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योगी आदित्यनाथ की परेशानी देखकर कोई भी सीएम किसानों का कर्ज माफ नहीं करेगा!

योगी आदित्यनाथ ने किसानों का 36 हजार करोड़ रु. का कर्ज माफ किया, लेकिन अब वो समस्या में हैं.

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11 जून 2017 (Updated: 11 जून 2017, 15:10 IST)
Updated: 11 जून 2017 15:10 IST
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# यूपी सरकार ने किया था 1 लाख तक के लोन माफी की घोषणा

# इसके लिए ज़रूरत होगी लगभग 36000 करोड़ रुपयों की

# केंद्र सरकार ने सहायता करने से कर दिया मना

# बेकार के खर्चों में कटौती की होगी कोशिश



मध्य प्रदेश में हो रहे किसान आंदोलन और उससे भड़की हिंसा ने योगी सरकार को भी परेशान कर दिया है. इसी के मद्देनज़र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में किसी भी हिंसक स्थिति से बचने के लिए ज़रूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.

अप्रैल महीने मे योगी सरकार ने किसानों के 1 लाख तक का क्रॉप लोन को माफ करने की घोषणा की. ये मूल रूप से छोटे किसान हैं. अनुमान के अनुसार इन किसानों की संख्या लगभग 86 लाख होगी. लोन माफी के लिए यूपी सरकार को लगभग 36000 करोड़ रुपयों की ज़रूरत पड़ेगी.
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मध्य प्रदेश पुलिस किसानों को नियंत्रित करते हुए

लेकिन यह वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया. सरकार की सबसे बड़ी समस्या इस बात की है कि लोन माफी के लिए पैसे कहां से आयेंगे. क्योंकि केन्द्र सरकार ने भी इस मामले में यूपी सरकार को मदद देने से मना कर दिया है. हालांकि, इस रकम की व्यवस्था करने के लिए योगी सरकार ने किसान राहत बॉण्ड निकालने का भी निर्णय लिया था.


लेकिन जब तक पैसे की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक सरकार ने कुछ ऐहतियाती कदम उठाए हैं. एमपी में हुई हिंसा के दो दिन बाद ही योगी ने राज्य के बड़े फाइनेंस और एग्रीकल्चरल अधिकारियों की मीटिंग ली. इस मीटिंग में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वो सीनियर बैंक कर्मियों की मीटिंग लें और उनसे कहें कि जब तक बजट पास नहीं हो जाता, तब तक किसानों को नोटिस जारी न किया जाये. ज़िलाधिकारियों को इस बात की ज़िम्मेदारी दी गई है कि मुख्यमंत्री के आदेशों को पालन कराएं.

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वित्तमंत्री, चीफ सेक्रेटरी, चीफ फाइनेंस सेक्रेटरी और प्रिसिंपल एग्रीकल्चर सेक्रेटरी की मीटिंग में सीएम ने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि 2017-18 के बजट पास होने के तुरंत बाद 86 लाख किसानों को लोन माफी के सर्टिफिकेट मिल जाएं.'
मुख्यमंत्री योगी ने किसानों से भी अपील की कि वो तब तक अपना केवाईसी पूरा कर लें. ये एक तरह का वेरीफिकेशन होता है जो बैंक अपने ग्राहकों का करते हैं. तब तक राज्य के फाइनेंस एक्सपर्ट्स को ज़िम्मेदारी दी गई है कि वो राज्य के लिए 36000 करोड़ रुपये जुटाने का इंतज़ाम करें.

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सरकार की मंशा है कि बेकार के खर्चों को कम करके पैसे की व्यवस्था की जाए. सरकार लगातार लोन वेवर के तरीकों पर भी विचार कर रही है. हालांकि, जब से केंद्र सरकार ने इस मामले में यूपी सरकार की मदद करने से मना किया है, तब से विपक्षी पार्टियां लगातार इसको मुद्दा बनाए हुए हैं. उनके मुताबिक योगी सरकार की मंशा लोन माफ करने की नहीं है.

क्रेडिटः डेली ओ



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