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नाक से सांस लेना मुश्किल, मुंह से सांस लेना आसान, कहीं दीवार टेढ़ी तो नहीं?

डेविएटेड सेप्टम के कई कारण होते हैं. जैसे कि बचपन में चोट लगने से या किसी लड़ाई में शरीर पर लगी चोट की वजह से हड्डी टेढ़ी हो जाती है. कई लोगों में जन्म से ही नाक की हड्डी टेढ़ी होती है और ऐसे ही इसका विकास होता है. इस वजह से मरीज को समस्या होने लगती है.

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सरवत
| आयूष कुमार
4 दिसंबर 2023 (पब्लिश्ड: 05:25 PM IST)
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डेविएटेड सेप्टम वाली नाक (बाएं) और नॉर्मल सेप्टम वाली नाक (दाएं)
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अमित लल्लनटॉप के व्यूअर हैं. उनका एक बेटा है 12 साल का. उसे बचपन से ही नाक से सांस लेने में दिक्कत रही है. नाक से पानी आना. छींके आना. ज़ुकाम होने पर आंखों और नाक के पास दर्द बढ़ जाना, जैसे लक्षण रहे हैं. हाल-फ़िलहाल में प्रदूषण बढ़ने पर उसे सांस लेने में और समस्या होने लगी. जब डॉक्टर को दिखाया तो पता चला उसे बचपन से डेविएटेड सेप्टम की दिक्कत रही है. ये एक बहुत ही आम समस्या है. हममें से बहुत लोगों को होती है, पर जानकारी न होने के कारण हम इस पर ध्यान नहीं देते.

अब ये है क्या? दरअसल हमारी नाक के नथुनों को अलग करने वाली दीवार का नाम है नेज़ल सेप्टम. जब ये टेढ़ी होती है, किसी भी कारण से, तो उसे डेविएटेड सेप्टम कहते हैं. हर इंसान जिसे ये कंडीशन है, ज़रूरी नहीं है कि उसे सारे मेजर लक्षण देखने को मिलें. पर हां, अगर आपको नाक से सांस लेना मुश्किल पड़ता है और मुंह से सांस लेना आसान, तो हो सकता है नाक की ये दीवार थोड़ी टेढ़ी हो. 

चलिए डॉ. शिखर गुप्ता से जानते हैं कि कुछ लोगों को ये समस्या क्यों होती है और आपको कैसे पता चलेगा कि आपकी नाक की ये दीवार टेढ़ी है.

(डॉ. शिखर गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, ईएनटी, प्रिसटीन केयर)

डॉक्टर के मुताबिक नाक के अंदर दो रास्ते होते हैं, जिन्हें नेज़ल कैविटी कहा जाता है. इन दोनों रास्तों के बीच एक हड्डी मौजूद होती है जिसे नेज़ल सेप्टम कहते हैं. अगर ये हड्डी किसी वजह से अपनी जगह से खिसकर टेढ़ी हो जाए, तो इसे डेविएटेड नेज़ल सेप्टम कहते हैं.

कारण

डेविएटेड सेप्टम के कई कारण होते हैं. जैसे कि बचपन में चोट लगने से या किसी लड़ाई में शरीर पर लगी चोट की वजह से हड्डी टेढ़ी हो जाती है. कई लोगों में जन्म से ही नाक की हड्डी टेढ़ी होती है और ऐसे ही इसका विकास होता है. इस वजह से मरीज को समस्या होने लगती है.

लक्षण

- नाक से सांस लेने में मुश्किल होना.

- नाक से खून आना.

- नाक, चेहरे या आंखों के आसपास दर्द होना.

- नाक से पानी और छींके आना.

- या नाक से जुड़ी दूसरी किसी एलर्जी के लक्षण भी दिख सकते हैं.

इलाज

डेविएटेड सेप्टम के लक्षणों को दूर करने के लिए पहले दवाइयों से इसका इलाज किया जाता है. मरीज को नेजल स्प्रे, एंटी हिस्टामिनिक और डी कंजस्टिंग दवाइयां दी जाती हैं. अगर ये दवाइयां काम नहीं करतीं तो सर्जरी करनी पड़ती है. नाक की हड्डी को सीधा करने वाले इस सर्जरी को सेप्टोप्लास्टी कहते हैं. ये सर्जरी दूरबीन के जरिए ही की जाती है. जिस दिन सर्जरी होती है, मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया जाता है. 

इसके अलावा जो लोग सर्जरी फ़िलहाल नहीं करवाना चाहते, उन्हें कुछ योगासन करने के लिए कहा जाता है. इससे मरीज को हो रही दिक्कत में थोड़ी राहत मिलती है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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