अब वक़्त आ गया है कि कपिल शर्मा फूहड़ता छोड़ असल ह्यूमर पर काम कर लें
नेटफ्लिक्स पर आ रहा है उनका नया शो.
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कपिल शर्मा (बाएं) नया शो लेकर आ रहे हैं. लेकिन उनके पुराने कॉमेडी शोज़ पर स्त्री द्वेष, बॉडी शेमिंग को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं. तस्वीर में बीच में शुमोना चक्रवर्ती और दाईं तरफ कृष्णा अभिषेक हैं.
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कपिल शर्मा. तकरीबन दस साल पहले 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेन्ज' जीतकर सुर्ख़ियों में आए थे. उसके बाद से लगातार कॉमेडी कर रहे हैं. इनके कपिल शर्मा शो और कॉमेडी नाइट्स विद कपिल बहुत पॉपुलर शो रहे. अब कपिल ने नेटफ्लिक्स पर एक नया शो लेकर आने की घोषणा की है. वीडियो के ज़रिए उन्होंने ये मैसेज दिया.
शो क्या होगा, कैसा होगा, इस बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. क्या ये स्टैंड अप स्पेशल होगा, जैसे नेटफ्लिक्स पहले भी कर चुका है (अदिति मित्तल, हैना गैड्स्बी) या फिर सीरीज में चलने वाला शो होगा, इस बाबत कोई कन्फर्मेशन नहीं है. लेकिन कुछ चीज़ें हैं, जो कपिल शर्मा को अपने इस नए शो में निहायत त्याग देनी चाहिए.
जैसे: 1. सेक्सिज्म यानी लिंग के आधार पर महिला- पुरुष में भेदभाव. जिसमें अधिकतर महिओं को नीचा दिखाया जाता है. कपिल के पुराने शोज़ में उनके सेट पर मौजूद महिलाओं का बेहद घटिया तरीके से मज़ाक उड़ाया जाता रहा है. शुमोना चक्रवर्ती के किरदार भूरी को बेवकूफ दिखाना, उसके होठों का मज़ाक उड़ाना, ये सब कुछ कथित ह्यूमर के वरक में लपेटकर पेश किया जाता रहा है. सिर्फ कपिल शर्मा ही नहीं, उनके शो पर आने वाले गेस्ट भी इसमें हिस्सा लेते रहे हैं और ऑडियंस की तरफ से उन्हें रिस्पांस में हंसी ही मिलती है. जैसे अपनी फिल्म 'पानीपत' को प्रमोट करने जब संजय दत्त कपिल शर्मा के शो पर आए थे, तब कपिल ने उनसे उनकी पिछली फिल्म 'संजू' को लेकर एक जोक क्रैक किया था. उस फिल्म में संजय दत्त की 308 गर्लफ्रेंड्स होने की बात कही गई थी. कपिल ने जब इस बाबत संजय दत्त से पूछा तो संजय ने जवाब दिया, कि ये गिनती आगे जारी भी रह सकती है. इस बात को लेकर काफी छीछालेदर हुई थी शो की. यही नहीं, एक बार AAP के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास शो पर आए थे. एक कविता पढ़ी उन्होंने, जिसमें विवाहित महिलाओं को सामान कहा गया था. इस पर दिल्ली की एक महिला ने शिकायत भी दर्ज कराई थी. शो पर अली असगर, जो कपिल की दादी का रोल करते थे, को भी बार-बार नीचा दिखाया जाता था. यही चीज़ बुआ (उपासना सिंह) के साथ भी होती रहती. शो में दिखाया गया कि अब उनकी उम्र ज्यादा हो गई है, अभी तक उनकी शादी नहीं हुई, तो वो हर दूसरे इंसान के साथ फ्लर्ट करती हुई दिखाई जातीं. जिसे बोलचाल की भाषा में 'डेस्पेरेट' कहा जाता है.
उपासना सिंह के निभाये इस किरदार में और कुछ नहीं, सिर्फ एक बड़ी उम्र की महिला के शादी-शुदा न होने को लेकर मज़ाक बनाया गया. और घर-परिवार के लोगों ने साथ बैठकर ये शो देखे.
2. बॉडी शेमिंग यानी किसी के शरीर को लेकर उसका मज़ाक बनाना. शुमोना चक्रवर्ती के साथ भी ये चीज़ कई बार हो चुकी है शो पर. उनकी हाईट को लेकर. या फिर किकू शारदा के वज़न को लेकर भद्दे कमेंट किए जाते रहे हैं. भारती सिंह के वज़न को लेकर भी उन्हें कई बार ट्रोल किया गया. इसी तरह के कमेन्ट शो की ऑडियंस से भी सुनने को मिलते रहते, सवाल-जवाब वाले सेगमेंट के दौरान. यही नहीं, लोगों के लुक्स को लेकर उन्हें नीचा दिखाना, और कई बार सेलेब्रिटी गेस्ट्स के सामने शो के रेगुलर कैरेक्टर्स का मज़ाक उड़ाना भी कपिल शर्मा के शोज़ का हिस्सा रहा है. क्योंकि वो सेलेब्रिटीज़ जैसे 'सुंदर' और आकर्षक' नहीं दिखते.
