साल 1978 की बात है. अदालत में एक मुकदमा चल रहा था. वहां आवाज गूंज रही थीं,‘मैं हिटलर की आत्मा हूं. मैं नीरो की आत्मा हूं, मैं शैतान की आत्मा हूं’ये आवाज एक टेप रिकॉर्डर से आ रही थी. एक लड़की की आवाज, जो पहले ही मर चुकी थी. अबबस फैसला होना बाकी था. फैसला इस बात का कि लड़की की मौत का दोषी कौन है. वोआत्माएं, जिनका वो दावा कर रही थी कि उसके अंदर हैं. या वे मां-बाप जो उसे तथाकथितनर्क में जाने से बचाना चाहते थे.