यह तो नई-नई दिल्ली है, दिल में इसे उतार लोएक बात कह दूं मलका, थोड़ी-सी लाज उधार लोबापू को मत छेड़ो, अपने पुरखों से उपहार लोजय ब्रिटेन की जय हो इस कलिकाल की!आओ रानी, हम ढोएंगे पालकी!रफ़ू करेंगे फटे-पुराने जाल की!यही हुई है राय जवाहरलाल की!ये शब्द थे बाबा नागार्जुन के. जो उन्होंने लिखे जब महारानी एलिज़ाबेथ पहली बार भारतदौरे पर आई. साल था 1961. जनवरी का महीना. दिल्ली में जिस रोज़ एलिज़ाबेथ का प्लेनउतरा, हवाई अड्डे से राष्ट्रपति भवन तक भीड़ उन्हें देखने के लिए लाइन लगाकर खड़ी थी.एलिज़ाबेथ के साथ उनके पति ड्यूक ऑफ एडिनब्रा प्रिंस फिलिप और प्रिंस एंड्र्यू भीभारत पहुंचे थे. तीनों ने इस दौरान उदयपुर, दिल्ली, आगरा, मुंबई, बेंगलुरु,अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता आदि तमाम जगह का दौरा किया. यूं तो इस दौरे को लेकर भारतमें काफी उत्साह था, लेकिन ये दौरा कई कॉन्ट्रोवर्सीज की वजह भी बना. हुआ यूं किएलिज़ाबेथ और ड्यूक उस साल भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे. लेकिनगणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शिकरत करने से पहले दोनों जयपुर गए. यहां जयपुर के राजासवाई मान सिंह ने उनका खूब सत्कार किया. महारानी को हाथी की सवारी कराई गयी. इसकेअगले रोज़ राजा मान सिंह ने एक शिकार का कार्यक्रम रखा. देखिए वीडियो.