जब धरती पर जनता की कमी हो जाती थी, तब देवता लोग डिसाइड करते कि बहुत सारे बच्चेपैदा करेंगे. दक्ष प्रजापति ने पंचजन की बेटी असिंकी से हर्यश्व नाम के 10 हजारलड़के पैदा किए ताकि वे शादी-ब्याह करके सृष्टि को आगे बढ़ाएं. लड़कों ने पिता कीआज्ञा मानी पर धार्मिक इंटरेस्ट की वजह से जंगल में चले गए तप करने. जब नारद नेदेखा कि लड़के तप भी कर रहे हैं और शादी भी करेंगे, उनको बड़ा अजीब लगा. खुरपेच मेंमाहिर तो थे ही. गए और लड़कों को तरह-तरह के ज्ञान और पहेलियों से भटका आए. लड़केशादी करने का प्लान छोड़ चले गए मोक्ष पाने वाले रस्ते पर. दक्ष प्रजापति को बड़ा दुखहुआ ये जानकर कि लड़कों ने बात नहीं मानी. खैर, फिर दक्ष ने असिंकी के साथ शबलाश्वनाम के एक हजार लड़के और पैदा किए और उनको भी वही चीज समझायी. नारद ने फिर लंगड़ीफंसा दी. लड़कों को बोला, असली भाई तो वही होते हैं, जो अपने बड़े भाइयों के दिखाएरास्ते पर चलें. बाकी लड़के भी नारद जी के दिखाए हुए रास्ते पर निकल पड़े. अब आयादक्ष को असली गुस्सा. फड़कते हुए होंठ और लाल आंखें लेकर पहुंचे नारद के पास. पहलेतो फुर्सत से उनकी क्लास ली. फिर अपमान और वंश को खत्म करने के एटेम्पट के लिए दियाअखंड सिंगलत्व का शाप. तब से महर्षि नारद का कभी विवाह नहीं हुआ. (श्रीमद्भगवतमहापुराण)