The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Oddnaari
  • An activist semi-nude video case Kerala High Court said Nudity and obscenity are not always synonymous

न्यूड होकर शरीर पर बेटे से कराई पेंटिंग, HC ने महिला पर जो बोला, अच्छे अच्छों को हजम नहीं होगा

हाई कोर्ट ने महिला के खिलाफ पूरा केस ही ख़ारिज कर दिया

Advertisement
Kerala High Court discharged a women rights activist in a POCSO case
रेहाना फातिमा के खिलाफ केस को केरल हाई कोर्ट ने खारिज किया. (फाइल फोटो: रेहाना फातिमा का फेसबुक अकाउंट और आजतक)
pic
सुरभि गुप्ता
6 जून 2023 (अपडेटेड: 6 जून 2023, 02:06 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

केरल की रहने वाली एक्टिविस्ट रेहाना फातिमा के खिलाफ तीन साल पहले हुए एक केस को केरल हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. साल 2020 में उनका एक सेमी-न्यूड वीडियो वायरल हुआ था, जिस पर काफी बवाल हुआ था. रेहाना पर POCSO एक्ट, IT एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धाराओं के तहत केस हुआ था. रेहाना के खिलाफ इस केस को केरल हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि न्यूडिटी का मतलब हमेशा अश्लीलता नहीं होता.

5 जून को आए केरल हाई कोर्ट के फैसले में कहा गया,

Image embed

रेहाना के खिलाफ मामला क्या था?

रेहाना ने 19 जून, 2020 को एक वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था. #BodyArtandPolitics के साथ. वीडियो में रेहाना टॉपलेस थीं. उनके दो छोटे बच्चे, एक बेटा और एक बेटी ने उनके शरीर के ऊपरी हिस्से पर पेंटिंग की थी. रेहाना के मुताबिक उन्होंने ये वीडियो ये बताने के लिए बनाया था कि औरत को समाज के सामने अपने शरीर और सेक्स को लेकर ओपन होने की जरूरत है. उस समाज के सामने जहां सेक्स और न्यूडिटी को टैबू माना जाता है.

रेहाना ने फेसबुक पर लिखा था,

Image embed

Image embed

वीडियो सामने आने पर काफी बवाल हुआ था. वीडियो को अश्लील और असभ्य कहा गया. इसके बाद केरल पुलिस ने रेहाना के खिलाफ केस दर्ज किया था. मामले की जांच हुई. एर्नाकुलम के एडिशनल सेशल कोर्ट में रिपोर्ट फाइल की गई. रेहाना कोर्ट के सामने पेश हुईं और उन्हें बेल दी गई. इसके बाद रेहाना की ओर से इस मामले को खारिज करने की अर्जी दी गई. लेकिन उनकी अपील खारिज कर दी गई. एडिशनल सेशल कोर्ट के उसी आदेश को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

रेहाना के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT एक्ट), 2000 और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई थी.

हाई कोर्ट में अपनी अपील में रेहाना ने कहा कि ‘बॉडी पेंटिंग' समाज के उस दृष्टिकोण के खिलाफ थी, जिसके तहत माना जाता है कि औरत का शरीर यौन संतुष्टि या यौन क्रियाओं से जुड़ा है. कोर्ट ने रेहाना की इन बातों पर गौर किया कि वीडियो ऐसी धारणाओं को चुनौती देने के लिए बनाया गया था. 

केरल हाई कोर्ट ने क्या कहा?

रेहाना को राहत देते हुए केरल हाई कोर्ट ने कहा कि वीडियो को अश्लील नहीं माना जा सकता है. जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने पुरुष और महिला के शरीर को लेकर समाज के दोहरे मानकों का जिक्र किया.

केरल हाई कोर्ट के फैसले में कहा गया कि पुरुषों के शरीर के ऊपरी हिस्से की नग्नता को अश्लील या असभ्य नहीं माना जाता है. कोर्ट ने कहा,

Image embed

इस मामले में कोर्ट की राय थी कि एक मां का अपने शरीर को अपने बच्चों के लिए कैनवास की तरह इस्तेमाल करने देने में कुछ भी गलत नहीं था. यह केवल इसलिए था कि बच्चों को न्यूड बॉडी को सामान्य तौर पर देखने के कॉन्सेप्ट के लिए संवेदनशील बनाया जा सके.

कोर्ट ने कहा,

Image embed

रेहाना फातिमा के खिलाफ दलील दी गई कि उन्होंने वीडियो में अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को बिना कपड़ों के दिखाया है, इसलिए यह अश्लील और असभ्य है. हालांकि, इस दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि ‘नग्नता का मतलब हमेशा अश्लीलता नहीं होता.’

वीडियो: सबरीमाला की एक्टविस्ट रहीं रेहाना के सेमी न्यूड वीडियो पर बवाल क्यों मचा?

Advertisement

Advertisement

()