तारीख थी 4 दिसंबर 1973. दिल्ली की उस सर्द शाम डॉक्टर नरेंद्र सिंह जैन चांदनी चौकस्थित अपनी क्लिनिक पर ताला लागते हैं और घर लौट जाते हैं. घर दिल्ली के पॉश इलाके,डिफेन्स कॉलोनी में था. घर पहुंचकर डॉक्टर जैन अपनी पत्नी विद्या से कहते हैं,“चलो, दीदी के यहां हो आते हैं”. उसी कॉलोनी में डॉक्टर जैन की बहन रहा करती थीं.डॉक्टर जैन और उनकी पत्नी घर से बाहर निकलते हैं. शाम के सवा सात बजे थे. अंधेरा होचुका था. दोनों कार की तरफ बढ़ते हैं. डॉक्टर जैन ड्राइविंग वाली साइड की तरफ सेबैठते हैं और उनकी पत्नी दूसरी तरफ से. लेकिन जैसे ही डॉक्टर जैन ड्राइविंग सीट परपहुंचते हैं, देखते हैं कि उनकी पत्नी वहां नहीं है. उन्हें बगल के नाले से कुछआवाज सुनाई देती है. वो गाड़ी से बाहर निकलकर नाले की तरफ बढ़ते हैं. नाले में उन्हेंएक धुंधली सी आकृति मुंह के बल लेटी हुई दिखाई देती है. देखिए वीडियो.