ग्लोबल ग्रोथ में कमी का जिम्मेदार भारत को बताने वाली गीता गोपीनाथ कौन हैं?
जिस भारतीय लड़की के स्कूल में 45% आते थे, वो आज दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों में से एक है.

गीता गोपीनाथ. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड (IMF) की चीफ इकोनॉमिस्ट हैं. इस वक्त काफी ज्यादा चर्चा में हैं. कारण? हाल ही में इन्होंने भारत की इकॉनमी को लेकर एक बयान दिया था. दरअसल, स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की मीटिंग चल रही है, जहां पर IMF ने ग्लोबल ग्रोथ के ताजा अनुमान के कुछ आंकड़े जारी किए.
IMF के ताजा अनुमान के मुताबिक, 2019 में ग्लोबल ग्रोथ 2.9 फीसद रहेगी. 2020 में ये दर 3.3 फीसद और 2021 में 3.4 हो जाएगी. भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ (आर्थिक वृद्धि) को लेकर भी IMF ने ताजा अनुमान जारी किए हैं, जिसके मुताबिक, 2019 में भारत की आर्थिक ग्रोथ 4.8 फीसद रहेगी. पिछले साल अक्टूबर में यही ग्रोथ 6.1 फीसद और जुलाई में 7 फीसद बताई गई थी. यानी 2019 की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में लगातार गिरावट आई है. हालांकि 2020 के लिए IMF ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर 5.8 और 2021 के लिए 6.5 आंकी है. 2018-19 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.8 रिकॉर्ड की गई थी.
We project global growth to increase modestly from 2.9% in 2019 to 3.3% in 2020 and 3.4% in 2021 according to our latest update to the World Economic Outlook #WEO
— IMF (@IMFNews) January 21, 2020
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IMF ने ट्विटर पर भी नए अनुमानित आंकड़ों की लिस्ट डाली है. नए अनुमानित आंकड़ों को लेकर गीता गोपीनाथ ने इंडिया टुडे को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि ग्लोबल ग्रोथ दर को 0.1 फीसद कम करके 2.9 किया गया है, क्योंकि इंडिया की GDP में गिरावट आ रही है और इसका असर पूरी विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. गोपीनाथ ने कहा,
'विश्व की GDP और ग्लोबल ग्रोथ में भारत की भागीदारी काफी अहम है. हमने ग्लोबल ग्रोथ में 0.1 फीसद की कमी लाकर उसे 2.9 किया है. और इस कमी का बड़ा हिस्सा भारत की आर्थिक वृद्धि में कमी की वजह से है.'
जब गीता से ये सवाल किया गया कि ग्लोबल ग्रोथ को भारत की धीमी पड़ी अर्थव्यवस्था ने किस हद तक प्रभावित किया है, तो उन्होंने जवाब दिया, 'साधारण तौर पर अगर हिसाब लगाएं तो 80 फीसद तक.'
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— India Today (@IndiaToday) January 20, 2020
Global growth down at 2.9%, says IMF Chief Economist Gita Gopinath as she speaks #exclusively
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अब गीता के इस बयान के बाद से ही उनके बारे में बातें की जा रही है. सवाल आता है कि भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में इतना बड़ा बयान देने वाली गीता हैं कौन?
जनवरी, 2019 में IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट की पोस्ट संभाली थी. इस पोस्ट पर कब्जा करने वाली पहली महिला हैं. उनके नाम का ऐलान अक्टूबर, 2018 में ही हो गया था. IMF की पूर्व प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने गीता के नाम की घोषणा की थी. उन्होंने गीता को दुनिया के बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक कहा था. 48 साल की गीता IMF की 11वीं चीफ इकोनॉमिस्ट हैं. उनसे पहले इस पोस्ट पर मौरिस आब्स्टफेल्ड थे. गीता हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर रही हैं.
