19 जनवरी 2022 का दिन यूनाइटेड किंगडम (UK) की सरकार के लिए कतई अच्छा नहीं रहा.प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कारनामों पर चल रही बहस के दौरान एक ऐसा मोड़ आया, जबकहा गया, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर! अब बहुत हो गया, ईश्वर के लिए, इस्तीफ़ा देदीजिए. भरी संसद के भीतर ये मांग रखने वाले सांसद डेविड डेविस कंज़र्वेटिव पार्टीके हैं. बोरिस जॉनसन कंजर्वेटिव पार्टी के नेता की हैसियत से प्रधानमंत्री कीकुर्सी पर बैठे हैं. ऐसी क्या नौबत आई कि उनकी पार्टी के सांसद पाला बदलने लगे हैं?बोरिस जॉनसन पर क्या आरोप लग रहे हैं? और, अगर बोरिस जॉनसन ने इस्तीफ़ा दिया तोभारतीय मूल के कौन लोग उनकी जगह ले सकते हैं? सब विस्तार से बताएंगे. साल 1940.दूसरे विश्वयुद्ध का तापमान अपने चरम पर था. जर्मन तानाशाह एडोल्फ़ हिटलर की सेनाआगे बढ़ती जा रही थी. 07 मई को ब्रिटिश संसद में बहस शुरू हुई कि जर्मन सेना सेकैसे निपटा जाए. 09 मई को हिटलर ने नॉर्वे पर बड़े हमले का आदेश दिया. जवाब मेंब्रिटेन ने अपने सैनिकों को लड़ने के लिए भेजा. इसी वजह से मई 1940 की उस बहस को‘नॉर्वे डिबेट’ के नाम से जाना जाता है. जिस समय हाउस ऑफ़ कॉमंस में ये बहस चल रहीथी, उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नेविल चैम्बरलिन थे. वो भी कंज़र्वेटिव पार्टीके थे. बहस के दौरान उन्हीं की पार्टी के एक सांसद लियो आमरी फट पड़े. वो चैम्बरलिनकी नीतियों से बेहद नाराज़ चल रहे थे. उनका मानना था कि चैम्बरलिन के ग़लत फ़ैसलोंकी वजह से ही जर्मन सेना नॉर्वे तक पहुंचने में कामयाब हुई. आमरी ने कहा, आपके इसकुर्सी पर बैठे रहने से किसी का भला नहीं होने वाला. मैं कहूंगा कि आप कुर्सी छोड़दीजिए. ईश्वर के लिए, इस्तीफ़ा दे दीजिए. कहा जाता है कि लियो आमरी ने अंतिम कीपंक्ति अपने मन में ही बुदबुदाई थी. लेकिन भाषण के अगले ही दिन चैम्बरलिन ने अपनेपद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनके बाद विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने.उसके बाद का इतिहास तो आपको मालूम ही है. (उस बिंदु पर फिर कभी विस्तार से चर्चाकरेंगे.) 19 जनवरी को जब डेविड डेविस ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को इस्तीफ़ा देनेके लिए कहा, तब उन्होंने लियो आमरी को ही क़ोट किया था. डेविस की बात का जवाब देतेहुए जॉनसन ने कहा कि उन्हें इस क़ोटेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं है. हालांकि,उन्होंने विंस्टर चर्चिल पर लिखी अपनी किताब में लियो आमरी की डायरी का हवाला दियाहै. इस मामले में उनकी याद्दाश्त थोड़ी कमज़ोर दिखाई पड़ती है. जहां तक याद्दाश्तकी बात है, उन्हें ये बात भी याद नहीं रही कि कोविड लॉकडाउन के बीच उनके दफ़्तर मेंपार्टियां हुईं थी. फिर उन्होंने बताया कि वो ऐसी किसी पार्टी में थे ही नहीं. जबपार्टी की तस्वीरें बाहर आईं, तब जॉनसन ने बचाव में कहा कि हमको पता ही नहीं था किपार्टी है. फिर नए सबूत आए