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अंडा, दूध, पनीर सबकुछ खाने के बाद भी कमजोर रहेंगी हड्डियां अगर ये कंडीशन हो गई

कैल्शियम की कमी से शरीर की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है. इस वजह से हड्डियों और मसल्स में दर्द होता है.

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28 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 28 अगस्त 2023, 05:10 PM IST)
Hypocalcemia
अक्सर विगन लोगों को ये समस्या हो जाती है. (सांकेतिक फोटो)
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हमने अक्सर ये सुना है कि अगर हड्डियों को मज़बूत रखना है तो कैल्शियम ज़्यादा खाओ. इसके लिए अंडा, दूध, उससे बनी चीज़ें जैसे पनीर, दही वगैरह खाने को कहा जाता है. अब सोचिए अगर ये सब खाने के बाद भी आपकी हड्डियों और जोड़ों में दर्द होने लगे. और जांच के बाद डॉक्टर बताए कि आपके शरीर में कैल्शियम की भयंकर कमी है. आपका पहला सवाल होगा कि ऐसे कैसे? हम तो भई दूध, दही, पनीर सब लेते हैं. 

दरअसल ये बिलकुल मुमकिन है कि ये सब चीज़ें खाने के बाद भी आपके शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाए. जैसे लल्लनटॉप के व्यूअर वर्धन के साथ हो रहा है. उनको हाइपोकैल्सीमिया (Hypocalcemia) हो गया है. यानी शरीर में कैल्शियम की कमी. वो भी तब जब उनकी ख़ुराक एकदम दुरुस्त है. तो आइए डॉक्टर्स से जानते हैं हाइपोकैल्सीमिया क्या होता है, शरीर में कैल्शियम की कमी क्यों हो जाती है और इसका इलाज क्या है.

हाइपोकैल्सीमिया क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर पी वेंकट कृष्णन ने.

( डॉ. पी वेंकट कृष्णन, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल )

शरीर के लिए कैल्शियम (Calcium) बेहद जरूरी है. कैल्शियम हड्डियों, मसल्स और मांसपेशियों को मजबूत करता है. शरीर में कैल्शियम की कमी को हाइपोकैल्सीमिया कहते हैं. हड्डियों का सफेद रंग कैल्शियम के कारण ही होता है. दूध, पनीर, अंडे जैसी खाने की चीजों में कैल्शियम काफी होता है. पेट में जाने के बाद ये कैल्शियम आंतों के द्वारा अब्सॉर्ब कर लिया जाता है. यहां से कैल्शियम खून में पहुंचता है और फिर हड्डियों पर जमा होता है. एक्स्ट्रा कैल्शियम हड्डियों से निकालकर पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है. हाइपोकैल्सीमिया में खून के अंदर कैल्शियम की कमी हो जाती है. हाइपोकैल्सीमिया में या तो शरीर कैल्शियम को एब्सॉर्ब नहीं कर पाता या फिर खाने के अंदर कैल्शियम कम होता है या होता ही नहीं है.

कारण

> शरीर में कैल्शियम की कमी कई वजह से होती है.

> कई लोग दूध और दूध से बनी चीजें और नॉन वेज नहीं खाते,

> कई लोग काफी सारी सब्जियां, दूध, दही, पनीर और नॉन वेज नहीं खाते.

> इन लोगों के शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है.

> जो छोटे बच्चे दूध नहीं पीते उनमें भी कैल्शियम की कमी हो जाती है.

> शरीर में दो हॉर्मोन कैल्शियम को कंट्रोल करते हैं- विटामिन D और पैराथायराइड (Parathyroid).

> इन हॉर्मोन्स की कमी या इनके काम में रुकावट के कारण भी कैल्शियम की कमी हो जाती है.

> शरीर में धूप से विटामिन D बनता है. इसकी कमी से भी कैल्शियम की कमी हो सकती है.

> क्योंकि विटामिन D ही खून में कैल्शियम अब्सॉर्ब करने में मदद करता है.

> कुछ मरीजों में जन्म से ही शरीर में कैल्शियम के रिसेप्टर्स में खराबी होती है.

> रिसेप्टर्स यानी जहां से बॉडी में कैल्शियम अंदर आता है. शरीर में कैल्शियम की कमी होने का ये भी एक कारण है.

लक्षण

> कैल्शियम की कमी से शरीर की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है.

> इस वजह से हड्डियों और मसल्स में दर्द होता है.

> जल्दी थकावट आ जाती है और हाथ पैरों में दर्द होता है.

> कैल्शियम की ज्यादा कमी होने पर मसल्स अकड़ जाती हैं. इसे टेटानी (tetani) कहा जाता है.

> चिड़चिड़ापन, हाथ-पैरों में झनझनाहट, होठों के आसपास झनझनाहट होती है.

> काम में मन न लगना, नाखूनों का पतला होकर टूट जाना. विटामिन D की कमी होने पर भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं.

> इसलिए विटामिन D की जांच करनी भी जरूरी है.

> प्रेग्नेंसी के बाद भी बॉडी में कैल्शियम की कमी हो जाती है. अक्सर स्तनपान कराने के दौरान ऐसा होता है.

> ऐसे में महिलाओं को तुरंत इलाज की जरूरत होती है, नहीं तो उन्हें दौरा भी पड़ सकता है.

> साथ ही दिल की धड़कन भी कम-ज्यादा हो सकती है और हार्ट अटैक भी आ सकता है.

इलाज

> कैल्शियम की कमी की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है.

> खून में कैल्शियम कम पाए जाने पर कैल्शियम से भरपूर चीजें खाने के लिए कहा जाता है.

> दूध, दही, पनीर, अंडा और सब्जियां खाने के लिए कहा जाता है.

> साथ ही कैल्शियम की कुछ टैबलेट्स भी दी जाती हैं.

> अक्सर प्रेग्नेंसी के दौरान ये टैबलेट्स महिलाओं को दी जाती हैं. क्योंकि कैल्शियम की कमी से बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है.

> अगर शरीर में कैल्शियम बहुत कम है तो ऐसे में कैल्शियम का इंजेक्शन लगाया जाता है.

> कई बार थायरॉइड ग्रंथि के ऑपरेशन के बाद भी बॉडी में कैल्शियम की कमी हो जाती है. उन्हें भी कैल्शियम की दवाइयां दी जाती हैं.

> अगर विटामिन D की कमी है तो उसका इलाज किया जाता है. विटामिन D की दवाइयां दी जाती हैं.

शरीर में कैल्शियम की कमी केवल डाइट की वजह से नहीं होती. और भी कारण हो सकते हैं. इसलिए अगर आपको बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर से जांच ज़रूर करवाएं. 

(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: क्या आपका शरीर कैल्शियम सोख पा रहा है? जानिए कैसे पता करें

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