शुमोना की हाईट, उनके लिप्स, इत्यादि पर लगातार कमेन्ट किए जाते. यही चीज़ शो के बाकी कैरेक्टर्स के साथ भी होती आ रही है.
3. बेढब क्रॉस ड्रेसिंग महिलाओं का पुरुषों और पुरुषों का महिलाओं की तरह कपड़े पहनना कोई नई या गलत चीज़ नहीं है. कई शो इसका इस्तेमाल करते हैं. विदेशों में भी ह्यूमर के लिए इसका इस्तेमाल होता है. ह्यूमर के परे भी इसका महत्त्व है. पुरुषों का महिलाओं के कपड़े पहनना और बोल्ड मेकअप करना 'ड्रैग' कल्चर कहलाता है. भारत और विदेशों में बहुत पॉपुलर है. लेकिन कपिल शर्मा के शो की कॉमेडी ह्यूमर पर नहीं, इन्सल्ट पर चलती दिखाई देती है. जहां पुरुषों का महिलाओं के कपड़े भर पहनना कोई हंसी की बात है, या फनी है. गोया पुरुषों की मर्दानगी थोड़ी नीचे घसीट ली गई हो. ऐसे कपड़े पहना कर.ये चीज़ सुनील ग्रोवर (गुत्थी), और कृष्णा अभिषेक (सपना) के किरदार इसकी बानगी भर हैं.
सपना के किरदार में लड़की बने कृष्णा अभिषेक एक कैरिकेचर से ज्यादा कुछ नहीं लगते. इस तरह का पोर्ट्रेयल ट्रांसफोबिया की तरफ भी इशारा करता है. ट्रांसफोबिया यानी किन्नर समुदाय से नफरत या उनसे डर. समाज में वैसे ही उन लोगों को स्वीकार्यता नहीं मिल पाती जो किन्नर समुदाय से होते हैं. तिसपर क्रॉस ड्रेसिंग को इतना हल्का बनाकर पेश करना एक बेहद गलत मैसेज देता है.
कपिल शर्मा के पिछले जितने भी कॉमेडी शो रहे हैं, सभी में कुछ न कुछ प्रॉब्लम बनी रही है. कभी थोड़ी कम, कभी थोड़ी ज्यादा. लेकिन 21वीं सदी के तीसरे दशक में आने के बाद भी अगर वही घटिया सामान परोसा जाएगा, तो ये समय और पैसे दोनों की बर्बादी से कम कुछ नहीं.
अब बस इतनी उम्मीद की जा सकती है कि नेटफ्लिक्स की युवा ऑडियंस को देखते हुए कपिल फूहड़ता छोड़कर असल ह्यूमर पर काम कर लें.
शो क्या होगा, कैसा होगा, इस बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. क्या ये स्टैंड अप स्पेशल होगा, जैसे नेटफ्लिक्स पहले भी कर चुका है (अदिति मित्तल, हैना गैड्स्बी) या फिर सीरीज में चलने वाला शो होगा, इस बाबत कोई कन्फर्मेशन नहीं है. लेकिन कुछ चीज़ें हैं, जो कपिल शर्मा को अपने इस नए शो में निहायत त्याग देनी चाहिए.
जैसे: 1. सेक्सिज्म यानी लिंग के आधार पर महिला- पुरुष में भेदभाव. जिसमें अधिकतर महिओं को नीचा दिखाया जाता है. कपिल के पुराने शोज़ में उनके सेट पर मौजूद महिलाओं का बेहद घटिया तरीके से मज़ाक उड़ाया जाता रहा है. शुमोना चक्रवर्ती के किरदार भूरी को बेवकूफ दिखाना, उसके होठों का मज़ाक उड़ाना, ये सब कुछ कथित ह्यूमर के वरक में लपेटकर पेश किया जाता रहा है. सिर्फ कपिल शर्मा ही नहीं, उनके शो पर आने वाले गेस्ट भी इसमें हिस्सा लेते रहे हैं और ऑडियंस की तरफ से उन्हें रिस्पांस में हंसी ही मिलती है. जैसे अपनी फिल्म 'पानीपत' को प्रमोट करने जब संजय दत्त कपिल शर्मा के शो पर आए थे, तब कपिल ने उनसे उनकी पिछली फिल्म 'संजू' को लेकर एक जोक क्रैक किया था. उस फिल्म में संजय दत्त की 308 गर्लफ्रेंड्स होने की बात कही गई थी. कपिल ने जब इस बाबत संजय दत्त से पूछा तो संजय ने जवाब दिया, कि ये गिनती आगे जारी भी रह सकती है. इस बात को लेकर काफी छीछालेदर हुई थी शो की. यही नहीं, एक बार AAP के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास शो पर आए थे. एक कविता पढ़ी उन्होंने, जिसमें विवाहित महिलाओं को सामान कहा गया था. इस पर दिल्ली की एक महिला ने शिकायत भी दर्ज कराई थी. शो पर अली असगर, जो कपिल की दादी का रोल करते थे, को भी बार-बार नीचा दिखाया जाता था. यही चीज़ बुआ (उपासना सिंह) के साथ भी होती रहती. शो में दिखाया गया कि अब उनकी उम्र ज्यादा हो गई है, अभी तक उनकी शादी नहीं हुई, तो वो हर दूसरे इंसान के साथ फ्लर्ट करती हुई दिखाई जातीं. जिसे बोलचाल की भाषा में 'डेस्पेरेट' कहा जाता है.
