रानी रामपाल: घोड़ा गाड़ी चलाकर 100 रुपए कमाने वाले की बेटी 'एथलीट ऑफ द ईयर' बनी
बचपन कच्चे घर में बीता. दुआ करती थीं कि बारिश न हो, नहीं तो घर में पानी भर जाएगा.

रानी रामपाल. भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान हैं. 'वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर-2019' चुनी गई हैं. पहली बार दुनिया के किसी हॉकी प्लेयर ने स्पोर्ट्स की फील्ड का ये बड़ा अवॉर्ड जीता है.
'द वर्ल्ड गेम्स' ने 30 जनवरी, 2020 को विजेता के नाम का ऐलान किया था. एथलीट ऑफ द ईयर चुनने के लिए 8 जनवरी को वोटिंग शुरू हुई थी. 22 दिन बाद घोषणा हुई. 'द वर्ल्ड गेम्स' ने स्टेटमेंट जारी किया,
'भारतीय हॉकी सुपरस्टार रानी 'द वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर- 2019' बनी हैं. उन्हें बहुत-बहुत बधाई.'
दुनिया के 25 बड़े खिलाड़ी इस अवॉर्ड की रेस में थे, लेकिन रानी ने 199,477 वोट हासिल कर बाजी मार ली. दूसरे नंबर पर यूक्रेन के कराते चैम्पियन स्टानिस्लाव होरुना रहे. 92,539 वोटों के साथ. कुल 7,05,610 लोगों ने वोटिंग की थी.
रानी ने अवॉर्ड जीतने के बाद एक वीडियो जारी किया और थैंक्यू कहा. साथ ही अपनी टीम, देश और पूरी हॉकी फ्रेटर्निटी के नाम ये अवॉर्ड कर दिया. आगे कहा,
'हॉकी लवर्स, मेरे फैन्स, कोच, हॉकी इंडिया, सरकार, दोस्त, बॉलीवुड के दोस्त, साथी खिलाड़ी और देशवासियों ने मेरे लिए वोट किया. उन्हें थैंक्यू.'
इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन ने भी ट्वीट कर रानी को बधाई दी.
#TheWorldGamesAOTY
Here is her message after winning the award!@TheHockeyIndia
@imranirampal
has won The World Games Athlete of the Year award!
pic.twitter.com/FrtsfhsqOG
— International Hockey Federation (@FIH_Hockey) January 30, 2020
कौन हैं रानी रामपाल?
कप्तान हैं भारतीय महिला हॉकी टीम की. 25 साल की हैं. गजब का खेलती हैं. 15 साल की थीं, तब से भारत के लिए हॉकी खेल रही हैं. भारतीय हॉकी टीम में शामिल होने वाली सबसे युवा खिलाड़ी के तौर पर नाम दर्ज है. कई रिकॉर्ड्स अपने नाम कर चुकी हैं.
2018 में एशियन गेम्स के पहले रानी टीम की कप्तान बनी थीं. उनकी कप्तानी में टीम ने सिल्वर मेडल जीता था. पिछले साल हुई FIH सीरीज़ में रानी की कप्तानी में ही भारत ने जीत पाई थी. वो प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनी थीं. 2016 में रियो ओलंपिक्स में भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा थीं. अब तक 200 से ज्यादा इंटरनैशनल मैच खेल चुकी हैं. भारत सरकार उन्हें पद्म श्री भी देने वाली है. 25 जनवरी, 2020 को पद्म अवॉर्ड्स का ऐलान हुआ था.
Father of Rani Rampal, captain of Indian women's hockey team on his daughter being conferred with Padma Shri award: We're very happy&proud of our daughter.Before she started playing,we didn't even know what hockey was. Daughters are achieving greater heights today.(26.1) #Haryana
— ANI (@ANI) January 26, 2020
pic.twitter.com/Bzqe5zcLUK
कैसे बनीं हॉकी स्टार?
रानी हरियाणा के शाहबाद मारकंडा की रहने वाली हैं. परिवार बेहद गरीब था. पिता घोड़ा गाड़ी चलाते थे. दिन के मुश्किल से 100 रुपए कमा पाते थे. कच्चा मकान था. बारिश के वक्त घर के अंदर पानी टपकता था. रानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके परिवार वाले प्रार्थना करते थे कि बारिश न हो, क्योंकि बारिश के कारण उनके घर में पानी भर जाता था. रानी के लिए बचपन में स्कूल जाना भी मुश्किल था. किसी तरह घरवालों ने स्कूल में दाखिला करवाया था.
