एक दौर था जब भारत की फुटबॉल टीम ओलिंपिक खेली थी. साल था 1948. लंदन मेंओलिम्पिक्स हो रहे थे. तब भारतीय टीम के खिलाड़ियों के पैरों से जूते गायब थे. इसकीतस्वीर दिखाकर कई लोग कहते हैं, भारत इतना गरीब था कि खिलाड़ी जूते भी अफोर्ड नहींकर सकते. बात आधी सच है. भारत गरीब था. लेकिन जूते न पहनने का कारण दूसरा है.भारतीय खिलाड़ी दशकों से बिना जूते खेलते आए थे. जूते पहनकर खेलने की आदत नहीं थी.इसलिए टीम के आठ खिलाड़ी बिना जूतों के खेले. जबकि 3 लोग जूते पहनकर. टीम के कप्तानतालीमेरेन एओ से जब इस बाबत पूछा गया. तो उन्होंने जवाब दिया- "हम इंडिया मेंफुटबॉल खेलते हैं. आपकी तरह बूटबॉल नहीं".बहरहाल ये एक दिलचस्प किस्सा था. लेकिन बात सिर्फ फुटबॉल टीम ही नहीं. 1940 के दशकमें भी भारत के 80% से ज्यादा लोग बिना चप्पल जूते के चलते थे. आज आपको सुनाएंगेकहानी उस कंपनी की जिसने भारतीयों को जूता पहनना सिखाया. देखिए पूरा वीडियो.