. 1999 से 2003 तक केंद्र सरकार की कई सारी समितियों का हिस्सा रहीं. फिर 2003 से 2004 के बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री रहीं. 2004 में पार्टी ने फिर सवाई माधोपुर से टिकट दिया, लेकिन इस बार जसकौर के हिस्से जीत नहीं आई. 2008 में सवाई माधोपुर सीट से ही विधानसभा चुनाव लड़ा. BJP के ही टिकट पर, लेकिन इस बार भी हार का सामना करना पड़ा. 2019 में 15 साल के गैप के बाद जसकौर दोबारा सांसद बनीं. दौसा सीट से. कुछ साल पहले ये सीट रिज़र्व सीट बना दी गई थी, और सवाई माधोपुर जनरल सीट कर दी गई थी, इसलिए 2019 में BJP ने दौसा से जसकौर को टिकट दिया. 15 साल के गैप पर वो कहती हैं,
"मैं राजस्थान से BJP की पहली ST महिला हूं जो सांसद चुनी गई थी. मैंने पार्लियामेंट में सीखा, समझा. सीनियर लोगों से पूछा कि कैसे काम करूं. सबने प्रेरित किया. उसी का परिणाम है कि मैं आज दोबारा 15 साल के गैप के बाद आई. लेकिन ये 15 साल का गैप मेरी अपनी गलतियों से नहीं हुआ. राजनीति है, यहां तो कोई आगे बढ़ता है तो उसे पीछे ही खींचते हैं, तो चाहे वो पार्टी हो या पार्टी के बाहर हो, कांग्रेस पार्टी हो या अन्य, सबने मुझे घेरा मार करके दोबारा हरा दिया."
जसकौर का अपना एक संस्थान भी है, जो लड़कियों की शिक्षा की दिशा में काम करता है. 1993 में BJP सांसद ने इस संस्थान की शुरुआत की थी, नाम है जनजाति महिला विकास संस्थान. जसकौर के मुताबिक, वो गरीब लड़कियों के लिए कुछ करना चाहती थीं, इसलिए इसे खोला. गांववालों की मदद से इसकी शुरुआत हुई थी. शुरू में 13 लड़कियों को लिया गया था, अब जसकौर की मानें तो करीब 1600 लड़कियां यहां पढ़ रही हैं.
दौसा सांसद को लिखना भी पसंद है. चार किताबें लिख भी चुकी हैं. अगर रिपोर्ट्स की मानें, तो खेती करना भी पसंद है. अपने इलाके में खेती को लेकर भी कई अहम काम कर रही हैं. किसानों से मिलती रहती हैं. नई-नई तकनीक का इस्तेमाल करके खेती को बढ़ावा दे रही हैं. ऐसे में वो किसान आंदोलन को लेकर उनकी इस तरह की सोच देखकर मन दुखी होता है.

