विकिपीडिया पेज डिलीट होने पर क्या बोले आनंद रंगनाथन?
दो और लेखकों के डिलीटेड पेज रीस्टोर हो गए, लेकिन आनंद रंगनाथन का पेज नहीं हुआ.
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आनंद रंगनाथन का विकिपीडिया ने पेज डिलीट कर दिया है.
विकिपीडिया. इंटरनेट पर थोड़ा बहुत भी पढ़ने-लिखने का शौक है तो इस्तेमाल भी जरूर किया होगा. दुनियाभर की जानकारी यहां मिलती है. इसके बिना आधे से अधिक कॉलेज स्टूडेंट्स के असाइनमेंट पूरे नहीं हो पाते, ऐसा मज़ाक करते हैं लोग. पञ्चमहाभूत से लेकर थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी तक, आम से लेकर खास तक, सबके बारे में यहां जानकारी मिलती है.
आज विकिपीडिया की बात क्यों?
दरअसल विकिपीडिया ने सावरकर पर किताब लिखने वाले विक्रम संपत, लेखक संजीव सान्याल औऱ लेखक आनंद रंगनाथन का पेज डिलीट कर दिया. हालांकि अभी विक्रम संपत और संजीव सान्याल का पेज फिर से रिस्टोर कर दिया गया है, लेकिन आनंद रंगनाथन का पेज अब भी डिलीट दिख रहा है. विकिपीडिया के इस कदम पर विक्रम संपत ने ट्वीट कर कहा,पहले संजीव सान्याल, फिर मैं, और अब आनंद रंगनाथन जिनके खिलाफ विकिपीडिया पर अभियान जारी है. जो लोग आपकी सदस्यता नहीं लेते उनके खिलाफ इतनी नफरत. आज हम "उदारवादियों" को कैसे परिभाषित करें? शर्म की बात है.
Anand Ranganathan नाम से विकिपीडिया पेज खोलने पर लिखा आ रहा है- सॉरी यह पेज हाल ही में डिलीट कर दिया गया है.First it was @sanjeevsanyal , then me against whom the campaign on Wikipedia is continuing on a daily basis & now @ARanganathan72 . The visceral hatred, cancel culture & slander for people who don't subscribe to ur status quo is how we define "liberals" today! Shame @Wikipedia ! https://t.co/Ti4CqxC48Y
— Dr. Vikram Sampath, FRHistS (@vikramsampath) November 11, 2021

मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता. सबको पता है कि मेरा खुद का पेज है. मुझे विकिपीडिया से फर्क नहीं पड़ता. उनका अपना प्रोपगेंडा है.कौन हैं आनंद रंगनाथन? आनंद रंगनाथन साइंटिस्ट हैं. उनकी खुद की वेबसाइट के मुताबिक, आनंद ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से केमेस्ट्री में बीएससी (ऑनर्स) की पढ़ाई की. इसके बाद Nehru Centenary Scholarship के जरिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी यूके चले गए. यहां उन्होंने नेचुरल साइंस में BA किया. इसके बाद MA और PhD की. कैम्ब्रिज में पोस्ट-डॉक्टरेट करने के बाद इंडिया वापस आ गए. उन्होंने इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी, दिल्ली में 16 साल तक अपनी लैब चलाई. आनंद रंगनाथन 2015 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन में एसोसिएट प्रोफेसर बने. उनकी प्रयोगशाला ने तपेदिक और मलेरिया पर विशेष जोर देने के साथ निर्देशित विकास और रोगजनन के क्षेत्र में काम किया. आनंद रंगनाथन 'स्वराज' के सलाहकार संपादक और स्तंभकार हैं. उन्होंने पहले न्यूज़लॉन्ड्री, डीएनए और द न्यूज़मिनट के लिए लिखा है. आनंद ने तीन किताबें भी लिखी हैं. ये सभी उपन्यास हैं.