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वो औरत जो दो साल दुनिया की सबसे बड़ी धर्म गुरु रहीं, गर्भवती हुईं फिर भी किसी को खबर न हुई

वो औरत जिसका नाम इतिहास से मिटा दिया गया.

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जस्टिस RF नरीमन ने सुनंदा भंडारे मेमोरियल लेक्चर में पोप जोआन के बारे में भी बताया, जो करीब ढाई साल तक पोप रही थीं.
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कुसुम
18 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 19 अप्रैल 2021, 06:34 AM IST)
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जस्टिस आरएफ नरीमन. सुप्रीम कोर्ट के जज हैं. 16 अप्रैल को उन्होंने जस्टिस सुनंदा भंडारे मेमोरियल लेक्चर दिया. विषय था इतिहास की महान औरतें. अपने लेक्चर की शुरुआत में जस्टिस नरीमन ने कहा कि अब वो वक्त ज्यादा दूर नहीं है जब भारत को उसकी पहली महिला चीफ जस्टिस मिलेगी.
अपने लेक्चर में जस्टिस नरीमन ने इतिहास की उन महिलाओं का जिक्र किया जिनका योगदान और जिनकी हिम्मत को समय के साथ भुला दिया गया. लेक्चर में उन्होंने जिन महिलाओं का जिक्र किया एक-एक कर उनके बारे में भी जानेंगे. पर पहले थोड़ा सा जस्टिस सुनंदा भंडारे के बारे में जान लेते हैं, जिनकी याद में 26 साल से सालाना लेक्चर आयोजित किया जा रहा है. कौन थीं जस्टिस सुनंदा भंडारे? सुनंदा भंडारे फाउंडेशन की वेबसाइट पर मिली जानकारी के मुताबिक, 1 नवंबर, 1942 को जन्मीं सुनंदा भंडारे की छवि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जज की थी. 1968 में वो महाराष्ट्र बार काउंसिल में एनरोल हुई थीं.1970 में वो नई दिल्ली शिफ्ट हुईं. जून, 1984 में वो दिल्ली हाई कोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर नियुक्त हुईं. मार्च, 1985 में वो परमानेंट जज बनीं. 52 की उम्र में कैंसर से उनकी मौत हो गई थी. उन्हें मल्टिपल मायलोमा था, ये एक प्रकार का ब्लड कैंसर है. हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद किरण खेर के भी इसी बीमारी से ग्रस्त होने की जानकारी उनके परिवार ने दी है. सुनंदा भंडारे की राय थी,
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जस्टिस भंडारे ने अपने करियर का आखिरी फैसला सेना से जुड़े एक कॉम्प्लेक्स मैटर पर दिया था. बीमार हालत में उन्होंने 78 पन्नों का जजमेंट दिया था. ये फैसला आर्मी के पुराने कानून के खिलाफ था जिसके तहत सैनिकों को बिना कोई कारण बताए नौकरी से निकाल दिया जाता था. इस फैसले के बाद वो कैंसर के इलाज के लिए इंग्लैंड चली गई थीं. उनकी मौत के एक हफ्ते बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके फैसले को बरकरार रखने का फैसला दिया था.
जस्टिस नरीमन ने अपने लेक्चर में जस्टिस भंडारे के लिए कहा,
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Justice Sunanda Bhandare. ये फोटो सुनंदा भंडारे फाउंडेशन की वेबसाइट से ली गई है.

अब जानते हैं इतिहास की महान औरतों के बारे में जिनका जिक्र जस्टिस नरीमन ने किया. क्लियोपैट्रा क्लियोपैट्रा मिस्र की आखिरी रानी थी. जिसने लगभग 40 सालों तक मिस्र पर राज किया. दुनिया भर में अगर किसी रानी के बारे में सबसे ज्यादा लिखा गया है, तो वो क्लियोपैट्रा है. अगर किसी पर सबसे ज्यादा नाटक लिखे गए, या फिल्में बनाई गईं तो वो क्लियोपैट्रा है. कहते हैं क्लियोपैट्रा की खूबसूरती की तुलना नहीं की जा सकती थी. वो जब बात करती तो लोग सम्मोहित हो जाते. वो देख भर लेती तो पुरुष वासना से भर उठते. लेकिन इन सब से ऊपर, बहुत ऊपर क्लियोपैट्रा एक फैरो थी, एक रानी. एक चालाक कूटनीतिज्ञ जिसे 9 भाषाएं आती थीं और गणित में अच्छे-अच्छों को मात दे सकती थी.
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साल 1963 में आई फिल्म Cleopatra में Elizabeth Taylor ने लीड किरदार निभाया था. (यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

जस्टिस नरीमन ने बताया कि क्लियोपैट्रा का इतिहास 2000 हज़ार साल पुराना है. उन्होंने बताया कि कैसे जानबूझकर की गई गलतियों की वजह से क्लियोपैट्रा रोम की छत्रप बनते-बनते रह गईं. उन्होंने कहा कि रोम में पुरुषों को डॉमिनेंस के चलते वह हार गईं. पोप जोआन जिस दूसरी महिला के बारे में जस्टिस नरीमन ने बात की वो थीं पोप जोआन. महिलाओं को पादरी बनने पर पाबंदी थी. लेकिन कहानी मशहूर है कि एक महिला थीं जो दो साल तक पोप रही थीं. उनको स्क्रिप्चर्स का जबरदस्त ज्ञान था. वो पुरुषों की तरह कपड़े पहनती थीं, जिससे किसी को पता नहीं चला कि वो महिला हैं. तब रोम की जनता पोप चुनती थी. जनता ने पोप जोआन को चुना. वह पोप के पद पर दो साल, पांच महीने और नो दिन रहीं. फिर पता कैसे चला कि वो महिला हैं? क्योंकि वो प्रेगनेंट हो गईं. एक दिन सड़क पर अकेली चल रही थीं, इसी दौरान उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया.
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Pope Joan पर साल 2009 में आई फिल्म का पोस्टर.

