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बॉलीवुड के वो पांच डायलॉग जिन्होंने लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर दी.

सलमान से लेकर शाहरुख तक लड़कियों को किसी ने नहीं बक्शा.

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15 जून 2022 (अपडेटेड: 15 जून 2022, 08:07 PM IST)
bollywood movies that changed our love life
दबंग फिल्म, रांझणा फिल्म (फोटो-आजतक)
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प्यार एक ही बार होता है.
ना में भी हां है, लड़कियों की तो आदत है भाव खाना 
थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब प्यार से लगता है 
हंसी तो फंसी

बॉलीवुड के ऐसे कितने ही डायलॉग हैं जो हमे मुंहजुबानी याद रहते हैं और न केवल याद रहते हैं बल्कि हम इन्हें ही सच मानते बड़े होते हैं. कल रात घर जाने के लिए मैं कैब में बैठी. कैब जैसे ही मॉल के पास से गुज़री तो उस ओर देख कैब ड्राइवर ने तपाक से कहा - ये लड़कियां लड़कों को रिझाने के लिए ऐसे कपड़े पहनती हैं. फिर कुछ होगा तो कहेंगी लड़को ने ऐसा किया वैसा किया. आप सुन रही है न मैडम. मैं गलत थोड़ी बोल रहा हूं. सलमान खान ने भी वांटेड पिक्चर में ऐसा ही कुछ बोला था. कोई आम दिन होता तो मैं पलटकर तुरंत कोई जवाब देती. पर मैं थकान से इतना चूर थी और रोज़ इसी तरह से बातें सुन के मेरे अंदर का गुस्सा भी ठंडा पड़ चुका था, सो मैंने जाने दिया. मैं बस खिड़की से बाहर नॉएडा के सबसे खचाखच मेट्रो स्टेशन सेक्टर 18 के आसपास वाली हंसती खिलखिलाती लड़कियों को देख रही थी. और सोच रही थी जो ड्राइवर ने कहा वो तो मैंने भी सुना है. एक समय तक उसे सच माना है. टीनएज में हम सब वही मानते है जो आस पास सुनते हैं, बॉलीवुड मूवीज में देखते हैं लेकिन ये सच नहीं है. बहुत सारे डायलॉग और मूवीज टॉक्सिक होती है. आज  हम पांच ऐसी चीज़ों के बारे में बात करेंगे जिन्हें आपके और मेरे जैसे लोग सच मानकर बड़े हुए. उनपर भरोसा किया, पर एक्चुअल में वो सच नहीं है बल्कि एक हद तक टॉक्सिक है.

पहली बात, प्यार सिर्फ एक बार होता है.

कुछ कुछ होता है देखकर लोगों ने दो चीजे सीखी. शायद आपने भी सीखी हों. मीम्स में भी ये डायलॉग खूब चलते हैं.  एक तो भई प्यार दोस्ती है. और एक पूरी जिंदगी में हमे प्यार सिर्फ एक बार ही हो सकता है. फिल्म में जब राहुल की मां उसको दूसरी शादी करने के लिए बोलती है तो राहुल एक डायलॉग मारता है. हम एक ही बार जीते है, एक बार मरते है. शादी भी एक ही बार होती है. और प्यार भी एक ही बार होता है. बार बार नहीं होता. लोगों ने इस डायलॉग को कतई सीरियसली ले लिया. बिना फिल्म देखे भी. मैं भी इसपर भरोसा करती थी. कॉलेज में अगर किसी लड़की का ब्रेकअप हो जाता था तो मैं उसे जज करने लग जाती थी. ब्रेकअप के बाद  वो किसी और के साथ रिलेशनशिप में जाती तो मैंने हमेशा यही सोचा इसको तो प्यार करना आता ही नहीं है. ये तो फेक है. और लड़को के लिए भी मैंने यही सोचा. चोट तो मेरे साथ जब हुई जब मेरी सबसे अच्छी दोस्त का ब्रेकअप हो गया. ब्रेकअप के बाद वो सारे सेंटी सांग्स सुनने लग गई. उसे लगने लगा उसकी  जिंदगी बस यहीं तक है. वो उसके बिना कैसे जिएगी? वो ही तो उसका सच्चा और पहला प्यार था. और उसी से ब्रेकअप हो गया? अब तो दोबारा प्यार हो ही नहीं सकता है.

जो बात मैंने अपनी दोस्त से कही थी वही आपको भी कहूंगी. ऐसा नहीं होता है. प्यार हमे दोबारा भी हो सकता है.  किसी शादीशुदा व्यक्ति का पार्टनर ना रहे तो वो भी दूसरी शादी कर सकता है/ सकती है. या किसी का  रिलेशनशिप ठीक नहीं चल रहा है, उनकी रोज लड़ाई हो रही है. दोनों एक साथ खुश नहीं रह पा है तो वो भी अपना रिश्ता खत्म कर सकते हैं और किसी और से प्यार कर सकते हैं. किसी और से नहीं तो खुद से प्यार कर के भी आप खुश रह सकते है.  
बॉलीवुड ने शुरू से ही हमे  हमारा प्यार करने का तरीका, किस से प्यार करना चाहिए, कैसे प्यार करना चाहिए, कैसा हमारा सपनो का राजकुमार होगा टाइप की बातें सिखाई है जो एक्चुअली ट्रैश है. कूड़ा है. सबकी ज़िंदगी रूल बुक के हिसाब से नहीं चलती. और हमें बॉलीवुड को रूल बुक मानना बंद करना चाहिए.

दूसरी चीज़ जो हमने सच मानी वो है स्टाकिंग प्यार है.