वो जब 6-7 साल की थीं, तब स्कूल से आते-जाते वो खेल के मैदान को देखती थीं. लड़के वहां हॉकी खेलते थे. उन्हें वो खेल अच्छा लगता था. एक दिन घर आकर अपने पिता रामपाल से बोलीं कि वो भी हॉकी खेलना चाहती हैं. घरवालों की दिक्कत यहीं से शुरू हो गई. क्यों? इसलिए क्योंकि रानी लड़की थीं. लड़की होकर हॉकी खेलने की बात करना, तब 'बड़ी' और 'अजीब' थी. घरवालों ने पहले तो मना किया, लेकिन रानी ने तो ठान लिया था, ज़िद पर अड़ गईं. रोना-गाना मचाया. पिता जैसे-तैसे मान गए. रिश्तेदारों और समाज वालों ने भी घरवालों के फैसले का विरोध किया, लेकिन फिर भी पैरेंट्स ने बेटी का साथ देने का फैसला किया.
रानी पहुंचीं शाहबाद हॉकी एकेडमी. दाखिला लेने. कोच थे द्रोणाचार्य अवॉर्ड पाने वाले बलदेव सिंह. उन्होंने पहले तो एडमिशन देने से मना कर दिया, लेकिन जब रानी का खेल देखा तो खुश हो गए. दाखिला दे दिया.

रानी बचपन से हॉकी खेल रही हैं. 15 साल की उम्र में उन्होंने इंटरनेशनल डेब्यू किया था. (फोटो- फेसबुक)
'द वीक' को दिए एक इंटरव्यू में रानी ने बताया कि कई बार उन्होंने हॉकी छोड़ने के बारे में सोचा, क्योंकि उनके परिवार के पास उनकी कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे. लेकिन कोच बलदेव सिंह ने और सीनियर खिलाड़ियों ने उनका साथ दिया. उन्हें हॉकी की पुरानी किट मुहैया कराई ट्रेनिंग के लिए.
पहले दिन खेलने गईं, तो क्या सोचा था?
इंडिया टुडे के एक इंटरव्यू में रानी ने बताया कि वो केवल एक बात मन में सोचकर खेलती थीं. ये कि उनका परिवार कच्चे घर में रहता है, वो अपनी फैमिली के लिए पक्का घर बनाना चाहती हैं. रानी ने कहा था,
'मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी इंडियन हॉकी टीम के लिए खेलूंगी. हर दिन मैं ये सोचकर खेलने जाती थी कि मैं अपने परिवारवालों के लिए पक्का मकान बनवाकर दूं. क्योंकि हम बहुत गरीब थे. किसी दिन थक भी जाती थी, तब भी यही सोचकर खेलती थी. लोगों का विरोध करके मेरे पैरेंट्स ने मुझे हॉकी खेलने की परमिशन दी थी. मैंने उनसे कहा था कि अगर कभी मेरी वजह से उनका अपमान हुआ, तो मैं उसी वक्त हॉकी छोड़ दूंगी.'
जब गाढ़ा रंग लाई कड़ी मेहनत
रानी ने जीतोड़ मेहनत की. इतनी कि जब वो 15 साल की थीं, तभी भारतीय हॉकी टीम में खेलने का मौका मिल गया. जून, 2009 में उन्होंने रूस में आयोजित चैम्पियन्स चैलेंज टूर्नामेंट खेला. फाइनल मुकाबले में चार गोल किए और इंडिया को जीत दिलाई. उन्हें 'द टॉप गोल स्कोरर' और 'द यंगेस्ट प्लेयर' घोषित किया गया. नवंबर, 2009 में एशिया कप हुए थे. इसमें टीम इंडिया ने सिल्वर मेडल जीता था, इस टूर्नामेंट में भी रानी का रोल बहुत तगड़ा था. तब से लेकर अब तक उन्होंने 200 से ज्यादा इंटरनैशनल मैच खेल लिए हैं. कई सारे रिकॉर्ड्स तोड़े हैं, कई रिकॉर्ड्स बनाए हैं. अभी फिलहाल नजर 2020 टोक्यो ओलंपिक्स पर है.
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