साल 1978 की बात है. अमेरिका के एक शहर में 61 साल की एक बूढ़ी महिला की उसके ही घरमें हत्या कर दी गई. पुलिस ने खूब छानबीन की लेकिन कातिल को न पकड़ सके. साल 2008में इस केस की फ़ाइल दुबारा खोली गई. और इस बार कातिल पकड़ा गया. 36 साल बाद सॉल्वहोने वाले इस केस की कुंजी बने, वो उंगली के निशान, जो घटनास्थल से मिले थे. ये अकेला केस नहीं है. देश विदेश में हजारों ऐसे केस हैं जिनकी गुत्थी घटना के कईदशकों बाद सुलझ पाई, और इन सब को सुलझाने में मदद की, उंगली के निशान यानीफिंगरप्रिंट्स ने. उंगली में स्याही डुबाने से शुरू हुई तकनीक आज डिजिटल पहचान कामुख्य जरिया बन चुकी है. कमाल की बात ये है कि उंगली के निशान की पहचान के तौर परशुरुआत, यहीं भारत में हुई थी. कैसे हुई, किसने की? देखिए वीडियो.