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पहलवानों और बृजभूषण सिंह के बीच चल रहा विवाद भारतीय पहलवानी को कितना नुकसान पहुंचाएगा?

दुनिया भर में हिंदुस्तान का नाम ऊंचा करने वाले ये पहलवान धरने पर क्यों बैठे हैं?

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24 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 24 अप्रैल 2023, 10:55 PM IST)
wrestler protest
धरने पर बैठी साक्षी मलिक को संभालती हुई कांग्रेस नेता (बाएं) और पत्रकारों से बात करती हुईं विनेश फोगाट (दाएं) (फोटो: PIT से साभार है)
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगे की शान बढ़ाने वाले पहलवान. पर अब ये पहलवान देश की राजधानी दिल्ली में धरने पर बैठे हैं. 3 महीने पहले 19 जनवरी के लल्लनटॉप शो की शुरुआत भी हमने ऐसे ही की थी. आज फिर से कर रहे हैं. क्यों? क्योंकि पहलवान कह रहे हैं कि उन्हें दिया गया आश्वासन पूरा नहीं किया गया है. और इस बार वो तब तक नहीं हिलेंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा.

दुनिया भर में हिंदुस्तान का नाम ऊंचा करने वाले ये पहलवान धरने पर क्यों बैठे हैं? ये समझने के लिए हमें चलना होगा तीन महीने पीछे. 18 जनवरी 2023 को जंतर-मंतर पर विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक समेत कई दिग्गज पहलवान इकट्ठा हुए. प्रेस कॉन्फ्रेंस की और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और कुश्ती संघ के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए थे. सबसे बड़ा आरोप था यौन शोषण का. विनेश ने रोते हुए आरोप लगाया था कि महिला पहलवानों का यौन शोषण किया जाता है. पहलवानों ने कहा था कि वे प्रधानमंत्री को सबूत भी देने के लिए तैयार हैं.

> दूसरा आरोप था कि 'अध्यक्ष जी' यानी ब्रजभूषण शरण सिंह की तानाशाही के आगे पहलवानों को अपमानित होना पड़ता है. पहलवानों ने आरोप लगाया था कि वे दुनिया में भारत का नाम रोशन करके आते हैं. लेकिन फेडरेशन के अध्यक्ष उन्हें गाली देते हैं और अपशब्दों का प्रयोग करते हैं. खिलाड़ियों को थप्पड़ मारने तक के आरोप लगे थे.

> तीसरा आरोप था मेंटली टॉर्चर करने का. विनेश और बजरंग ने आरोप लगाया था कि कुश्ती फेडरेशन की ओर से उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया. विनेश फोगाट ने यहां तक कहा था कि वे सुसाइड करने के बारे में सोच रही थीं. पहलवानों ने ब्रजभूषण पर निजी जीवन में दख़ल देने की बात कही थी.

आरोपों पर बृजभूषण की सफ़ाई आई. आरोपों को झूठा बताते हुए उन्होंने कहा था कि अगर आरोप साबित हो जाएं, तो उन्हें फांसी दे दी जाए. साथ ही उन्होंने कुछ सवाल भी उठाए. कहा कि अगर उन पर लगे आरोपों में दम है, तो FIR क्यों नहीं की गई? इसके अलावा उन्होंने कई उदाहरण देकर ये भी साबित करने की कोशिश की कि उन्होंने पहलवानों को कितना सपोर्ट किया. बृजभूषण ने ये भी कहा कि ये उनके खिलाफ कोई बड़ा उद्योगपति साज़िश कर रहा है.  

इसके साथ ही यूपी और केरल के कुछ पहलवान ब्रजभूषण के समर्थन में भी आए. उन्होंने धरने पर बैठे पहलवानों को आरोपों को खारिज किया. आगे बढ़ने से पहले एक बार बृजभूषण शरण सिंह के बारे में भी जान लेते हैं. बृजभूषण शरण सिंह 1988 में बीजेपी से जुड़े. 1991 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में बृजभूषण का नाम लाल कृष्ण आडवाणी समेत उन 40 लोगों में शामिल था, जिनपर ढांचे को गिराने के आरोप लगे थे. हालांकि, बाद में कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था.

