एयरहोस्टेस बनाने का वादा कर पैसे ऐंठ रहे थे, एक लड़की की चालाकी से पोल खुल गई
झूठी नौकरियों का बिजनेस चलाने वाले पकड़े गए
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(बायीं तरफ़ सांकेतिक तस्वीर: नीरजा फिल्म से पोस्टर/ दायीं ओर सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)
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22 साल की शिप्रा सिंह को इंस्टाग्राम पर एक ऐड दिखा. नौकरी का. लिखा था, थाइलैंड की यो एयरलाइंस नाम की कंपनी केबिन क्रू हायर कर रही है. शिप्रा ने अप्लाई किया. उसे इंटरव्यू के लिए आने को कहा गया. कहां? दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारा के पास एक होटल में.
मेल टुडे में छपी रिपोर्ट
के अनुसार जब वो वहां पहुंची, तो देखा कि तकरीबन 250 कैंडिडेट वहां और मौजूद हैं. उन सभी से कहा गया कि प्रोसेस शुरू करने से पहले ढाई-ढाई लाख रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा. ये सुनकर शिप्रा का माथा ठनका. ये क्या बात हुई? पैसे क्यों लेने हैं? होटल मैनेजमेंट ने पुलिस को खबर की. छापा पड़ा, तो पता चला कि यहां एक फ़ेक जॉब रैकेट चल रहा है.
दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस तरह के जॉब रैकेट की खबरें आती रहती हैं.
नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनियों से लेकर सरकारी विभागों तक के नाम लिए जाते हैं. (सांकेतिक तस्वीर: दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस- ट्विटर)
किसे टारगेट करते हैं ये नकली जॉब वाले?
आमतौर पर छोटे शहरों के कॉलेजों से पढ़े स्टूडेंट्स को. कई बार ये प्लेसमेंट के नाम पर कॉलेजों के प्रशासन से कॉन्टेक्ट करते हैं. उन्हें वादा करते हैं कि वे बच्चों का प्लेसमेंट कराएंगे. बड़ी नामी कम्पनियों में. इसके लिए वो कंसल्टेशन फीस चार्ज करने की बात कहते हैं. जब कॉलेज वाले उन्हें पैसे दे देते, तो वो गायब हो जाते हैं.
नौकरी की तलाश में लगे हुए कम उम्र के लड़के-लड़कियां इनके जाल में आसानी से फंस जाते हैं. जिनकी पढाई ख़त्म हो जाती है, लेकिन नौकरी नहीं लग रही होती, ऐसे लोग इनके निशाने पर रहते हैं.
आम तौर पर फ़ेक नौकरियों का धंधा चलाने वाले असली जैसी दिखने वाली वेबसाइट बना लेते हैं, ताकि कोई चेक करे, तो उसे शक न हो. लेकिन थोड़ा ज्यादा ध्यान देने पर उनका फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सकता है. (सांकेतिक तस्वीर: ट्विटर)
किस तरह फंसाते हैं लोगों को?
नौकरी देने वाली वेबसाइट के ज़रिए डेटा निकाला जाता है. डीसीपी ईस्ट दिल्ली चिन्मय बिस्वाल ने बताया कि बड़ी संख्या में मेल भेजे जाते हैं. नौकरी ढूंढ रहे लोगों को. फिर रैकेट चलाने वाले जॉब कंसल्टेंट बनकर फोन करते हैं. फैंसी होटलों में इंटरव्यू भी करवाते हैं. मेल भेजकर पैसे मंगाते हैं कैंडिडेट से. उनसे कहा जाता है कि ये इंटरव्यू फीस है या सिक्योरिटी डिपॉजिट है. या फिर दूसरे चार्ज के नाम पर पैसे लिए जाते हैं. ऑनलाइन या टेलीफोन पर इंटरव्यू कराए भी जाते हैं. नकली अपॉइंटमेंट लेटर भी भेजे जाने के मामले देखे जाते हैं.
