वाइब्रेंट गुजरात के 8वें एडिशन में एक लड़के ने सबका ध्यान खींचा. नाम है हर्षवर्धनजाला. 14 साल के हैं महोदय और इन्होंने गुजरात के साइंस और टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंटके साथ 5 करोड़ रुपये की डील साइन की है. ये लड़का डिपार्टमेंट के लिए ड्रोन डिजाइनकरेगा. इस ड्रोन की मदद से लैंड माइंस का पता लगाया जा सकेगा और उन्हें डीएक्टिवेटभी किया जा सकेगा. हर्षवर्धन अभी 10वीं के स्टूडेंट हैं.हर्षवर्धन जाला, फोटो- ट्विटरहर्षवर्धन ने जो ड्रोन बनाया है, उसमें मैकेनिकल शटर वाला 21 मेगापिक्सल का एककैमरा लगा हुआ है. इसमें इन्फ्रारेड, आरजीबी सेंसर और थर्मल मीटर लगा है. ये ज़मीनसे दो फीट ऊपर उड़ेगा और आठ स्क्वायर मीटर में रेडिएशन भेज सकेगा. ये ड्रोनलैंडमाइंस को डीएक्टिवेट करने के लिए 50 ग्राम का बम भी अपने साथ ढो सकता है. इसप्रोजेक्ट पर हर्षवर्धन ने 2016 में काम शुरू किया था.कम उम्र में इस तरह का इनोवेशन करने वाले हर्षवर्धन अकेले नहीं हैं. टैलेंट भरा पड़ाहै इंडिया में. कुछ और होनहारों के बारे में बताए देते हैं आपको.तेनिथ आदित्यतेनिथ आदित्य16 साल के तेनिथ ने 14 साल की उम्र में एक एक्सटेंशन बोर्ड बनाया था. नए तरीके का.तेनिथ का दो बार वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए नाम जा चुका है. उन्हें दो नेशनल अवार्ड्स,7 अवार्ड, 5 स्टेट अवॉर्ड और कई डिस्ट्रिक्ट अवॉर्ड भी मिले हैं. इसके अलावा नेशनलइनोवेशन फाउंडेशन इंडिया की तरफ से दिया जाने वाला IGNITE अवॉर्ड भी उन्हें मिलाहै.तेनिथ आदित्य का बनाया एक्सटेंशन बोर्डतेनिथ कहते हैं, ''मैं समस्याओं के साथ नहीं रहना चाहता.'' तेनिथ के नाम अब तक 17छोटी-बड़ी खोजें हैं. तेनिथ को सिक्के इकट्ठे करने का शौक है, सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं,वीडियो गेम खेलने और पढ़ाने का भी शौक है. 35 कंप्यूटर एप्लीकेशन और 6 भाषाओं परउनकी कमांड है. तेनिथ लियोनार्डो दा विंसी को अपना आइडियल मानते हैं. तेनिथ कहतेहैं कि लियोनार्डो को पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि मैं ना सिर्फ साइंटिस्ट बनूंगाबल्कि नई खोजें भी करूंगा, जिससे लोगों की लाइफ बेहतर बन सके.अर्श शाह दिलबागीअर्श शाह दिलबागीअर्श की उम्र 18 साल है. जिन लोगों को बोलने में दिक्कत है उनके लिए अर्श ने'TALKing' डिवाइस बनाया है. ये डिवाइस दुनिया में अकेला ऐसा है जो बातचीत के लिएसांस का इस्तेमाल करता है. अर्श को रोबो के नाम से भी जाना जाता है. फिलहाल यूएस कीप्रिन्सटन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहे हैं. उनके TALKing डिवाइस कोकैलिफ़ोर्निया में गूगल साइंस फेयर 2014 में वोटर्स चॉइस अवॉर्ड मिला था. इसके अलावाउन्हें इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर 2015 में भी चार अवॉर्ड मिले.अर्श का बनाया TALKing डिवाइस.अप्रैल 2015 में दिलबागी को इंडिया के STEM फाउंडेशन का ब्रांड अम्बेसडर बनाया गया.ये फाउंडेशन रोबोटिक्स से एजुकेशन को प्रमोट करता है और वर्ल्ड रोबोट ओलंपियाड जैसेकम्पटीशन करवाता है. अगस्त 2015 में दिलबागी ने एक घरेलू रोबोट डॉग बनाया जिसे वोCLUMSY कहते हैं. इसे प्रेसिडेंट हाउस के म्यूजियम में रखा गया है. इसकी प्रदर्शनीको 'A Day in the Life of a Robot Dog-CLUMSY' कहा जाता है. हर हफ्ते हजारों लोगइसे देखने आते हैं. प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने ये म्यूजियम 5 अगस्त 2015 को शुरूकिया था.अंगद दरयानीअंगद दरयानीइस समय 18 साल के हैं. खुद को सिर्फ 'मेकर' कहते हैं. अंगद को मार्केट में मौजूदकटिंग एज टूल से डिवाइस डेवलप करना अच्छा लगता है. इस समय मेसाचुएट्स यूनिवर्सिटीसे इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग और मैथ्स की पढ़ाई कर रहे हैं. अंगद MITMedia Lab, IIT और इनोवेटर्स क्लब ऑफ़ इंडिया के साथ काम कर चुके हैं. उनकी खोजोंमें मोबाइल इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, वर्चुअल ब्रेल 3D प्रिंटर, सोलर पॉवर वाली बोट,ऑडियो सेंसिटिव LED डिस्प्ले शामिल हैं.सुशांत पटनायकप्रणब मुखर्जी के साथ सुशांत.23 साल के सुशांत पटनायक के नाम 39 पेटेंट हैं. इसमें पहली एक व्हीलचेयर है जिसे एकविकलांग आदमी अपनी सांसों से चला सकता है. दूसरी, एक कारों के लिए एंटीथेफ़्ट मशीनजिसे मोबाइल से ऑपरेट किया जा सकता है. इसे घर के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.ये भी बाकियों की तरह हाईस्कूल से ही कई सारे अवॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं.भुवनेश्वर के हैं और इनके पिता एक डॉक्टर हैं. उन्हें MIT के इन्वेन्टर लिस्ट मेंरखा गया था. 20 साल की उम्र में उन्होंने सातवां नेशनल ग्रासरूट्स इनोवेशन अवॉर्डजीता था.रेम्या जोजरेम्या जोजकेरल की रेम्या ने वाशिंग मशीन के साथ एक्सरसाइज मशीन जोड़ दी. इसके लिए इन्हेंनेशनल अवार्ड मिला है. उन्होंने 14 साल की उम्र में इसे बनाया था.इन सबके अलावा प्रणव मिस्त्री, अजित नारायण, अलेफिया मर्चेंट जैसे यंग इनोवेटर हैंजिन्हें बहुत कम उम्र में अपनी अलहदा सोच की वजह से पहचान मिली. इस तरह की नईजनरेशन हो तो कोई भी देश साइंस-टेक की फील्ड में अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है, बसइन सारे टैलेंट का सही से इस्तेमाल किया जाए. उन्हें पहचाना जाए ताकि वो गुमनामीमें ना खो जाएं या 'ब्रेन ड्रेन' के शिकार ना हो पाएं.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें-इंडियन आइडल विनर, जो आज ही इस दुनिया से चला गया थाहिंदी साहित्य में झुग्गी-बस्तियों के किशोरों की 'घुसपैठ': स्वागत हैइन बच्चों की शक्ल गंदी है, ये हमारे रेस्टोरेंट में नहीं घुस सकते!