तो नया जवाब भी आया. बोरिस जॉनसन का ताज़ा बचाव ये है किउन्हें नियमों के बारे में किसी ने नहीं बताया. किसी ने ये नहीं कहा किप्रधानमंत्री दफ़्तर में लोगों को इकट्ठा करके शराब पीने से कोविड प्रोटोकॉल्स काउल्लंघन होता है. इसी को लेकर विपक्षी लेबर पार्टी के नेता किएर स्टामर नेप्रधानमंत्री को संसद में भरपूर ट्रोल किया. उन्होंने यहां तक कहा कि अगरकंजर्वेटिव सक्षम नहीं हैं तो उनकी पार्टी सरकार चलाने के लिए तैयार है. बोरिसजॉनसन ने इसके जवाब में अर्थव्यवस्था का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि मेरे फ़ैसलोंकी वजह से ही देश की अर्थव्यवस्था बची हुई है. मैं अपने स्टाफ़ के साथ हूं. जहां तकलॉकडाउन में हुई पार्टियों की बात है, उसका जवाब मैंने कमिटी को दे दिया है. सवालोंको टालने की उनकी कोशिशों का कोई खास असर होता दिख नहीं रहा है. 19 जनवरी को उनकीपार्टी के एक सांसद ने दल बदल लिया. जनता बोरिस जॉनसन से पद छोड़ने की मांग कर रहीहै. सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मुहिम शुरू कर दी है. ब्रिटिश अख़बारोंमें रोज़ाना प्रधानमंत्री की लानत-मलानत हो रही है. लेकिन बोरिस जॉनसन फिलहालइस्तीफ़ा देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. जानकारों का कहना है कि वो इतनी आसानीसे मैदान नहीं छोड़ेंगे. अब ये समझते हैं कि स्थिति यहां तक पहुंची कैसे? ब्रिटेनमें पहली बार मार्च 2020 में कोविड लॉकडाउन लगाया गया था. मई 2020 में हालात थोड़ेसामान्य होने लगे थे. तब सरकार ने नियमों में थोड़ी ढील देने का फ़ैसला लिया.हालांकि, तब भी बिना ज़रूरत के घर से निकलने पर रोक थी. इसके अलावा, आउटडोर में एकसे अधिक व्यक्ति से मिलने की इजाज़त नहीं थी. इन्हीं सरकारी नियमों के बीच मई मेंदो बड़ी पार्टियां हुईं. पहली 15 मई 2020 को. इसमें जमकर शराब पी गई. किसी भी तरहके कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. दूसरी पार्टी 20 मई 2020 को हुई. इसकेलिए एक सौ लोगों को ईमेल से इन्विटेशन भेजा गया था. मेल में कहा गया था कि अपने लिएशराब ख़ुद लेकर आएं. ये मेल बोरिस जॉनसन की तरफ़ से उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी नेभेजा था. इस पार्टी में 30 लोग आए थे. इनमें बोरिस जॉनसन अपनी पत्नी के साथ शामिलहुए थे. वे दोनों लगभग आधे घंटे तक वहां मौजूद रहे. इस पार्टी में मौजूदगी की बातबोरिस जॉनसन ने स्वीकार ली है. हालांकि, उन्होंने कहा कि वो एक वर्क इवेंट था.नवंबर 2020 में कोरोना केस फिर से बढ़ने लगे. सरकार ने फिर से लॉकडाउन लगाया. कहागया कि घर से काम करिए. बहुत ज़रूरी हो तभी घरों से बाहर निकलिए. घरों के भीतरलोगों के जमा होने पर पाबंदी लगा दी गई. इसी दौरान प्रधानमंत्री के घर में बड़ाजमावड़ा हुआ. इसमें पीएमओ के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. बोरिस जॉनसन ऐसे किसी भीजमावड़े से इनकार करते हैं. इसके बाद दिसंबर 2020 में भी डाउनिंग स्ट्रीट में कईपार्टियां हुई. एक पार्टी के दौरान तो इतनी शराब पी गई कि फ़र्श की कालीन बदलनीपड़ी. किसी में प्रधानमंत्री आए तो किसी में नहीं भी आए. हालांकि, उन्होंने कभी भीलॉकडाउन के बीच चल रही अय्याशी पर आपत्ति नहीं जताई. इस प्रकरण का सबसे बड़ा मोड़अप्रैल 2021 में आया. 