डीसीपी नई दिल्ली ईश सिंघल ने बताया,
साइबर सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनको ट्रेस करना मुश्किल होता है. इनके बैंक अकाउंट या पेमेंट के अकाउंट फ़ेक आइडेंटिटी से बनाए जाते हैं. उनके सर्वर भी विदेशों में होते हैं. पेमेंट जिन साइट या ऐप के माध्यम से होते हैं, वो फिजिकल वेरिफिकेशन कई बार नहीं करते हैं. काई बार आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर भी पेमेंट अकाउंट बना देते हैं. इसकी वजह से उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है.
नौकरी के लिए कम उम्र के लोगों को टार्गेट करना इनके लिए आसान रहता है. इंटरनेट पर फ़ेक आइडेंटिटी बनाना मुश्किल भी नहीं, इसलिए इन्हें पकड़े जाने का डर कम होता है. (सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)
कैसे बचें ऐसे फ्रॉड वालों से?
फैंसी नौकरी दिलाने के नाम पर कोई कॉल करे, तो उसे कोई जानकारी न दें. किसी कंपनी के नाम से फोन करें , तो उस कंपनी की वेबसाइट चेक करें. देखें, वहां सच में वैकेंसी है या नहीं. जिस इंटरनेट से मेल चेक कर रहे हैं, उसी इंटरनेट का इस्तेमाल करके ये देख लें कि कंपनी की हायरिंग कौन देखता है. लोकल लेवल पर कौन है. उससे बात करें. मेल पर पूछ लें. नौकरी दिलाने के नाम पर कोई पैसा मांगे, तो हरगिज़ न दें. कोई भी अच्छी कंपनी अपने यहां लोगों को नौकरी देने के नाम पर उनसे पैसे नहीं लेती. इन सब बातों का ध्यान रखें, तो सेफ रहेंगे.
वीडियो: दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिन 10 महिलाओं को टिकट दिया, उनके बारे में जानिए
मेल टुडे में छपी रिपोर्ट
के अनुसार जब वो वहां पहुंची, तो देखा कि तकरीबन 250 कैंडिडेट वहां और मौजूद हैं. उन सभी से कहा गया कि प्रोसेस शुरू करने से पहले ढाई-ढाई लाख रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा. ये सुनकर शिप्रा का माथा ठनका. ये क्या बात हुई? पैसे क्यों लेने हैं? होटल मैनेजमेंट ने पुलिस को खबर की. छापा पड़ा, तो पता चला कि यहां एक फ़ेक जॉब रैकेट चल रहा है.
दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस तरह के जॉब रैकेट की खबरें आती रहती हैं.
नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनियों से लेकर सरकारी विभागों तक के नाम लिए जाते हैं. (सांकेतिक तस्वीर: दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस- ट्विटर)किसे टारगेट करते हैं ये नकली जॉब वाले?
आमतौर पर छोटे शहरों के कॉलेजों से पढ़े स्टूडेंट्स को. कई बार ये प्लेसमेंट के नाम पर कॉलेजों के प्रशासन से कॉन्टेक्ट करते हैं. उन्हें वादा करते हैं कि वे बच्चों का प्लेसमेंट कराएंगे. बड़ी नामी कम्पनियों में. इसके लिए वो कंसल्टेशन फीस चार्ज करने की बात कहते हैं. जब कॉलेज वाले उन्हें पैसे दे देते, तो वो गायब हो जाते हैं.
नौकरी की तलाश में लगे हुए कम उम्र के लड़के-लड़कियां इनके जाल में आसानी से फंस जाते हैं. जिनकी पढाई ख़त्म हो जाती है, लेकिन नौकरी नहीं लग रही होती, ऐसे लोग इनके निशाने पर रहते हैं.
आम तौर पर फ़ेक नौकरियों का धंधा चलाने वाले असली जैसी दिखने वाली वेबसाइट बना लेते हैं, ताकि कोई चेक करे, तो उसे शक न हो. लेकिन थोड़ा ज्यादा ध्यान देने पर उनका फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सकता है. (सांकेतिक तस्वीर: ट्विटर)किस तरह फंसाते हैं लोगों को?