एक फिल्म है रांझणा जिस में कहा गया यूपी में प्यार करने के दो तरीके होते है. कुंदन यानि की धनुष कहता है हार कैसे माने हमारे यूपी में लड़कियां दो तरीको से पटाई जाती है, एक तो मेहनत करो. दिन रात लड़की का पीछा करो. प्रेम पत्र लिखो और सहेली के हाथों उसे पहुंचवाओ. इससे नहीं माने तो दूसरा तरीका अपनाओ और लड़की को डरा दो. मान जाएगी. ये तरीके बहुत से लड़के और लड़कियां आजमाते है. पर दोस्तों, स्टाकिंग प्यार नहीं क्राइम है. लड़की का स्कूल,ट्युशन और कॉलेज जाते समय उसका पीछा करना गलत है. लड़कियों, कोई लड़का पीछा करे तो उसे प्यार समझना एकदम बंद करो. ये कोई क्यूट चीज़ नहीं है. इसे लाइटली लेना बंद करो.

तीसरी बात जो हमने सीखी वो है थप्पड़ से डर नहीं लगता!

थप्पड़ से डर नहीं लगता साहेब प्यार से डर लगता है. एक तो सल्लू भैया ने पहले सारी मटकियां तोड़ी. और फिर पैसे देते वक्त बोलते है प्यार से दे रहे है रख लो वरना थप्पड़ मार कर भी दे सकते हैं. पलट कर हेकड़ी दिखाने के लिए गरियाने के बजाय हीरोइन कहती है थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब प्यार से लगता है. मुझे आज भी याद है मूवी हॉल में इस डायलॉग पर लोगो ने जमकर तालियां बाजाई थी. पता नहीं सबको ये डायलॉग सही कैसे लगा?

 इस डायलॉग का मतलब है आप प्यार नहीं करोगे लेकिन थप्पड़ खा लोगे? कबीर सिंह में भी यही हुआ था जब प्रीती को थप्पड़ मारा तो लोगों ने उसे भी ठीक समझा. हाल ही में आई जयेश भाई जोरदार में महिला ने कहा अगर मेरे पति मुझे मारेंगे तो शायद मैंने ही कुछ गलत किया होगा. उनका हक है मुझे मारना. हम सबने यही सीखा है की रिलेशनशिप में अगर कोई हाथ उठा रहा है तो वो ठीक है. इतना सा चलता है. जहां प्यार है वहां लड़ाई है. मारपीट है. जब तक किसी औरत के शरीर पर नील के निशान न हो तब तक हम यही मानते है की उसके साथ हिंसा नहीं हुई. हमें ये समझने कि ज़रूरत है कि किसी भी प्रकार की हिंसा गलत है. चाहे हो थप्पड़ हो या किसी और तरीके का फिजिकल एब्यूज.

चौथा है कि कंसेंट वंसेंट कुछ नहीं होता.

कुछ दिन पहले मैंने एक सीरीज देखी. मॉडर्न लव. जिसका पांचवा एपिसोड है आई लव ठाणे. इस एपिसोड को देख कर मुझे बहुत खुशी मिली. क्योंकि मैंने इस में एक नई चीज देखी. कंसेंट. लड़का लड़की से सवाल पूछने के पहले कहता है-  "क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूं?"  लड़की  किस करने से पहले पूछती है. क्या मैं आपको किस कर सकती हूं?

 ये बहुत नया था क्योंकि बॉलीवुड में मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा. हमेशा देखा एक दूसरे के करीब आने से पहले कोई पूछता नहीं है. ये सब तो मोमेंट में ही हो जाता है. और अगर लड़की मना करे तो लड़की की ना में ही हां छुपी है.मुझे भी पहले ऐसा ही लगता था सब कुछ मोमेंट में हो जाता है. लेकिन ऐसा नहीं होता है. रोमांस का मतलब बिना पूछे कुछ भी करना नहीं होता है. पहले आप एक दूसरे से पूछे. और फिर आगे बड़े. और कभी भी लड़की की ना में हां नहीं छुपी होती है.

पांचवा और सबसे खराब ये मानना है कि लड़की रिझाने के लिए तैयार होती है!

तेरा पल्लू सरका जाए रे बस तो फिर हो जाए..
लड़की का पल्लू सरकने को सिग्नल की तरह लिया गया. एकदम नेचुरल और नार्मल सी चीज़ को रोमैनटिसाइज़ कर के बताया गया. वो डायलॉग याद है, 'वो कौन है जिसने पू को मुड़कर नहीं देखा?' बेसिकली इन बातों का सार यही था कि लड़की का तैयार होना, अच्छे कपड़े पहनना, सजना संवारना सब कुछ सजना के लिए है. पल्लू गिरने को सिग्नल और छोटे कपड़ों को अटेंशन से जोड़कर फिल्मों ने खूब प्रमोट किया. आस पास के तानों ने इसमें आग में घी डालने का काम किया. और लड़के तो क्या कितनी ही लड़कियां भी यही मानती हुई बड़ी हुईं कि सब कुछ लड़कों को इम्प्रेस करने के लिए किया जाता है. यही बात कल ड्राईवर भैया ने कही थी. पर भाई, ये ये सबसे बड़ा भ्रम है. मेरी ये चुन्नी का सरकना या मेरा तैयार होना न कोई सिग्नल है ना किसी को इम्प्रेस करने के लिए किया गया है. मेरा मन है. मेरी इच्छा है. सो मैंने किया है.

वक़्त के साथ कुछ चीजें हमें अनलर्न करनी होती है. जो कुछ सीखा है वो सब सही नहीं होता. वो गाना है ना, गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल, वैसे ही समय आ गया. दिमाग से कचरा निकालों. आपका क्या सोचना है मुझे ज़रूर बताए. 

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