स्कूलवालों ने सिर्फ एक काली टीशर्ट की वजह से लड़की को बुरी तरह डांटा, वापस घर भेज दिया
लड़की की कोई गलती भी नहीं थी.
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बायीं तरफ हैं ज़ोई मैसी. इन्होंने अपनी ड्रेस को लेकर स्कूल द्वारा किए गए कमेंट्स को पब्लिक कर दिया. फेसबुक पर पोस्ट डालकर. इसमें उन्होंने जो दिक्कत बताई, वो भारत में भी कई लड़कियों को झेलनी पड़ती है. असल में, बहुत कम ही ऐसी होती हैं जो इससे बच पाती हैं, दायीं ओर सांकेतिक तस्वीर.
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18 साल की एक लड़की. हाई स्कूल में पढ़ने वाली. जींस टीशर्ट पहनकर स्कूल गई. थोड़ी देर में उसकी स्कूल की काउंसलर ने उसे अपने रूम में बुलाया. जैसे वो उनके कमरे में गई, उन्होंने कहा,
ज़ोई ने ये तस्वीर अपने फेसबुक अकाउंट पर डाली और बताया कि उनके साथ स्कूल में क्या हुआ. यही टीशर्ट पहनकर वो स्कूल गई थीं. उनका पोस्ट वायरल हो गया और 4200 से ज्यादा लोगों ने उसे शेयर किया. ये स्टोरी लिखे जाने तक इस पोस्ट को पांच हजार लोग लाइक भी कर चुके थे. (तस्वीर: फेसबुक/ज़ोई मैसी)
ये खबर पढ़ते ही मुझे अपने स्कूल के दिनों की याद आई, वहां भी लड़कियों के कपड़ों को लेकर नियम से परे रोका-टोकी होती थी. फिर कई और लड़कियों ने हमसे इसी तरह के अनुभव शेयर किये.
14 साल की एक लड़की. बिहार के एक छोटे से शहर में पढ़ने वाली. दसवीं क्लास में थी. एक दिन स्कूल की सफ़ेद सलवार गंदी पड़ी थी, तो सफ़ेद चूड़ीदार डाल कर चली गई. सोचा, टीचर को बता देगी. लेकिन प्रेयर के टाइम पर ही टीचर ने सबके सामने उसे ज़लील कर दिया. कहा टांगें दिखाने का इतना शौक है तो कहीं और दिखाना. स्कूल में ये सब करने आती हो? लड़की का नाम? रितु. जगह? सिवान.
15 साल की एक मासूम लड़की. स्कूल में बैडमिंटन खेल रही थी. खेलते हुए उसकी समीज के कंधे पर उसकी ब्रा का स्ट्रैप दिख गया. वहीं बैठी टीचर ने दूसरी से फुसफुसा कर कहा, ‘शरीर भरा नहीं कि इनको दिखाने की चुल्ल मच जाती है’. ये बात उस लड़की तक पहुंच गई. उसके बाद उसने स्कूल में कभी बैडमिन्टन नहीं खेला. लड़की का नाम? रावी. जगह? जयपुर.
18 साल की जोई मैसी के पास फेसबुक था. अपनी बात कहने का एक तरीका था. लेकिन इन लड़कियों के पास ये समझ सकने का जरिया भी नहीं था कि जो उनके साथ हो रहा है, वो गलत है.
बचपन में शुरुआत पढ़ले स्लिप पहनने से होती है. पहले उसको लेकर धीरे-धीरे कॉन्शस किया जाता है. ताकि आदत पड़ जाए. एक नज़र कन्धों पर रखने की. उस उम्र में, जिसमें चिंता करना ज़रूरी नहीं होता. शरीर को कामुक नहीं होना होता. (सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)
वो लड़कियां जिनका दुपट्टा उनकी दूसरी चमड़ी बन गया.
टिकटॉक पर एक वीडियो बहुत चल रहा है. एक लड़की है. जो रास्ते से जा रही है. उसके हाथ से कुछ छूटकर गिर जाता है. उसे उठाने की कोशिश करती है वो. लेकिन सामने दो लड़के उसे घूर रहे हैं. ताकि वो झुके, और उन्हें उसका क्लीवेज दिख जाए. तभी दो लड़के आते हैं और लड़की के सामने पीठ करके खड़े हो जाते हैं. ताकि सामने वाले लड़कों को कुछ दिखाई न दे. इसी वीडियो के जवाब में एक वीडियो बना था जिसमें लड़की बड़े गर्व से दुपट्टा लेकर आती है. लपेटती है अपने गले में, और झुक जाती है. अपना सामान उठाने के लिए.
बैकग्राउंड में तालियां बज रही होती हैं. क्या सॉल्यूशन ढूंढा है.
वही दुपट्टा. जिसके चक्कर में लड़कियों ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया. एक उम्र के बाद पीठ सीधी करके चलना छोड़ दिया. जिसके चक्कर में कंधे झुके, और झुकते चले गए.