नौकरी देने वाली वेबसाइट के ज़रिए डेटा निकाला जाता है. डीसीपी ईस्ट दिल्ली चिन्मय बिस्वाल ने बताया कि बड़ी संख्या में मेल भेजे जाते हैं. नौकरी ढूंढ रहे लोगों को. फिर रैकेट चलाने वाले जॉब कंसल्टेंट बनकर फोन करते हैं. फैंसी होटलों में इंटरव्यू भी करवाते हैं. मेल भेजकर पैसे मंगाते हैं कैंडिडेट से. उनसे कहा जाता है कि ये इंटरव्यू फीस है या सिक्योरिटी डिपॉजिट है. या फिर दूसरे चार्ज के नाम पर पैसे लिए जाते हैं. ऑनलाइन या टेलीफोन पर इंटरव्यू कराए भी जाते हैं. नकली अपॉइंटमेंट लेटर भी भेजे जाने के मामले देखे जाते हैं.
डीसीपी नई दिल्ली ईश सिंघल ने बताया,
कई केस में नकली वेबसाइट भी बनाई जाती है. मशहूर कम्पनियों की वेबसाइट जैसी दिखने वाली वेबसाइट बनाई जाती है. सरकारी वेबसाइट की नक़ल करने वाली वेबसाइट भी मिल जाएंगी. इस पर नकली जॉब पोस्ट होती हैं. टेस्ट कराए जाते हैं. रिजल्ट पोस्ट होते हैं. उसके बाद सफल होने वाले कैंडिडेट से पैसे ऐंठे जाते हैं. चलताऊ ऑफिस भी बनवा लेते हैं ये लोग. स्टाफ का जुगाड़ किया जाता है. अपॉइंटमेंट लेटर दिए जाते हैं. पैसे निकलवाकर फिर ये लोग गायब हो जाते हैं.इन्हें पकड़ना मुश्किल है क्या?
साइबर सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनको ट्रेस करना मुश्किल होता है. इनके बैंक अकाउंट या पेमेंट के अकाउंट फ़ेक आइडेंटिटी से बनाए जाते हैं. उनके सर्वर भी विदेशों में होते हैं. पेमेंट जिन साइट या ऐप के माध्यम से होते हैं, वो फिजिकल वेरिफिकेशन कई बार नहीं करते हैं. काई बार आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर भी पेमेंट अकाउंट बना देते हैं. इसकी वजह से उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है.
नौकरी के लिए कम उम्र के लोगों को टार्गेट करना इनके लिए आसान रहता है. इंटरनेट पर फ़ेक आइडेंटिटी बनाना मुश्किल भी नहीं, इसलिए इन्हें पकड़े जाने का डर कम होता है. (सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)कैसे बचें ऐसे फ्रॉड वालों से?
फैंसी नौकरी दिलाने के नाम पर कोई कॉल करे, तो उसे कोई जानकारी न दें. किसी कंपनी के नाम से फोन करें , तो उस कंपनी की वेबसाइट चेक करें. देखें, वहां सच में वैकेंसी है या नहीं. जिस इंटरनेट से मेल चेक कर रहे हैं, उसी इंटरनेट का इस्तेमाल करके ये देख लें कि कंपनी की हायरिंग कौन देखता है. लोकल लेवल पर कौन है. उससे बात करें. मेल पर पूछ लें. नौकरी दिलाने के नाम पर कोई पैसा मांगे, तो हरगिज़ न दें. कोई भी अच्छी कंपनी अपने यहां लोगों को नौकरी देने के नाम पर उनसे पैसे नहीं लेती. इन सब बातों का ध्यान रखें, तो सेफ रहेंगे.
वीडियो: दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिन 10 महिलाओं को टिकट दिया, उनके बारे में जानिए

