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गुड़िया गैंगरेप: वो केस जिसमें 5 साल की बच्ची से रेप के बाद उसके शरीर के साथ बर्बरता की गई

घटना के सात साल बाद दो दोषियों को 20-20 साल कैद की सज़ा मिली है.

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31 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 31 जनवरी 2020, 03:51 PM IST)
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5 साल की बच्ची का गैंगरेप कर मारने की कोशिश हुई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर- रॉयटर्स)
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दिल्ली में 'निर्भया गैंगरेप' के ठीक साढ़े तीन महीने बाद ऐसा ही एक और केस हुआ था. अप्रैल, 2013 में ईस्ट दिल्ली में 5 साल की एक बच्ची का गैंगरेप हुआ. रेप के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में मोमबत्ती डाली गई. उसे मारने की कोशिश की गई. इसे गुड़िया गैंगरेप कहा गया. इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हुई. नाम- प्रदीप और मनोज शाह. घटना को सात साल होने आ रहे हैं. अब जाकर इस मामले में फैसला आया है. दिल्ली के एक कोर्ट ने दोनों दोषियों को 20-20 कैद की सज़ा सुनाई है.

इसके अलावा कोर्ट ने बच्ची को 11 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी ऐलान किया है. हालांकि, लड़की की तरफ से केस लड़ रहे वकील एचएस फुल्का ने कहा है कि वो दोषियों के खिलाफ उम्रकैद की सजा चाहते हैं, इसलिए अब वो दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगे. गुड़िया के पिता भी इस सज़ा से असंतुष्ट हैं. उनका कहना है कि उनकी बच्ची ने बहुत कुछ सहन किया. उसकी सात सर्जरी हुई. इसके अलावा ये भी कहा है कि दोषियों की वजह से अभी भी उन लोगों की जिंदगी खतरे में है. वो घटना के बाद से अपने गांव नहीं जा सके हैं.


Gudiya Gang Rape 1
बच्ची को मरा हुआ समझकर अपार्टमेंट में छोड़कर चले गए थे आरोपी. प्रतीकात्मक तस्वीर- रॉयटर्स.

हुआ क्या था 2013 में?

ईस्ट दिल्ली के एक अपार्टमेंट में बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी. उसी अपार्टमेंट के एक फ्लोर में प्रदीप और मनोज भी रहते थे. 15 अप्रैल, 2013 के दिन दोनों ने बच्ची को किडनैप करके अपने घर में बंद कर लिया. दो दिन तक उसका रेप किया. उसके प्राइवेट पार्ट में मोमबत्ती और प्लास्टिक की बोटल के टुकड़े डाले. उसे मारने की कोशिश की. जब उन्हें लगा कि बच्ची मर गई है, तो वो अपना फ्लैट छोड़कर फरार हो गए.

इधर गुड़िया के घरवाले उसे खोज रहे थे. लापता होने की शिकायत भी पुलिस में दर्ज करवा दी थी. 17 अप्रैल को पुलिस ने गुड़िया को खोज निकाला. वो उसी फ्लैट में मिली. हालत बहुत नाजुक थी. अस्पताल में भर्ती कराया गया. 20 अप्रैल को मनोज को बिहार से गिरफ्तार किया गया, 22 को प्रदीप भी गिरफ्तार हो गया.

पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की. मामले पर सुनवाई शुरू हुई. बीच में प्रदीप ने दावा किया कि वो घटना के वक्त नाबालिग था. दावा झूठा निकला. 7 जनवरी, 2020 को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 18 जनवरी को दोषी करार दिया गया. अब सजा का ऐलान हुआ है.




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