थोड़ी सी भी लंबी लड़की हो, या थोड़े बड़े स्तनों वाली हो, उसे फ़ौरन कह दिया जाता है, झुक कर चलो, नीचे देखकर चलो. सीना मत तानो. लोग समझेंगे कि तुम चीप हो. इस तरह की बातें फिल्मों में नहीं होतीं. आस पास सुनते हुए बड़े हुए हैं हम में से कई लोग. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)
ऐसी खबर कोई नई नहीं है. कई बार पढ़ने को मिलती है. कि लड़की ने स्लीवलेस टॉप पहना था तो उसे घर भेज दिया. भारत में तो खैर स्कूलों में यूनिफॉर्म होती है. उसमें भी कॉन्वेंट स्कूलों में मोरल पुलिसिंग बहुत होती है. कई लड़कियों ने ऑडनारी को बताया. कि उन्हें स्कूलों में किस तरह ऐसा व्यवहार झेलना पड़ा.
दीक्षा एक रेजिडेंशियल स्कूल में थी. वहां पर लड़कियों को जींस पहनने की इजाज़त नहीं थी. हॉस्टल में भी नहीं. एक बार एक लड़की जींस पहन कर आ गई थी, तो उसे कपड़े बदलकर आने को कहा गया.
अमृता भी एक रेजिडेंशियल स्कूल में थी. जब वो आठवीं क्लास में पहुंची, तो स्कूल वालों ने लड़कियों से पैसे लिए. और सभी लड़कियों के लिए ब्रा मंगवाईं. आठवीं क्लास से लेकर बारहवीं क्लास की लड़कियों के लिए ब्रा कम्पलसरी कर दी गई. फीमेल पीटी टीचर पीठ पर हाथ मारकर चेक किया करती थीं कि किस-किसने पहन रखी है.
ये लड़कियां बड़ी हुई, बिना किसी से कुछ कहे. बिना शिकायत के. तो आज जब कोई लड़की हिम्मत करके इसके खिलाफ लिखती है, खड़ी होती है, तो अच्छा लगता है. लेकिन इससे साबित ये हो जाता है कि चाहे अपना देश हो या दुनिया में सबसे ज्यादा प्रोग्रेसिव होने का दावा करने वाला देश. औरतों के शरीर को कंट्रोल करने, उन्हें ढकने-छुपाने के तरीके भले लोकल हों, मानसिकता यूनिवर्सल है.
(पहचान छुपाने के लिए नाम और जगह बदल दिए गए हैं)
वीडियो: गोविंदा की भांजी आरती सिंह ने जो बताया, उसे सुनकर घर भावुक हो गया
ब्रा क्यों नहीं पहनती तुम? चलती हो तो ब्रेस्ट्स हिलते हुए दिखाई देते हैं. निप्पल्स भी दिख रहे हैं टीशर्ट के भीतर से. इस तरह से बिना ब्रा के चलती दिखाई दोगी तो लोग तुम्हें...इसके बाद वो टीचर जैकेट्स लेकर आई और उसे पहनने को कहा. रोते हुए लड़की ने अपने पापा को फोन किया. उन्हें बुलाया कि वो आकर उसे स्कूल से ले जाएं. इसके बाद उस लड़की ने इस बारे में सब कुछ फेसबुक पर पोस्ट कर दिया. पोस्ट वायरल हो गई. लड़की का नाम? ज़ोई मैसी. जगह? अमेरिका का टेक्सस राज्य.
ज़ोई ने ये तस्वीर अपने फेसबुक अकाउंट पर डाली और बताया कि उनके साथ स्कूल में क्या हुआ. यही टीशर्ट पहनकर वो स्कूल गई थीं. उनका पोस्ट वायरल हो गया और 4200 से ज्यादा लोगों ने उसे शेयर किया. ये स्टोरी लिखे जाने तक इस पोस्ट को पांच हजार लोग लाइक भी कर चुके थे. (तस्वीर: फेसबुक/ज़ोई मैसी)ये खबर पढ़ते ही मुझे अपने स्कूल के दिनों की याद आई, वहां भी लड़कियों के कपड़ों को लेकर नियम से परे रोका-टोकी होती थी. फिर कई और लड़कियों ने हमसे इसी तरह के अनुभव शेयर किये.
14 साल की एक लड़की. बिहार के एक छोटे से शहर में पढ़ने वाली. दसवीं क्लास में थी. एक दिन स्कूल की सफ़ेद सलवार गंदी पड़ी थी, तो सफ़ेद चूड़ीदार डाल कर चली गई. सोचा, टीचर को बता देगी. लेकिन प्रेयर के टाइम पर ही टीचर ने सबके सामने उसे ज़लील कर दिया. कहा टांगें दिखाने का इतना शौक है तो कहीं और दिखाना. स्कूल में ये सब करने आती हो? लड़की का नाम? रितु. जगह? सिवान.