साल 1999 और 2004 में भी बृज भूषण लगातार दो बार BJP के टिकट से सांसद चुने गए. लेकिन 2008 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और 2009 में सपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से लोकसभा पहुंचे. 2014 में फिर से बीजेपी में वापसी हुई. 2014 और 2019 में कैसरगंज सीट से बीजेपी के टिकट पर सांसद चुने गए. यानी कुल जमा 6 बार के सांसद हैं. और लगातार तीन बार कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भी रहे हैं. पहली बार 2011 में बने थे और फिर उसके बाद से लगातार बने हुए हैं. ब्रजभूषण शरण सिंह से वापस पहलवानों के धरने की ओर चलते हैं.

लेकिन देश की राजधानी में कुश्ती की सबसे बड़ी हस्तियां धरने पर बैठीं तो हंगामा मच गया. बृजभूषण शरण सिंह कुश्ती संघ का अध्यक्ष होने के साथ-साथ बीजेपी के सांसद भी हैं. तो मामला राजनीतिक भी हो गया. विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर हमला बोल दिया. जिसके बाद खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने धरने पर बैठे पहलवानों के साथ मुलाकात की थी. मंत्रालय ने आरोपों की जांच के लिए एक 'निरीक्षण समिति' के गठन का एलान किया. आरोपों की जांच के लिए भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने एक कमेटी बनाई. कमेटी की मुखिया थीं ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम. मैरी के अलावा पहलवान योगेश्वर दत्त, शटलर तृप्ति मुर्गुंडे, SAI सदस्य राधिका श्रीमन, लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना के पूर्व CEO राजेश राजगोपालन और CWG स्वर्ण पदक विजेता बबीता इस निगरानी समिति के सदस्य थे.

कमेटी ने जांच शुरू की. इसी बीच इस पूरे मसले में बड़ा दिन आया, 5 फरवरी. एक प्राइवेट टीवी चैनल ने इस मसले के तूल पकड़ने के बाद छह प्रदर्शनकारी पहलवानों का स्टिंग ऑपरेशन किया था. 6 पहलवानों में से निशा दहिया और सोनम मलिक ने कथित तौर पर WFI अध्यक्ष के ख़िलाफ़ लग रहे आरोपों से इंकार कर दिया था. दोनों का कहना था कि उन्हें प्रताड़ित नहीं किया गया है. निशा ने तो बृजभूषण सिंह की तारीफ़ भी कर दी थी. निशा और सोनम, दोनों ही जनवरी वाले प्रदर्शन में मौजूद थे. इसके बाद पूरे प्रदर्शन और प्रदर्शकारियों पर सवाल उठाए. जांच कमेटी की जांच खत्म हुई अप्रैल में. रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी गई. जिसके बाद फिर से शुरू हुआ धरना. क्यों?

पहलवानों ने आरोप लगाया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट, मंत्रालय को सौंप दी गई और हमें इसके बारे में बताया नहीं गया. साथ ही इस पर सवाल भी उठाए. बजरंग पूनिया ने कहा कि उन्होंने एक आर्टिकल में पढ़ा कि समिति के सदस्यों में से एक के दस्तख़त के बिना ही रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी गई है. पूनिया ने पूछा, 

'अगर समिति का कोई सदस्य रिपोर्ट जमा करने में ही शामिल नहीं है और रिपोर्ट से असहमत है, तो हम उस पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? हमें तो ये तक नहीं बताया गया कि रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी गई है.'

पहलवान धरने पर लौटे तो उनसे FIR को लेकर भी सवाल हुए. पूछा गया कि पहलवान केवल आरोप लगा रहे हैं. अगर आरोप सही हैं तो कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की? FIR क्यों नहीं कराई?

पहलवानों का कहना है कि यौन शोषण की 7 शिकायतें दिल्ली पुलिस को दी गई हैं. इसमें से एक शिकायत नाबालिग महिला पहलवान की भी है. लेकिन इस पर FIR नहीं हो रही. आज पहलवान धरने पर बैठे तो दिल्ली पुलिस भी हरकत में आई. दिल्ली पुलिस ने खेल मंत्रालय द्वारा गठित जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अब तक सात शिकायतें मिली हैं और उन सभी की जांच की जा रही है. पुख्ता सबूत सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी.