12 अप्रैल को सरकार ने कुछ प्रतिबंधों के साथ पब औररेस्टोरेंट को खोलने की छूट दे दी. हालांकि, परिवार से इतर के लोगों से घर मेंमिलने की इजाज़त नहीं थी. आउटडोर मीटिंग्स के लिए छह लोगों की अधिकतम सीमानिर्धारित की गई थी. उस समय ब्रिटेन एक दूसरे शोक से जूझ रहा था.09 अप्रैल कोब्रिटेन की महारानी क़्वीन एलिजाबेथ के पति प्रिंस फ़िलिप की मौत हो गई. उनका अंतिमसंस्कार 17 अप्रैल को होना था. कोविड प्रोटोकॉल्स के कारण गिनती के लोगों को इसमेंजाने की परमिशन थी. जिस समय ब्रिटेन प्रिंस फ़िलिप को अलविदा कहने की तैयारी कर रहाथा, उससे एक रात पहले प्रधानमंत्री दफ़्तर में दो पार्टियां आयोजित हुईं. इन दोनोंपार्टियों में बोरिस जॉनसन मौजूद नहीं थे. लेकिन उनका दफ़्तर इस कृत्य में शामिलथा. इस पार्टी की जानकारी लीक होने के बाद जॉनसन ने सावर्जनिक रूप से महारानी सेमाफ़ी मांगी. इस पूरे कांड को मीडिया में ‘पार्टीगेट’ का नाम दिया गया है.पार्टीगेट को लेकर लोगों के गुस्से की कई वजहें है. पहली वजह है, लापरवाही. बोरिसजॉनसन सरकार के मुखिया हैं. इस नाते सरकार के उठाए कदमों की पूरी ज़िम्मेदारी उनकेऊपर आती है. अगर वो ऐसा कहते हैं कि मुझे कोविड नियमों के बारे में किसी ने नहींबताया तो ये एक भद्दा मज़ाक लगता है. अगर प्रधानमंत्री को सबसे बड़ी महामारी सेजुड़े नियमों की जानकारी नहीं थी तो वो कुर्सी पर बैठकर कर क्या रहे थे? दूसरी वजहहै, झूठ. बोरिस जॉनसन पार्टियों को लेकर अपना बयान लगातार बदल रहे हैं. पहलेउन्होंने किसी भी आयोजन से मना किया. फिर वहां मौजूद होने से इनकार करते रहे. जबदोनों ही बातें झूठीं साबित हुईं, तब वे अपने बचाव में बेवकूफ़ाना तर्क उठा लाए. इसवजह से लोगों का उनके ऊपर से भरोसा उठने लगा है. जब डेविड डेविस ने उनसे इस्तीफ़ादेने की गुज़ारिश की, तब उन्होंने इसी वजह को सबके सामने रखा था. तीसरी वजह है,भावनाओं का मज़ाक उड़ाना. ब्रिटेन में कोरोना के चलते डेढ़ लाख से अधिक लोगों कीमौत हो चुकी है. अभी भी अस्पतालों पर दबाव बढ़ा हुआ है. कई जगहों पर सेना को भी इसकाम में लगाना पड़ा है. जिस समय कोरोना का कहर चरम पर था, उस समय प्रधानमंत्रीदफ़्तर में अय्याशी चल रही थी. महामारी के दौरान अपने चाहनेवालों को गंवाने वाले आमलोग और अस्पतालों में दिन-रात एक करने वाले मेडिकल स्टाफ़ के लिए ये सच हज़म करनाबेहद मुश्किल है. उन्हें इससे गहरा सदमा लगा है. वे किसी भी क़ीमत पर बोरिस जॉनसनसे पीछा छुड़ाना चाहते हैं. हालात प्रतिकूल होने के बावजूद बोरिस जॉनसन इस्तीफ़ाक्यों नहीं दे रहे? जॉनसन और उनके सहयोगियों का एक तर्क ये है कि स्यू ग्रे की जांचरिपोर्ट का इंतज़ार कर लिया जाए. स्यू ग्रे कोन हैं और वो किस बात की जांच कर रहींहै? स्यू ग्रे कैबिनेट