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बच्चा पैदा करना मेरा फर्ज नहीं, गिराना मेरा हक होना चाहिए

अबॉर्शन करवाने किसी औरत को कोर्ट क्यों जाना पड़ता है?

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26 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 26 जुलाई 2016, 08:53 AM IST)
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एक खबर कई दिनों से सुनने में आ रही थी. कि 24 हफ्तों की प्रेगनेंट एक औरत बच्चा गिराने की इजाजत चाहती है. लेकिन कानून के हिसाब से 20 हफ्ते से ज्यादा वक्त का गर्भ गिराना गुनाह है. इसलिए कोई भी अस्पताल उसका अबॉर्शन करने को तैयार नहीं था.
उस औरत का भ्रूण नॉर्मल नहीं था. उसके शरीर में दिमाग नहीं था. और बच्चे के शरीर का एक हिस्सा गर्भनाल के अंदर बढ़ गया था. इस बच्चे को अगर पैदा किया जाता, तो मां और बच्चे दोनों ही मर सकते थे.
जांच हुई, और कोर्ट ने अबॉर्शन की इजाजत दे दी.
ये तथ्य हैं. जो हमने अखबारों में पढ़े. न्यूज़ वेबसाइट पर पढ़े. कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि अखबारों के लिए तथ्य बनाने वाले लोग असल में इंसान होते हैं. इन तथ्यों के पीछे भी एक औरत है.
कोई भी यूं ही कोर्ट नहीं चला जाता. उसके पहले हजार बार हाथ-पैर मारता है. सोर्स-सिफारिश से लेकर घूस खिलाने तक चला जाता है. इसलिए कि दिमागी प्रेशर न झेलना पड़े. और प्रेगनेंसी जैसे केस में लोग तो यहां तक सोचते हैं कि पड़ोसियों तक को न पता चले. मीडिया तो दूर की बात है. जब एक प्रेगनेंट औरत कोर्ट में पहुंचती है, इस बात का अंदाजा लगाना हमारे लिए मुश्किल है कि इसके पहले वो किस तरह के मेंटल ट्रॉमा से गुजर चुकी है.
अखबार इस औरत का नाम 'मिस एक्स' लिखते रहे. क्योंकि औरत ने कहा वो अपना नाम नहीं बताना चाहती. क्योंकि जो गर्भ वो ख़त्म करना चाहती है, वो रेप का नतीजा है. जो बच्चा उसके पेट में है, उसे उसने अपनी ख़ुशी से नहीं चाहा था. बदनामी के डर से औरत ने अपना नाम किसी को नहीं बताया.
औरत का आरोप था कि जिस आदमी से उसकी सगाई हुई, उसने उसका रेप किया. रेप से वो प्रेगनेंट हो गई. कानून ये कहता है कि एक डॉक्टर की इजाजत से सिर्फ 12 हफ्ते की प्रेगनेंसी अबॉर्ट कर सकते हैं. और अगर दो डॉक्टरों की इजाजत लें, तो 20 हफ्ते तक की प्रेगनेंसी ख़त्म की जा सकती है. इस औरत ने 24 हफ्ते की प्रेगनेंसी को ख़त्म करना चाहा. और ये जानते हुए भी कि ये बच्चा उसकी जान ले सकता है, डॉक्टरों ने मना कर दिया. पर हम ये कह सकते हैं कि डॉक्टर कानूनी तौर पर मजबूर थे.
ये औरत महज प्रेगनेंसी और जान के खतरे से ही नहीं, रेप के मेंटल ट्रॉमा से भी जूझ रही थी. जिसके मंगेतर ने बिना उसकी मर्जी के, ताकत और हिंसा के बल पर जबरन उसको ये बच्चा दिया. हम कह नहीं सकते कि ये रेप एक बार हुआ या कई बार. हम नहीं जानते उस लड़की को कितना दर्द हुआ. वो कितनी रातें नहीं सोई. और सगाई टूटने के बाद उसने किस तरह की बदनामी झेली. शादी के पहले प्रेगनेंट होने के बाद किस तरह के ताने सुने. उसके कितने रिश्तेदारों ने उस पर ज़हर उगला. कितने दोस्तों ने उसका साथ छोड़ दिया.
वो कहती थी कि अगर ये एबॉर्शन नहीं हुआ, वो अपनी जान दे देगी. अगर ये फैसला सही समय पर नहीं आता, वो शायद मर जाती.
प्रेगनेंसी को हम बहुत बड़ी चीज मानते हैं. मांओं को भगवान का दर्जा देते हैं. हम समझते हैं कि वो हमें दर्द झेलकर दुनिया में लाती है. दूध पिलाती है. पाल पोसकर हमें बड़ा करती है. इसलिए वो भगवान हुई. लेकिन यही प्रेगनेंसी अगर समाज के नियमों के मुताबिक़ न हो, तो लड़की का जीना मुश्किल कर देते हैं. अगर प्रेगनेंट लड़की कुंवारी है, तो उसके 'चरित्र' को बुरा कहा जाता है. प्रेगनेंसी औरत का ही अपराध बनती है, भले ही उसका गुनहगार उसका रेपिस्ट हो.
जो बच्चा औरत अपने गर्भ में रखती है, वो अकेले ही रखती है. जो बीमारियां उसे प्रेगनेंसी से दौरान होती है, वो भी वो अकेली ही झेलती है. लेबर पेन भी अकेली ही झेलती है. बच्चा भी अकेली ही पैदा करती है. फिर उसकी प्रेगनेंसी को ख़त्म करने का अधिकार समाज और कोर्ट को क्यों दिया जाता है? जो बच्चा उसका ही खून-पानी लेकर बड़ा होता है, उसको दुनिया में लाने का फैसला गैरों पर कैसे निर्भर रहता है. और जिस बच्चे को वो पैदा करना चाहती ही नहीं, उसे कोई जबरन कैसे पैदा करवा सकता है?
अगर किसी मरीज को जानलेवा कैंसर हो, तो क्या वो इलाज के लिए कोर्ट से इजाजत लेने जाएगा? और अगर इजाजत लेने के पहले वो मर गया, तो क्या हम इसे इंस्टिट्यूशनल मर्डर नहीं कहेंगे? फिर भ्रूण के अंदर बढ़ती मौत के इलाज में इतना वक़्त क्यों?
औरतों को अपनी प्रेगनेंसी ख़त्म करने के लिए किसी की इजाजत नहीं होनी चाहिए. बच्चा पैदा करना उनका अपना फैसला है. ये उसका फ़र्ज़ नहीं है. 20 हफ्ते हों, या 25. क्योंकि प्रेगनेंसी का कारण कुछ भी हो सकता है. कॉन्ट्रासेप्टिव का काम न करना. या और भी बुरा, जैसे रेप. इतना ही नहीं, अपनी मर्ज़ी से हुई प्रेगनेंसी के बाद भी कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं.
बात इतनी बड़ी नहीं. अगर आप प्रेगनेंसी से जुड़े मॉरल्स त्याग दें. ये भूल जाएं कि मां बनना भगवान बनने जैसा है. और मां न बनना पाप जैसा है. जिस दिन ऐसा हो गया, अबॉर्शन से जुड़े सवाल हमें इतने बड़े नहीं लगेंगे.

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