कहा जाता है कि इस घटना के बाद पत्थरों से मारकर उनकी हत्या कर दी गई. हालांकि कैथलिक चर्च इस बात से इनकार करता है कि कभी कोई महिला पोप बनी थी. जस्टिस नरीमन ने कहा कि इस कहानी पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल है पर इतिहासकारों ने पोप जोआन पर काफी कुछ लिखा है. रज़िया सुल्तान 2017 में राना सफवी ने डेली ओ के लिए एक आर्टिकल लिखा था. उसमें उन्होंने रज़िया सुल्तान के बारे में लिखा थाः
सुल्तान इल्तुतमिश की बेटी थीं जलालत उद्दीन रज़िया. इल्तुतमिश को लगता था कि रज़िया उनके 20 बेटों से ज़्यादा लायक हैं. ये एक दूरदर्शी राजा का साहसी कदम था. फिर भी, इल्तुतमिश की मौत के बाद, अप्रैल 1236 में तुर्की राजवंशियों ने उनके भाई रुकनुद्दीन फ़िरोज़ को राजगद्दी पर बैठा दिया. वो राज-पाठ में कम और दुनियाभर के आनंद लेने में ज़्यादा ध्यान देते थे, यही कारण था कि उनका शासनकाल बहुत ही छोटा रहा. रज़िया को अक्टूबर, 1236 में दिल्ली की सुल्तान का ताज हासिल हुआ.
रज़िया ने महिलाओं की पोशाक से परदे को हटा दिया. रज़िया बिना परदे के घुड़सवारी पर निकलती थीं. उनके शासन की सूझ-बूझ पर कभी संदेह नहीं किया गया. उन्होंने तुर्की अमीरों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की रणनीति का इस्तेमाल करके कंट्रोल किया था. दिल्ली की सल्तनत में तुर्की बड़ी पोस्ट्स पर थे, रज़िया इन तुर्कियों के हाथों की कठपुतली बनने को तैयार नहीं थीं. इसी वजह से उनकी बरबादी का कारण ये रहा कि वो तुर्कियों के हाथों की कठपुतली बनने को तैयार नहीं थीं. ये तुर्की दिल्ली सल्तनत में बड़े पोस्ट पर थे.
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Razia Sultan

उनके खिलाफ विद्रोह हुआ, वो हारीं तो तुर्कियों ने उनके भाई को गद्दी पर बैठा दिया. रज़िया को कैद कर लिया गया, कैद में रहते हुए रज़िया ने राजनीतिक गठबंधन किया और एक बार फिर लड़ीं. फिर हार गईं, अक्टूबर, 1240 में उनकी हत्या कर दी गई. इंग्लैंड की रानी- एलिज़ाबेथ I जस्टिस नरीमन ने बताया कि एलिज़ाबेथ I ब्रिटेन की रानी कैसे बनीं. वो हेनरी VIII और उनकी दूसरी पत्नी एनी की बेटी थीं. एलिज़ाबेथ के जन्म के ढाई साल बाद एनी को मौत की सज़ा दी गई. उनकी और हेनरी एट की शादी को रद्द कर दिया गया और एलिज़ाबेथ को नाजायज़ बता दिया गया. हेनरी की मौत के बाद एलिजाबेथ के सौतेले भाई एडवर्ड VI राजा बने. उन्होंने अपनी वसीयत में लेडी जेन ग्रे को उत्तराधिकारी बनाया. हालांकि, एडवर्ड की वसीयत को दरकिनार करते हुए उनकी एक और सौतेली बहन मैरी को क्वीन बनाया गया. क्वीन मैरी के राज में शक था कि इलिज़ाबेथ प्रोटेस्टेंट रेबेल्स को सपोर्ट कर रही हैं, इस वजह से एक साल तक उन्हें जेल में रखा गया. क्वीन मैरी की मौत के बाद एलिज़ाबेथ ब्रिटेन की रानी बनीं. क्वीन एलिज़ाबेथ ने कभी शादी नहीं की. उनके बाद उनके कज़िन जेम्स VI राजा बने.
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इंग्लैंड की महारानी रहीं Elizabeth 1 के पोर्ट्रेट से लिया गया स्क्रीनग्रैब.

जस्टिस नरीमन ने बताया कि क्वीन एलिज़ाबेथ जीनियस थीं. चार भाषाएं जानती थीं. उन्होंने डबलिन यूनिवर्सिटी बनाई, उन्होंने सौ के करीब ग्रामर स्कूल खुलवाए. जहां गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया जाता था. वो ये परखने में माहिर थीं कि किस काम के लिए कौन अच्छा होगा. उन्होंने विलियम सेसिल को चुना, जो 25 साल तक इंग्लैंड के प्रधानमंत्री रहे. एलिज़ाबेथ के काल में इंग्लैंड में शांति आई.
जस्टिस नरीमन ने अपने लेक्चर में रूस की कैथरीन द ग्रेट, मार्गरेट थैचर, इंदिरा गांधी और प्रतिभा पाटिल का भी जिक्र किया.
तो ये थीं इतिहास की महान औरतें, जिन्होंने पैट्रिआर्कि से लड़ते हुए अपनी जगह बनाई, न सिर्फ जगह बनाई वो सफल शासक भी साबित हुईं.

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