उपासना सिंह के निभाये इस किरदार में और कुछ नहीं, सिर्फ एक बड़ी उम्र की महिला के शादी-शुदा न होने को लेकर मज़ाक बनाया गया. और घर-परिवार के लोगों ने साथ बैठकर ये शो देखे.2. बॉडी शेमिंग यानी किसी के शरीर को लेकर उसका मज़ाक बनाना. शुमोना चक्रवर्ती के साथ भी ये चीज़ कई बार हो चुकी है शो पर. उनकी हाईट को लेकर. या फिर किकू शारदा के वज़न को लेकर भद्दे कमेंट किए जाते रहे हैं. भारती सिंह के वज़न को लेकर भी उन्हें कई बार ट्रोल किया गया. इसी तरह के कमेन्ट शो की ऑडियंस से भी सुनने को मिलते रहते, सवाल-जवाब वाले सेगमेंट के दौरान. यही नहीं, लोगों के लुक्स को लेकर उन्हें नीचा दिखाना, और कई बार सेलेब्रिटी गेस्ट्स के सामने शो के रेगुलर कैरेक्टर्स का मज़ाक उड़ाना भी कपिल शर्मा के शोज़ का हिस्सा रहा है. क्योंकि वो सेलेब्रिटीज़ जैसे 'सुंदर' और आकर्षक' नहीं दिखते.
शुमोना की हाईट, उनके लिप्स, इत्यादि पर लगातार कमेन्ट किए जाते. यही चीज़ शो के बाकी कैरेक्टर्स के साथ भी होती आ रही है.3. बेढब क्रॉस ड्रेसिंग महिलाओं का पुरुषों और पुरुषों का महिलाओं की तरह कपड़े पहनना कोई नई या गलत चीज़ नहीं है. कई शो इसका इस्तेमाल करते हैं. विदेशों में भी ह्यूमर के लिए इसका इस्तेमाल होता है. ह्यूमर के परे भी इसका महत्त्व है. पुरुषों का महिलाओं के कपड़े पहनना और बोल्ड मेकअप करना 'ड्रैग' कल्चर कहलाता है. भारत और विदेशों में बहुत पॉपुलर है. लेकिन कपिल शर्मा के शो की कॉमेडी ह्यूमर पर नहीं, इन्सल्ट पर चलती दिखाई देती है. जहां पुरुषों का महिलाओं के कपड़े भर पहनना कोई हंसी की बात है, या फनी है. गोया पुरुषों की मर्दानगी थोड़ी नीचे घसीट ली गई हो. ऐसे कपड़े पहना कर.ये चीज़ सुनील ग्रोवर (गुत्थी), और कृष्णा अभिषेक (सपना) के किरदार इसकी बानगी भर हैं.
सपना के किरदार में लड़की बने कृष्णा अभिषेक एक कैरिकेचर से ज्यादा कुछ नहीं लगते. इस तरह का पोर्ट्रेयल ट्रांसफोबिया की तरफ भी इशारा करता है. ट्रांसफोबिया यानी किन्नर समुदाय से नफरत या उनसे डर. समाज में वैसे ही उन लोगों को स्वीकार्यता नहीं मिल पाती जो किन्नर समुदाय से होते हैं. तिसपर क्रॉस ड्रेसिंग को इतना हल्का बनाकर पेश करना एक बेहद गलत मैसेज देता है.कपिल शर्मा के पिछले जितने भी कॉमेडी शो रहे हैं, सभी में कुछ न कुछ प्रॉब्लम बनी रही है. कभी थोड़ी कम, कभी थोड़ी ज्यादा. लेकिन 21वीं सदी के तीसरे दशक में आने के बाद भी अगर वही घटिया सामान परोसा जाएगा, तो ये समय और पैसे दोनों की बर्बादी से कम कुछ नहीं.
अब बस इतनी उम्मीद की जा सकती है कि नेटफ्लिक्स की युवा ऑडियंस को देखते हुए कपिल फूहड़ता छोड़कर असल ह्यूमर पर काम कर लें.

