ये बात है 1960 के दशक की. मुम्बई जो तब बॉम्बे हुआ करता था. यहां मलाड गोरेगांवजोगेश्वरी के इलाके में अचानक एक के बाद एक हत्या की घटनाएं होने लगीं. तरीका लगभगएक सा था. रात में सोए हुए लोगों पर अचानक कोई तेज़ वार से हमला करता और उनकी हत्याकर देता. हत्या किए गए अधिकतर लोग गरीब और फुटपाथ पर सोने वाले थे. जब हत्या कीवारदातें कुछ ज्यादा ही बढ़ गई, पुलिस को हरकत में आना पड़ा. उस दौर में हत्यारे काखौफ इतना बढ़ गया था कि हर रात 2 हजार के आसपास पुलिस वाले रातों को गश्त लगाते.पुलिस ने कई लोगों को पकड़ा लेकिन सबूत के अभाव में सब छोड़ दिए गए.