गीता उस बड़े ऑर्गेनाइजेशन की मुख्य अर्थशास्त्री हैं, जो दुनिया की अर्थव्यवस्था पर नजर रखता है. वो आज जो कुछ भी हैं, अपने फैसलों की वजह से हैं.

गीता गोपीनाथ ने दावोस में आयोजित हुए फोरम में अर्थव्यवस्था को लेकर बात की. इसी फोरम में ग्लोबल ग्रोथ के अनुमानित आंकड़ों पर भी बात हुई. तस्वीर- PTI
गीता की जिंदगी से जुड़े ऐसे कई किस्से हैं, जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए. तो चलिए जानते हैं उन्हीं अनसुने किस्से और फैसलों के बारे में, जिन्होंने गीता को गीता गोपीनाथ बनाया.-
- जन्म कोलकाता में हुआ था. 8 दिसंबर, 1971 के दिन. 1980 में उनका परिवार मैसूर आ गया. तब गीता 9 साल की थीं. पैरेंट्स ने निर्मला कॉन्वेंट स्कूल में उनका दाखिला कराया. शुरू में गीता को स्पोर्ट्स बहुत पसंद था. लेकिन एक दिन गीता ने खेलना छोड़ दिया. अपने पिता गोपीनाथ से कहा कि वो अब पढ़ाई पर ध्यान देंगी.
- 11th और 12th में गीता ने साइंस सब्जेक्ट चुना. पैरेंट्स चाहते थे कि गीता या तो इंजीनियरिंग करें, या फिर मेडिकल की फील्ड में जाएं. लेकिन गीता ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने इकोनॉमिक्स में बीए करने का फैसला लिया. दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज में उन्हें एडमिशन मिल गया. ग्रेजुएशन के तीनों साल गीता ने क्लास में टॉप किया.
- अगर आप सोच रहे हैं, कि कॉलेज में टॉप करके गोल्ड मेडल जीतने वाली गीता, बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही होंगी, तो आपको बता दें कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. सातवीं क्लास तक गीता के केवल 45 फीसदी नंबर ही आते थे. वो फर्स्ट डिविजन में भी पास नहीं हो पाती थीं. लेकिन सातवीं के बाद सब बदल गया. उन्होंने पढ़ाई में ध्यान दिया और उनके 90 फीसदी अंक आने लगे.
- गीता आईएएस अधिकारी बनने का सपना लेकर दिल्ली आई थीं. ग्रेजुएशन तक यही सपना था, लेकिन ग्रेजुएशन के बाद एक और कड़ा फैसला लिया. क्या? इस सपने को छोड़ने का फैसला. उन्होंने इकोनॉमिक्स की फील्ड में ही आगे जाने का फैसला किया. दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एडमिशन लिया. वहां से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स की डिग्री ली. उसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में एडमिशन लिया. वहां से भी उन्होंने एमए किया. उसके बाद 2001 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पीएचडी की. फिर शिकागो यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू कर दिया. उसके बाद साल 2005 में गीता पहुंची हार्वर्ड यूनिवर्सिटी.
- गीता ने 1999 में इकबाल सिंह से शादी की. दोनों की मुलाकात दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में हुई थी. इकबाल ने 1996 के सिविल सर्विसेज एग्जाम में टॉप किया था, और वो तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी थे.
- प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बाद, गीता 2001 में भारत लौटना चाहती थीं. लेकिन गीता के मेंटर्स उन्हें यूएस में ही रोकने के पक्ष में थे. गीता ने कहा कि उनके पति इंडिया में हैं, इसलिए वो वापस वहीं जाना चाहती हैं. उसके बाद गीता के मेंटर्स ने इकबाल को प्रिंसटन में ही एक स्कॉलरशिप ऑफर की. इकबाल ने जॉब छोड़ दी और यूएस चले गए. उसके बाद से गीता ने कभी पलटकर नहीं देखा. वो समय-समय पर भारत आती रहती हैं, अपने माता-पिता से मिलने के लिए.
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