15 साल की एक मासूम लड़की. स्कूल में बैडमिंटन खेल रही थी. खेलते हुए उसकी समीज के कंधे पर उसकी ब्रा का स्ट्रैप दिख गया. वहीं बैठी टीचर ने दूसरी से फुसफुसा कर कहा, ‘शरीर भरा नहीं कि इनको दिखाने की चुल्ल मच जाती है’. ये बात उस लड़की तक पहुंच गई. उसके बाद उसने स्कूल में कभी बैडमिन्टन नहीं खेला. लड़की का नाम? रावी. जगह? जयपुर.
18 साल की जोई मैसी के पास फेसबुक था. अपनी बात कहने का एक तरीका था. लेकिन इन लड़कियों के पास ये समझ सकने का जरिया भी नहीं था कि जो उनके साथ हो रहा है, वो गलत है.
बचपन में शुरुआत पढ़ले स्लिप पहनने से होती है. पहले उसको लेकर धीरे-धीरे कॉन्शस किया जाता है. ताकि आदत पड़ जाए. एक नज़र कन्धों पर रखने की. उस उम्र में, जिसमें चिंता करना ज़रूरी नहीं होता. शरीर को कामुक नहीं होना होता. (सांकेतिक तस्वीर: Pixabay)वो लड़कियां जिनका दुपट्टा उनकी दूसरी चमड़ी बन गया.
टिकटॉक पर एक वीडियो बहुत चल रहा है. एक लड़की है. जो रास्ते से जा रही है. उसके हाथ से कुछ छूटकर गिर जाता है. उसे उठाने की कोशिश करती है वो. लेकिन सामने दो लड़के उसे घूर रहे हैं. ताकि वो झुके, और उन्हें उसका क्लीवेज दिख जाए. तभी दो लड़के आते हैं और लड़की के सामने पीठ करके खड़े हो जाते हैं. ताकि सामने वाले लड़कों को कुछ दिखाई न दे. इसी वीडियो के जवाब में एक वीडियो बना था जिसमें लड़की बड़े गर्व से दुपट्टा लेकर आती है. लपेटती है अपने गले में, और झुक जाती है. अपना सामान उठाने के लिए.
बैकग्राउंड में तालियां बज रही होती हैं. क्या सॉल्यूशन ढूंढा है.
वही दुपट्टा. जिसके चक्कर में लड़कियों ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया. एक उम्र के बाद पीठ सीधी करके चलना छोड़ दिया. जिसके चक्कर में कंधे झुके, और झुकते चले गए.
थोड़ी सी भी लंबी लड़की हो, या थोड़े बड़े स्तनों वाली हो, उसे फ़ौरन कह दिया जाता है, झुक कर चलो, नीचे देखकर चलो. सीना मत तानो. लोग समझेंगे कि तुम चीप हो. इस तरह की बातें फिल्मों में नहीं होतीं. आस पास सुनते हुए बड़े हुए हैं हम में से कई लोग. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)ऐसी खबर कोई नई नहीं है. कई बार पढ़ने को मिलती है. कि लड़की ने स्लीवलेस टॉप पहना था तो उसे घर भेज दिया. भारत में तो खैर स्कूलों में यूनिफॉर्म होती है. उसमें भी कॉन्वेंट स्कूलों में मोरल पुलिसिंग बहुत होती है. कई लड़कियों ने ऑडनारी को बताया. कि उन्हें स्कूलों में किस तरह ऐसा व्यवहार झेलना पड़ा.
दीक्षा एक रेजिडेंशियल स्कूल में थी. वहां पर लड़कियों को जींस पहनने की इजाज़त नहीं थी. हॉस्टल में भी नहीं. एक बार एक लड़की जींस पहन कर आ गई थी, तो उसे कपड़े बदलकर आने को कहा गया.
अमृता भी एक रेजिडेंशियल स्कूल में थी. जब वो आठवीं क्लास में पहुंची, तो स्कूल वालों ने लड़कियों से पैसे लिए. और सभी लड़कियों के लिए ब्रा मंगवाईं. आठवीं क्लास से लेकर बारहवीं क्लास की लड़कियों के लिए ब्रा कम्पलसरी कर दी गई. फीमेल पीटी टीचर पीठ पर हाथ मारकर चेक किया करती थीं कि किस-किसने पहन रखी है.
ये लड़कियां बड़ी हुई, बिना किसी से कुछ कहे. बिना शिकायत के. तो आज जब कोई लड़की हिम्मत करके इसके खिलाफ लिखती है, खड़ी होती है, तो अच्छा लगता है. लेकिन इससे साबित ये हो जाता है कि चाहे अपना देश हो या दुनिया में सबसे ज्यादा प्रोग्रेसिव होने का दावा करने वाला देश. औरतों के शरीर को कंट्रोल करने, उन्हें ढकने-छुपाने के तरीके भले लोकल हों, मानसिकता यूनिवर्सल है.
(पहचान छुपाने के लिए नाम और जगह बदल दिए गए हैं)
वीडियो: गोविंदा की भांजी आरती सिंह ने जो बताया, उसे सुनकर घर भावुक हो गया

