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तारीख: कहानी 'गोरखा' की जो न मौत से नहीं डरते, जिन्हें हिटलर अपनी फौज में चाहता था

ये सवाल अब भी बना हुआ है. खस ठकुरी, नेवार, गुरुंग, मागर, राय, लिम्बु, सुनवार, तमांग और कुछ छोटे समूह - ये मिलकर गोरखा पहचान का हिस्सा बनते हैं. ज्यादातर किताबों में, गोरखा शब्द का शुरुआती इस्तेमाल ‘गोरखनाथ’ के शार्ट फॉर्म के तौर पर मिलता है.

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15 सितंबर 2025 (पब्लिश्ड: 11:15 AM IST)
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