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डीज्जे बजाओ रे, टेनिस वाले जोकोविच उर्फ जुक्कू का बर्थडे है!

जोकोविच कतई भोले का भक्त मालूम पड़ै है. पक्का कांवड़िया.

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फोटो क्रेडिट: Reuters, नोवाक जोकोविच
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लल्लनटॉप
28 जून 2016 (अपडेटेड: 22 मई 2017, 06:44 AM IST)
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शिवकेश मिश्रा

ये आर्टिकल लिखा है शिवकेश मिश्र ने. इंडिया टुडे मैगजीन से जुड़े हैं. हम कई दिनों से इसरार कर रहे थे. नतीजा ये रहा. एक ऐसे दौर में जब ओबामा हनुमान भक्त ठहराए जा रहे हैं. प्रेस्ले को पांडे बताया जा रहा है. शिवकेश का जोकोविच को कांवड़ कराना स्वाभाविक ही लगता है. मगर याद रखें. हर सरल चीज फर्जी जटिलताओं पर तंज भी होती है.


 
लंदन की गलियों में डीज्जे बजने लगे हैं. साड्डा जोकोविच विंबलडन की कांवड़ लेने जो आया है. अच्छा-खासा छोरा कांवड़िया हो गया. और क्या जी! 27 जून से लंदन में शुरू हुए 2016 के विंबलडन में दुनिया के नंबर 1 टेनिस प्लेयर सर्बिया के नोवाक जोकोविच (29) अपने रैकेट को कंधे पर कांवड़ की मानिंद रखके नमूदार हुए हैं.
'किसने देखा?' किसी ने न देख्या, बस हमने देख्या. पांच मिन्ट वास्ते. अब खुस? भाई मेरे, ये दो हफ्ते और फिर सितंबर के पहले पखवाड़े में अमेरिकन ओपन तक का वक्फा उनके करिअर के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं. अभी नहीं तो कभी नहीं जैसे. पिछले एक साल में चारों ग्रैंड स्लैम तो वे जीत चुके हैं लेकिन एक कैलेंडर में चारों बड़े खिताब सिर पर सजाने का उनका ऐतिहासिक सफर अब शुरू हो रहा है. और उनका जलवा-जलाल कुछ इस तरह छाया हुआ है कि दुनिया के नंबर 2 खिलाड़ी एंडी मरे के ब्रिटेन का स्थानीय प्लेयर होने के बावजूद ज्यादातर टेनिस प्रेमी अपनी कल्पनाओं में जोकोविच को ही विंबलडन ट्रॉफी चूमता देख रहे हैं.
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अब ऐसे मोड़-मुकाम पर शिव-संकल्प के बिना कहां काम चलने वाला है. ‘हरक्यूलियन एफर्ट से नहीं?’ टिपिर-टिपिर टोकने वालों की आदत न जाएगी. कभी उन्हीं के मुल्क के गोरान इवानीसेविक 14-15 साल के अपने पूरे करिअर में 2001 के विंबलडन के रूप में सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम जीत पाए. तब उस बंदे के बहते पसीने में हरक्यूलियन एफर्ट नहीं दिखा था? टेनिस कोर्ट पर लोग उससे सहानुभूति रखते, उसके वास्ते चिल्लाते. पर वह बंदा शिव संकल्प न दिखा पाया, कांवड़ न उठा पाया. अरे!!! सन्नाटे, तेरा सत्यानाश हो, जहां देखो सांय सांय करने लगता है.
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पर अपना जुक्कू तो कंधे पर कांवड़ धरे हन हन हन हन लपका चला जा रहा है. ड्रा कुछ ऐसा है कि मरे से उसका मुकाबला फाइनल से पहले मुमकिन नहीं. मरे को तो वैसे भी पिछले फाइनल की स्मृतियां परेशान करेंगी ही. अपने पाले में एक और अड़चन जो हो सकती है. वह है, अपने वक्त के बादशाह और फिलहाल चौथे नंबर के खिलाड़ी, स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर, जो सेमी फाइनल में टकरा सकते हैं. लेकिन पिछले विंबलडन के फाइनल में जुक्कू से पिटते वक्त की उनकी देहभाषा देखी थी आपने? उसके बाद कहने को क्या बचता है?
तो अगले हफ्ते सेंटर वे सेंटर कोर्ट के लॉकर रूम में अपनी कांवड़ रखकर फाइनल खेलने उतरेंगे. ‘पहला दिन बीता नहीं अभी कि बंदा फाइनल में जा पहुंचा?’ अरे नादान इनसान, यहां जो चल रहा है, ये भी एक खेल ही तो है. थोड़ी देर तू भी हल्का हो ले. नईं नईं, कोई जोर-जबरदस्ती नहीं है.
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खैर, लॉकर रूम से कांवड़ निकालकर जुक्कू टेम्स से जल भरेगा और न्यूयॉर्केश्वर महादेव पर चढ़ाने के लिए निकल पड़ेगा. कोच बोरिस बेकर ‘बम भोले, बम भोले’ गाते, ताली बजाते उसके पीछे-पीछे चलेंगे. टेनिस प्रेमी जगह-जगह चंदा बटोरकर पंडाल लगाएंगे, डीज्जे बजेगा. जुक्कू को पूड़ी-हलवा और चांदनी चौक से ले जाए गए मसालों में बने छोले खिलाए जाएंगे...पतला-सा मुंह, तीज या चौथ के चंद्रमा का सा. यह बंदा गुट्ट-गुट्ट खाएगा.
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