यानी दिल्ली पुलिस जांच के बाद FIR दर्ज करने की बात कह रही है. लेकिन पहलवान केवल दिल्ली पुलिस के भरोसे नहीं है. पहलवानों ने आज सुप्रीम कोर्ट का रूख किया. नाबालिग पीड़िता सहित बाक़ी महिलाओं ने अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका दायर की है. याचिका में आरोप हैं कि बृजभूषण के ख़िलाफ़ POCSO जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद भी उनके ख़िलाफ़ FIR नहीं दर्ज की जा रही है. आज सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील नरेंद्र हुड्डा ने केस का अन-लिस्टेड तौर पर ही उल्लेख किया. यानी मामला आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं था. नरेंद्र हुड्डा ने कोर्ट से कहा कि लड़कियां धरने पर बैठी हैं और इस कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही हैं. CJI चंद्रचूड़ ने मामले की सुनवाई को कल लिस्ट करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट के अलावा पहलवानों ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से भी बात की है. रेखा ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वो पुलिस अधिकारियों से बात करेंगी और देखेंगी कि प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई है.

ये तो हो गई आज पहलवानों के प्रदर्शन की पूरी अपडेट. अब चलते हैं उन सवालों की ओर जिनके जवाब मिलने बाकी हैं. ब्रजभूषण शरण सिंह के खेमे का कहना है कि ये सबकुछ उन्हें हटाने के लिए किया जा रहा है. पूरी तरह से राजनीति है. हरियाणा और उत्तर प्रदेश की लड़ाई है. सारी लॉबीइंग ही इसी की वजह से हो रही है. ताकि बृजभूषण शरण सिंह को हटाकर हरियाणा के खेमे से किसी को कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनाया जाए. ये सवाल पिछली बार भी काफी जोर-शोर से उठा था.

पूरे मसले पर कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया क्या है, ये जानने के लिए हमने उनसे संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया. ये तो रही दोनों पक्षों की बात. अब एक नज़र जांच कमेटी पर. जांच कमेटी के सदस्य और पहलवान योगेश्वर दत्त ने कहा है कि कमेटी के पास किसी को दोषी या निर्दोष करार देने का अधिकार नहीं है. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को दे दी है.

हमने आपको पहले भी बताया कि बृजभूषण शरण सिंह पर ये आरोप लगे हैं कि जब से वो अध्यक्ष बने हैं, ट्रेनिंग कैंप लखनऊ में ही लगते हैं. असल में इस पूरे मसले में क्षेत्रीय राजनीति ने भी अपना दखल बना लिया है. कुश्ती में एक समय तक हरियाणा से बहुत सारे सितारे उभरे. अब भी हैं. तो कहा गया कि ये हरियाणा वालों की लॉबीइंग है. बृजभूषण सिंह के ऊपर अब ये आरोप लग रहे हैं कि वो इस प्रभाव को उत्तर प्रदेश की तरफ़ खिसकाना चाह रहे हैं. माने यहां हरियाणा बनाम उत्तर प्रदेश चलने के आरोप लग रहे हैं.

विनेश फोगाट हों, साक्षी मलिक हों, बजरंग पुनिया या रवि दहिया. ये चार और इनके जैसे सैकड़ों पहलवानों को ट्रेनिंग करके दूसरे देशों के पहलवानों से जीतना था. देश के लिए और मेडल जीतने थे. नए पहलवान तैयार करने थे. लेकिन महीनों से वो अपनी ही फेडरेशन और सरकार से कुश्ती लड़ रहे हैं. जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. और, बात सिर्फ़ रेसलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के प्रशासकीय मामलों की ही नहीं है, इस मसले में यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के आरोप हैं. पुलिस के FIR न दर्ज करने के आरोप हैं. आवाज़ उठाने पर धमकी दिए जाने के आरोप हैं.

देश के नामी खिलाड़ी अगर खेलने की जगह, प्रदर्शन को मजबूर हो जाएं तो ये सामूहिक चिंता की ज़रूरत है. इस मसले का जल्द से जल्द निपटारा किया ही जाना चाहिए. ताकि आरोप साबित होने पर दोषियों को उचित सज़ा दी जा सके. ताकि ये खिलाड़ी यहां से निकलकर हमारे लिए और पदक जीत सकें. 

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: पहलवान और बृजभूषण सिंह का विवाद भारतीय पहलवानी को कितना नुकसान पहुंचाएगा?

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