The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Woman throws ink at Arvind Kejriwal but it is not mild protest mate

मत फेंकिए क्योंकि स्याही कालिख नहीं होती

अपनी बात कहनी है? कहिए न. वो जो स्याही फेंक दी उसी को कलम में भरिए, और लिखिए.

Advertisement
pic
17 जनवरी 2016 (अपडेटेड: 17 जनवरी 2016, 03:30 AM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
कहते हैं इराक वालों ने कलम कोई 5 हजार साल पहले बना ली थी. मगरिब का खलीफा था, मोहम्मद अल मुइज उसने सन 973 में एक कमाल की चीज बनाई. हम फिलहाल उसे फाउन्टेन पेन बुला लेते हैं. एक जर्मन ने सैकड़ों सालों बाद उस फाउन्टेन पेन में निब लगा दी. ये जो कलम थी वो यूं ही तो चल न जाती. उसमें कुछ डालना भी था. क्या डालते? इसका जवाब छुपा है हर्षवर्धन के राज में. सन 600 के करीब. 'हर्षचरित' और 'कादम्बरी' वाले बाणभट्ट जब तक संस्कृत में कुछ कबार पाते. तब तक एक बड़ा नाम मार्केट में आ गया था, सुबंधु का. उन सुबंधु ने 'वासदत्ता' में एक भली सी चीज का जिक्र किया, वो थी स्याही. वही स्याही जो आज केजरीवाल पर फेंकी गई. पुराणों के हिसाब से चलें तो तीन हजार और नौ सौ साल पहले की बात सुनिए . किसी रोज भगवान कृष्ण के पैर के नीचे एक स्याही लगा पत्ता छुपा था. बर्बरीक का तीर उस स्याही लगे पत्ते को तलाशता भगवान कृष्ण का पैर चीर गया था. बर्बरीक अपनी शक्तियां न संभाल पाता. इसलिए उसका सिर मांग लिया गया. आप स्याही नहीं संभाल पाते आपसे क्या मांगे? स्याही होती है लिखने के लिए, लिखने को स्याही थी. कलम न मिली तो भगवान गणेश ने अपना दांत तोड़ कलम बना ली. उनने भी न सोचा होगा स्याही का ऐसा इस्तेमाल होगा. तो ये बताया कि स्याही कितनी पुरानी है. बस इसलिए ताकि ये पूछ सकें कि हम अब तक स्याही का सही इस्तेमाल क्यों नहीं सीख पाए हैं. स्याही लिखने को होती है. फेंकने के लिए नहीं. आपको समस्या क्या है? किससे है? नेताओं से? अपनी बात कहनी है? कहिए न. वो जो स्याही फेंक दी उसी को कलम में भरिए, लिखिए बात इस तरीके से भी पहुंचाई जा सकती है. इंक से इंकलाब आ सकता है दोस्त. ये क्या कि किसी पर जूता फेंक दिया, किसी पर स्याही मल दी, किसी को थप्पड़ मार दिया. हमें केजरीवाल के लिए बुरा नहीं लग रहा, हरगिज नहीं. ये वही केजरीवाल हैं जिनकी पार्टी ने चिदंबरम पर जूता फेंकने वाले को अपनी पार्टी का टिकिट दिया था. बूमरैंग जानते हैं न आप? हां, वही जो लौट कर आता है. स्याही फेंकना प्रतीक है कोई? आप चेताना चाहते हैं जैसे ये स्याही बही कल को खून भी बह सकता है. इस स्याही की जगह तेज़ाब हो सकता है. आप अगले के मर जाने की कामना कर रहे हैं, स्याही फेंककर? हमे बुरा स्याही के लिए लगता है. बुरा लगता है जब स्याही को कालिख बुलाया जाता है. स्याही कालिख नहीं होती. जो ये कहते हैं झूठ कहते हैं. ये विरोध का कौन सा तरीका हुआ? क्या स्याही कोई घृणित चीज है? बुरी है स्याही. जिसे फेंककर सामने वाले का अनिष्ट कर रहे हैं. बुरी है तो फिर हम अपनी कलमों से स्याही बहा दें, या मल दें किसी के चेहरे पर बीच चौराहे पर. क्योंकि आपको तो यही लगता है कि स्याही लिखने के लिए नहीं होती.

Advertisement

Advertisement

()