ऑफ़िस में सेकंड परमानेंट सेक्रेटरी के पद पर काम कर रहींहै. वो ब्रिटेन के सबसे वरिष्ठ नौकरशाहों में से एक हैं. मीडिया रिपोर्ट्स केअनुसार, उनका काम पार्टीगेट के मिनट्स दर्ज़ करना है. उन्हें ये पता करना है किपार्टियां कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुईं. हालांकि, वो इस बात का फ़ैसलानहीं देंगी कि कोविड नियमों का पालन हुआ या नहीं. स्यू ग्रे को उनकी निष्पक्षता केलिए जाना जाता है. हालांकि, उन्हें अपने बॉस यानी प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ जांचकरनी है. जानकारों की मानें तो ये उनके कैरियर का सबसे मुश्किल काम होने वाला है.स्यू ग्रे की रिपोर्ट का सबको इंतज़ार है. लेकिन उनकी रिपोर्ट बोरिस जॉनसन को पद सेहटा नहीं सकती. अगर रिपोर्ट में आपराधिक गतिविधियों का पुट आया तो कार्रवाई के लिएइसे पुलिस को सौंपा जाएगा. इससे बोरिस जॉनसन पर दबाव बढ़ेगा. हो सकता है कि नैतिकदबाव में आकर वो इस्तीफ़ा दे दें. एक संभावना ये है. दूसरी संभावना है कि उन्हें पदसे हटा दिया जाए. वो कैसे होगा? यूके में जनता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहींकरती. वहां बहुमत जीतने वाली पार्टी अपने बीच में से एक नेता को चुनती है. और, उसेप्रधानमंत्री बनाया जाता है. फिलहाल, यूके की संसद में कंजर्वेटिव पार्टी बहुमत है.पद पर बने रहने के लिए बोरिस जॉनसन को अपनी पार्टी के सांसदों का समर्थन चाहिए.पार्टीगेट के बाद से कम-से-कम 11 सांसदों ने खुलेआम उनके इस्तीफ़े की मांग की है.कंज़र्वेटिव पार्टी की एक कमिटी है. 1922 कमिटी. ये हर महीने पार्टी के मुखिया केसाथ बैठक करती है. बैठक में पार्टी के भीतर चल रहे विचारों को लेकर रिपोर्ट पेश कीजाती है. ये कमिटी पार्टी के भीतर नेतृत्व संकट की स्थिति में चुनाव कराने का भीकाम करती है. अगर पार्टी के 15 प्रतिशत से अधिक सदस्य अपने मुखिया से खुश नहीं हैंतो वे अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं. फिलहाल, हाउस ऑफ़ कॉमंस में कंजर्वेटिवपार्टी के 359 सांसद हैं. यानी अगर 54 सांसदों ने चिट्ठी लिखी तो अविश्वास प्रस्तावपर वोटिंग करानी होगी. वोटिंग में अगर पचास फीसदी से अधिक सांसदों ने ख़िलाफ़ मेंवोट डाला तो उसे पद से हटा दिया जाता है. इसके बाद पार्टी के भीतर नया नेता चुननेके लिए वोटिंग होती है. इस प्रक्रिया में पहले हटाए गए नेता को हिस्सा नहीं लेनेदिया जाता. जहां तक बोरिस जॉनसन की बात है, अधिकतर सांसद स्यू ग्रे की रिपोर्ट काइंतज़ार कर रहे हैं. इससे उन्हें एक नैतिक आधार मिल जाएगा. सांसद कमिटी को गुप्ततरीके से भी सपोर्ट वापस लेने की चिट्ठी भेज सकते हैं. ऐसे में वास्तविक स्थिति कापता कमिटी का फ़ैसला आने के बाद ही चलता है. अब मान लीजिए कि बोरिस जॉनसन नेइस्तीफ़ा दे दिया या उन्हें पद से हटा दिया गया, उसके बाद नया प्रधानमंत्री कौनहोगा? इस संबंध में लंबे समय से आकलन चल रहे हैं. बोरिस जॉनसन के हटने की स्थितिमें प्रधानमंत्री पद को लेकर कई नामों की चर्चा है. आज