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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी में महिलाओं का ये प्रदर्शन तालिबान को बहुत खटकेगा

अफगानिस्तान की महिलाएं शिक्षा मंत्रालय के सामने इकट्ठी हुईं. तालिबान को ललकारते हुए नारा दिया, "शिक्षा मेरा अधिकार है, स्कूल फिर से खोलो!"

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30 मई 2022 (अपडेटेड: 2 जून 2022, 11:28 PM IST)
women protest in afghanistan
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए तालिबान अधिकारियों ने सादे कपड़ों में तालिबान लड़ाकों को तैनात किया था (फोटो - AFP)
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29 मई को Afghanistan की कई महिलाओं ने 'रोटी, काम, आज़ादी' का नारा लगाते हुए राजधानी काबुल में Taliban के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया. अगस्त 2021 में सत्ता पर क़ाबिज़ होने के बाद से ही तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं पर एक के बाद एक प्रतिबंध लगाए हैं. मार्च के महीने में भी लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा पर बैन के ख़िलाफ़ महिलाओं ने मोर्चा बुलंद किया था.

इससे पहले तालिबान ने 1996 से 2001 तक अफ़ग़ानिस्तान के बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा किया था. फिर अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप किया, जिसके बाद महिलाओं की स्थिति में कुछ बेहतरी आई. लेकिन महिलाएं जितनी आगे बढ़ी थीं, तालिबान ने एक-एक कर उस पर भी फ़ुल स्टॉप लगा दिया.

Taliban ने Kabul में महिलाओं का प्रदर्शन रोका

महिलाएं शिक्षा मंत्रालय के सामने इक्कट्ठा हुईं. नारेबाज़ी की. कइयों ने बुर्का पहना हुआ था, कइयों ने नहीं. नारा दिया, "शिक्षा मेरा अधिकार है, स्कूल फिर से खोलो!"

AFP के एक रिपोर्टर ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली. इसी बीच तालिबान अधिकारियों ने सादे कपड़ों में अपने लड़ाकों को तैनात किया. प्रदर्शनकारी जोलिया पारसी ने कहा,

"हम एक घोषणापत्र पढ़ना चाहते थे, लेकिन तालिबान ने इसकी अनुमति नहीं दी.

"उन्होंने कुछ लड़कियों के मोबाइल फोन ले लिए और हमें हमारे विरोध की तस्वीरें या वीडियो लेने से भी रोक दिया."

सत्ता पर क़ब्ज़े के बाद तालिबान ने इस्लामी शासन के एक सॉफ़्ट वर्ज़न का वादा किया था, लेकिन समय के साथ उनकी कट्टरता बढ़ती जा रही है. दसियों हज़ार लड़कियों को माध्यमिक विद्यालयों से बाहर कर दिया गया है. और, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में लौटने से रोक दिया है. महिलाओं के अकेले यात्रा करने पर भी बैन लगा दिया.

इसके अलावा महिलाओं के अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शनों पर भी प्रतिबंध लगा दिए.

मई में ही एक फ़रमान जारी करते हुए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने कहा कि महिलाओं को आम तौर पर घर पर ही रहना चाहिए. अगर वे बाहर निकलें तो सिर से पैर तक ढके होने चाहिए. इस फ़रमान पर ख़ूब बवाल हुआ. UN ने इस आदेश को वापस लेने का आह्वान किया, तो उसे भी ख़ारिज कर दिया. इसके बाद महिला TV होस्ट्स को बुर्का पहन कर न्यूज़ प्रेज़ेंट करने के आदेश दे दिए.

29 मई को विरोध प्रदर्शन के दौरान भी कुछ अफ़ग़ान महिलाओं ने शुरू में छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन किए लेकिन तालिबान ने जल्द ही प्रदर्शन के नेताओं को घेर लिया और ख़बर है कि उन्हें डिटेन करने की जगह, उन्हें नज़रबंद कर दिया गया है. 

वीडियो - तालिबानी कानूनों के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं का आंदोलन

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