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महिला पत्रकार को चार महीने से मिल रही रेप और मर्डर की धमकी, स्टॉकर को हर लोकेशन पता होती है

पत्रकार ने इन धमकियों से परेशान होकर अनजान फोन उठाना लगभग बंद कर दिया है

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27 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 27 जनवरी 2021, 02:57 PM IST)
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नेहा दीक्षित ने फेसबुक पोस्ट किया है कि उन्हें चार महीने से हत्या, रेप और एसिड अटैक की धमकियां मिल रही हैं.
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एक महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये बताया है कि कैसे पिछले कुछ समय से उसे प्रताड़ित किया जा रहा है. पत्रकार का नाम नेहा दीक्षित है. उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी है. नेहा ने बताया है कि पिछले चार महीनों से उनका पीछा किया जा रहा है. अलग-अलग नंबरों से कुछ लोग उनको फोन कर रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं. नेहा के मुताबिक, इन लोगों को ये तक पता होता है कि नेहा और उनके पार्टनर कहां हैं और क्या कर रहे हैं.
पोस्ट में नेहा ने लिखा है,
"सितंबर 2020 से मुझे फिजिकली स्टॉक किया जा रहा है. स्टॉकर मुझे रेप, एसिड अटैक और मर्डर की धमकी देता है. दर्जनभर से ज्यादा फोन नंबरों से मेरे पास कॉल आ रहे हैं. तीन-चार अलग-अलग आवाज में मुझसे बात करते हैं. वो लोग मुझे और मेरे पार्टनर को जान से मारने की धमकी देते हैं. 25 जनवरी की रात करीब 9 बजे किसी ने मेरे घर में घुसने की कोशिश की. जब मैं चिल्लाई तो वो भाग गया. मैंने इसे लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. ये बात मुझे यहां रखना जरूरी लगा, क्योंकि एक तरफ हम ऑनलाइन ट्रोलिंग पर इतनी बात करते हैं, जो होनी भी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की स्टॉकिंग, फोन पर मिलने वाली धमकियों और हमलों पर बात होनी चाहिए."

नेहा ने इसे लेकर वसंत कुंज पुलिस थाने में एक एफआईआर दर्ज करवाई है. इसमें उन्होंने खुद को मिलने वाली धमकियों के बारे में विस्तार में लिखा है. FIR के मुताबिक, नेहा को पहला कॉल सितंबर 2020 में आया था. कॉल करने वाले को उस वक्त पता था कि नेहा कहां हैं, और क्या कर रही हैं. उसने धमकी के लहजे में कहा- 'सब्जी ले रही है न तू, बड़ा रिपोर्टर बनती है, जान जाएगी तेरी.'
ये शुरुआत थी. अक्टूबर-नवंबर में भी उनके पास कई कॉल आए. एक बार फोन पर उनसे कहा गया- 'तू कॉल गर्ल है न, रिपोर्टर कैसे बन गई.' कॉल गर्ल, एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर उनके पास और भी कॉल्स आए. नेहा ने लिखा कि नवंबर में वह प्रॉमेनाड मॉल में थीं. उस वक्त उनके पास फोन आया- 'मॉल घूम रही है तू, जब गोलियों से मरेगी तब कर लेना शॉपिंग.'
नेहा ने FIR में बताया कि दिसंबर में हर दिन उनके पास पांच से छह कॉल्स आते थे. एक दिन वो जिम गईं तो उनके पास कॉल आया- 'रिपोर्टर जिम आई है कार में, अभी यहीं गोली से उड़ाऊंगा तुझे.'
इसके बाद 23 दिसंबर को नेहा जब अपने दोस्त के घर से वापस लौट रही थीं, तब उनके पास फोन आया- 'पार्टी कर रही है दोस्तों के साथ, अभी यहीं कपड़े उतारकर रेप करूंगा. और सड़क पर नंगा फेंकूंगा. सारी रिपोर्टरगिरी निकल जाएगी तेरी. पति भी गांव में है तेरा. ऐसे ही मरी मिलेगी तू सड़क पर.'
इसके बाद 9 जनवरी को नेहा के पास फोन आया- 'पति रहता नहीं है तेरा यहां. उसको भी उड़ाऊंगा, रेप करके तेजाब डालूंगा तुझ पर. तब देखेंगे कितनी रिपोर्ट लिखती है.'
नेहा इन सबसे परेशान हैं. अब उन्होंने अनजान नंबर से आने वाले कॉल उठाने लगभग बंद कर दिए हैं. फिर भी जब कभी वो फोन उठा लेती हैं तो इस तरह की धमकियां उन्हें दी जाती हैं. नेहा ने बताया कि कई बार जब उनके पति फोन उठाते हैं तो वो खुद किसी ब्रॉडबैंड सर्विस का बताकर फोन रख देते हैं.
Neha Dixit Fir नेहा की FIR का वो हिस्सा जिसमें उन्होंने रेप की धमकी के बारे में लिखा है.

नेहा के बारे में जानने के बाद हमने उनसे बात की. जब हमने फोन मिलाया तो फोन किसी पुरुष ने उठाया, वो शायद उनके पति थे. पहचान बताने के बाद उन्होंने नेहा से बात करवाई. नेहा ने कहा,
"मैं नहीं चाहती कि ये मेरे बारे में मुद्दा बने. मैं दिल्ली में रहती हूं. मेरे पास ऐसे प्रिविलेज हैं जो छोटे शहरों, कस्बों, गांवों में काम करने वाले पत्रकारों के पास नहीं हैं. उनको कितनी थ्रेट मिलती है. अभी हम देखें कि एक साल के अंदर ही कितने पत्रकार फिजिकल वॉयलेंस का शिकार हुए. चाहे दिल्ली दंगे कवर करते हुए कारवां के पत्रकार पर हुआ हमला हो, चाहे गाजियाबाद के पत्रकार की गोली मारकर हुई हत्या हो. इस बात को सबके सामने रखने का मेरा मकसद यही था कि इससे ऑफलाइन स्टॉकिंग और धमकियों पर बात शुरू हो और उन पत्रकारों या कार्यकर्ताओं को मिलने वाली धमकियों, उन पर होने वाले हमलों पर लोगों का ध्यान जाए."
हमने नेहा से पूछा कि क्या ये धमकियां किसी खास रिपोर्ट के बाद आना शुरू हुईं. इस पर नेहा ने कहा कि कॉलर केवल उनके पत्रकार होने पर बात करते हैं. किसी रिपोर्ट या घटना का जिक्र कॉलर ने नहीं किया. नेहा ने इस बात पर जोर दिया कि ये जरूरी है कि हम ऑनलाइन दुनिया के बाहर चल रही हिंसा, स्टॉकिंग और धमकियों पर ध्यान देना शुरू करें.

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