साल 1986 की बात है. मोर्डेकाई वानुनु नाम का शख्स एक ब्रिटिश अखबार के ऑफिस मेंइंटर होता है. और दावा करता है कि उसके पास इजरायल के परमाणु कार्यक्रम से जुडीख़ुफ़िया जानकारी है. उसका कहना था कि वो बतौर टेक्नीशियन एक परमाणु फैसिलिटी में कामकर चुका था. और उसके पास इस बात को प्रूव करने के लिए साक्ष्य भी हैं. ये बड़ी खबरथी. क्योंकि इजरायल ने हमेशा अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में कोई खुलासाकरने से बचता आया था. न वो ये दावा करता कि उसने परमाणु हथियार बना लिए हैं, न कभीइस बात से इंकार करता. अखबार के हेड सोच रहे थे कि इस खबर को कैसे पेश किया जाए.संभव था कि ये कोई सिरफिरा व्यक्ति हो. इसलिए उसकी स्टोरी को वेरीफाई करना जरूरीथा. इस बीच तय हुआ कि मोर्डेकाई को एक सेफ लोकेशन में रखा जाए. क्योंकि अगर उसकीबात सच थी, तो उसकी जान को खतरा था. मोर्डेकाई को लन्दन के एक सीक्रेट ठिकाने मेंभेज दिया गया. और अखबार अपनी खोजबीन में लग गया. मोसाद ने इस ऑपरेशन में जिस तरीकेको अपनाया था, जासूसी की दुनिया में उसे हनी ट्रैप कहा जाता है. हनी यानी शहद औरट्रैप यानी जाल.जिस प्रकार शहद का लालच देकर कीड़ों और जानवरों को फंसाया जाता है, उसी प्रकार हनीट्रैप में सेक्स का आकर्षण लालच का कारण बनता है. साल 1986 में मोसाद ने इसकाइस्तेमाल अपने हित में किया. लेकिन इत्तेफाक से उसी साल हनी ट्रैप भारत की ख़ुफ़ियासंस्था, रॉ के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गया. रॉ के एक अफसर को हनी ट्रैप में फंसाकर भारत की ख़ुफ़िया जानकारी हासिल की गई. इस काम के पीछे थी अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसीCIA. कैसे हुआ था ये सब. रॉ का अफसर कैसे इस जाल में फंसा? और इस पूरे षड्यंत्र काखुलासा कैसे हुआ? देखिए वीडियो.