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'कपड़े के ऊपर से सीना छूना POCSO के तहत सेक्सुअल असॉल्ट नहीं'

बॉम्बे हाईकोर्ट की सिंगल बेंच का फैसला.

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24 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 24 जनवरी 2021, 01:54 PM IST)
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने फैसला सुनाया है. (हाईकोर्ट की फाइल फोटो)
बॉम्बे हाईकोर्ट की फाइल फोटो
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि 12 साल की बच्ची का टॉप उतारे बिना उसके ब्रेस्ट को छूना POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) के तहत सेक्सुअल असॉल्ट की श्रेणी में नहीं आएगा. बल्कि यह भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 354 के तहत अपराध की श्रेणी में आएगा. यहां एक बात ख़ासी ध्यान देने वाली है. कोर्ट ने इस तरह का कृत्य को अपराध की श्रेणी से मुक्त नहीं किया है. ये ग़लत है, अपराध है. लेकिन POCSO नहीं, बल्कि IPC की धारा 354 के तहत. बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत यौन शोषण की सजा 3-5 साल है, जबकि IPC की धारा 354 के तहत एक से डेढ़ साल तक की सजा का प्रावधान है. बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने अपने एक फैसले में कहा है कि 12 साल की बच्ची के ब्रेस्ट को छूना यौन उत्पीड़न नहीं है जब तक कि आरोपी बच्ची का कपड़ा नहीं हटाता या उसके कपड़े के अंदर हाथ नहीं डालता. हालांकि यह निश्चित रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध की श्रेणी में आएगा. जस्टिस Pushpa V Ganediwala ने एक व्यक्ति को POCSO अधिनियम की धारा 8 (यौन उत्पीड़न की सजा) के तहत बरी कर दिया. हालांकि, न्यायालय ने धारा 354 (आपराधिक बल हमला) के तहत सजा को बनाए रखा. आरोपी अमरूद देने के बहाने 12 साल की बच्ची को अपने घर ले गया था. और उसके ब्रेस्ट को टच किया था, उसकी सलवार उतारने की कोशिश की थी, तभी बच्ची की मां पहुंच गई और उसे बचा लिया. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO एक्ट और IPC के तहत दोषी करार दिया. इसके बाद उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट ने कहा कि POCSO Act के तहत मामला तब बनता, जब व्यक्ति बच्ची का गुप्तांग छूने का प्रयास करता या उसे अपना गुप्तांग छूने के लिए मजबूर करता. लेकिन यहां यह मामला नहीं है. इस मामले में किसी भी तरह का सीधा शारीरिक संपर्क नहीं हुआ है. 12 साल की बच्ची का ब्रेस्ट दबाने के मामले में इसकी जानकारी नहीं है कि आरोपी ने उसका टॉप हटाया था या नहीं? ना ही यह क्लियर है कि उसने टॉप के अंदर हाथ डाल कर ब्रेस्ट दबाया था. ऐसी सूचनाओं के अभाव में इसे यौन शोषण नहीं माना जाएगा. यह आईपीसी की धारा 354 के दायरे में आएगा, जो स्त्रियों की लज्जा के साथ खिलवाड़ करने से जुड़ा है. जज ने कहा कि पोक्सो के तहत यौन हमला एक अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है. जिसमें यौन इरादे के साथ कोई एक्ट किया गया हो, इसमें निजी अंगों को छूना या बच्चे को आरोपी के निजी अंग को छूना शामिल है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र का मूल सिद्धांत यह है कि अपराध के लिए सजा अपराध की गंभीरता के अनुपात में होगी. इस तरह कोर्ट ने दोषी की सजा कम कर दी.

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