हम आपको टॉप के पांच नामोंके बारे में बता देते हैं. इस लिस्ट में पहला नाम ऋषि सुनक का है. सुनक केदादा-दादी पंजाब प्रांत के रहने वाले थे. वे पहले ईस्ट अफ़्रीका गए. 1960 के दशकमें वे अपने बच्चों के साथ लंदन में बस गए. 1980 में साउथैम्टन में ऋषि सुनक काजन्म हुआ. उन्होंने लिंकन कॉलेज से ग्रैजुएशन के बाद स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी सेएमबीए की डिग्री ली. सुनक पहली बार 2014 में सांसद बने. जुलाई 2019 से फ़रवरी 2020तक वो ट्रेज़री डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी रहे. फिर उन्हें चांसलर बना दिया गया. येसरकार में प्रधानमंत्री और उप-प्रधानमंत्री के बाद तीसरा सबसे बड़ा पद है. कोविडमें ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का श्रेय उन्हीं को जाता है. ऋषि सुनकका एक परिचय और है. वो इंफ़ोसिस के फ़ाउंडर एन. आर. नारायणमूर्ति के दामाद हैं.दूसरा नाम लिज़ ट्रूस का है. वो फ़िलहाल ब्रिटेन की विदेश मंत्री हैं. लिज़ पार्टीके भीतर काफ़ी लोकप्रिय हैं. वो इंटरनल पोल्स में सबसे आगे रहतीं है. ब्रेग्जिट कोअमलीजामा पहनाने में उनकी अहम भूमिका रही है. फिलहाल, उन्हें यूरोपियन यूनियन सेबातचीत करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. अगर लिज़ ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनतींहै, तो वो इस पद पर पहुंचने वाली तीसरी महिला होंगी. मार्गरेट थैचर और थेरेसा मे केबाद. लिस्ट में तीसरा नाम डोमिनिक राब का है. राब फिलहाल उप-प्रधानमंत्री के पद परहैं. जब बोरिस जॉनसन कोविड से पीड़ित थे, उस समय राब ने ही सरकार का नेतृत्व कियाथा. वो पहले भी विदेश मंत्री और ब्रेग्ज़िट सेक्रेटरी की भूमिकाएं निभा चुके हैं.चौथा नाम साजिद जाविद का है. वो फिलहाल हेल्थ मिनिस्टर की भूमिका निभा रहे हैं. वोकोरोना से जंग में ब्रिटिश सरकार का चेहरा हैं. उन्हें इसके लिए काफ़ी सराहना भीमिली है. साजिद सरकार में कई अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं. साजिद जाविद की जड़ेंपाकिस्तान से जुड़ीं है. उनके माता-पिता टोबा टेक सिंह से इंग्लैंड पहुंचे थे. पिताने लंबे समय तक बस ड्राइवर के तौर पर काम किया. इस लिस्ट में पांचवां नाम भारतीयमूल की प्रीति पटेल का भी आ रहा है. प्रीति के दादा-दादी गुजरात के रहने वाले थे.वे युगांडा में दुकान चलाते थे. 1960 के दशक में प्रीति के माता-पिता यूके चले गए.1972 में प्रीति का जन्म हुआ. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ एसेक्स से पढ़ाई की है.मार्गरेट थैचर उनकी आदर्श हैं. जुलाई 2019 में प्रीति पटेल को गृह मंत्रालय सौंपागया. वो भी नए प्रधानमंत्री की रेस में अपनी दावेदारी पेश करेंगी. अगर नएप्रधानमंत्री के चुनाव की नौबत आई तो कई और भी उम्मीदवार रेस में खड़े होंगे. होसकता है कि कोई बिल्कुल ही गुमनाम सा नाम यूके के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आसीननज़र आए. फिलहाल, ये सब भविष्य के तहखाने में बंद है.