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मेरी इंटरकास्ट शादी लव जिहादियों के लिए एक कहानी क्यों है

करोड़ों देवी-देवताओं के साथ त्रिदेवों के आशीर्वाद के बावजूद बुरी शादी से आपको कोई नहीं बचा सकता.

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15 मार्च 2017 (अपडेटेड: 15 मार्च 2017, 03:59 PM IST)
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ये आर्टिकल डेली ओ वेबसाइट के लिए अंजू मोहून ने लिखा है. वेबसाइट की इजाज़त से हम इसका हिंदी तर्जुमा आपको पढ़वा रहे हैं.


पिछले हफ्ते अखबारों में ये खबर पढ़ी. एक फंक्शन में तोड़फोड़ की खबर. वजह, उन्हें मिली एक खबर, जिसके मुताबिक वहां धर्म से बाहर शादी हो रही थी. लड़का हिंदू. लड़की ईसाई. धर्म के ठेकेदारों को लगा कि शादी के चक्कर में लड़का ईसाई हो जाएगा. या शायद इसका कुछ उलटा था. खैर, मुद्दे की बात ये है कि आखिर में सब शांत हो गया. शादी हो गई. और शायद उनके फंक्शन होने तक ये स्वघोषित धर्मरक्षक पहुंच नहीं पाए.

वैसे शादी भी अपने-आप में एक मसालेदार अनुभव होता है. आप लोगों की मानसिकता को समझते हैं. ये अनुभव करते हैं कि किस तरह तनाव और क्लेश में भी शादी का आयोजन निपटाया जा सकता है. ऊपर से जटिल मान्यताएं और प्रार्थनाएं इसमें तड़के का काम करती हैं.

पर किसी समझदार ने कहा था कि ‘आपके अनुभव से बड़ा सच और कुछ नहीं’. तो आप मेरा अनुभव सुनिए.

मैंने एक ही इंसान से तीन बार शादी की. पुरानी और बिना लॉजिक की धार्मिक परंपराओं में बंधे समाज की ख़ुशी के लिए. लेकिन इन परंपराओं पर बात करने से पहले हमें विशेष विवाह अधिनियम, 1954 कानून को समझना होगा.

कोर्ट में शादी करवाने के भी अपने झंझट हैं. एक ही फॉर्म की तीन कॉपी पर साइन करो. उम्र का सबूत दो. फिर ये भी लिख कर दो कि हम (शादी करने वाला लड़का-लड़की) रिलेटिव नहीं हैं. अरे भई जब लड़का नार्थ ईस्ट से है और लड़की काउ बेल्ट (हिंदी भाषी इलाका) से, तो उनमें कोई ब्लड रिलेशन कैसे हो सकता है? पर क्या करें, ये सरकारी बाबुओं के रूल फ़ॉलो तो करने ही पड़ेंगे.

फिर लड़के-लड़की की फोटो 30 दिन के लिए तीस हजारी कोर्ट के बाहर चिपका दी जाती हैं. “चाहिए ज़िंदा या मुर्दा” टाइप. मुझे लगता है ये फॉर्मेलिटीस सिर्फ इसलिए हैं, ताकि लोग सिस्टम पर निर्भर रहें.

मेरी मां हमारे ब्रेकअप के लिए ऐसी-ऐसी स्कीम सोचतीं, जो कैथरीन डे मेडिसी को भी हैरान कर दें. मां को अदालत के पचड़ों का पता चल जाता, तो वो निरूपा रॉय से कम नहीं होतीं. धर्म उनके लिए कोई समस्या नहीं था. उन्हें फ़िक्र थी, तो सिर्फ मेरी शादीशुदा जिंदगी की. मुझे उस ओर ध्यान देना चाहिए था.

फिर एक दिन हमने डीटीसी मुद्रिका पकड़ी. हम रिंग रोड के बाहरी ओर चल रहे थे. पसीने और गर्मी से बेहाल. हम सीढ़ियां चढ़े और अपनी बारी का इंतज़ार करने लगे. दो लाइनें पढ़ी गईं. एक दोहरा स्टाम्प लगा पेपर और एक मुड़ा हुआ प्रमाण-पत्र. बस काम हो गया. हमने सेलिब्रेट करने के लिए निरुला से महाबर्गर खाया. मैं अपने नए स्टेटस का ऐलान करने अकेली घर निकल गई.

दोनों परिवार एकदम से टेंशन में आ गए. गुस्से से ज्यादा वो भावुक थे. हमारा कानूनी विवाह इस तरह ख़ारिज कर दिया गया, जैसे वो कभी हुआ ही नहीं. माहौल ऐसा था, जैसे घर में सर्कस चल रहा हो. वो भी उत्तर भारतीय सर्कस.

लेकिन फिर सब मान गए. लड़के वाले तीस्ता नदी के उत्तर से लंबा रास्ता तय कर दिल्ली पहुंचे. बैंड बाजा पहले ही बुक था. तम्बू गड़ गए थे और खाना सज गया था. गोलगप्पे आकर्षण का केंद्र थे.

मेरे पास अब भी आर्थिक नरसंहार को रोकने में असमर्थ गुस्से से भरी अपनी एक तस्वीर है. मेरे जेएनयू के दिनों से ही मुझमें काफी समाजवाद भरा पड़ा है. मुझे गर्व है कि मेरी शादी महज़ 60 रुपए में हुई.

मेरे पास कपड़े, स्टील के बर्तन, फूड प्रोसेसर, मिठाई , मठरी से भरे हुए दर्जनों बक्से थे. उत्तर-पूर्व एक्सप्रेस में सवार होते हुए मेरे सभी महान आदर्श नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ही छूट रहे थे. लेकिन परिवार की यादें साथ थीं.

रात में ठंड ज्यादा थी. मेरे लिए सब कुछ नया था. मुझे काफी भूख भी लगी हुई थी. घर के आगे की छत गेहूं के सरकंडों की बनी हुई थी. नई दुल्हन की तरह मेरा स्वागत किया गया. मुझे दूध जैसी कोई सफ़ेद सी चीज़ पिलाकर अकेले सोने के लिए भेज दिया गया. ये उनके रीति-रिवाज़ का हिस्सा था. एक हफ्ते बाद मैं तीसरी शादी के लिए तयार थी. ये शादी चर्च में थी. मैंने दिल्ली के एक मशहूर डिज़ाइनर का गिफ्ट किया हुआ गाउन पहना, जो अगले कुछ महीनों में पेरिस में अपना शो करने वाला था.

फिर एक पारंपरिक त्यौहार मनाया गया. पूरा गांव जगमगा रहा था. काफी लोग समारोह में शामिल हुए. वहां की लोकल ड्रिंक के साथ सभी तरह का नॉन-वेज परोसा जा रहा था. उस दिन मैंने भरपेट खाया. मैं थोड़ी सी नशे में थी पर खुश थी.

मैं सोच रही थी ये लव जेहादी क्या सोच रहे होंगे, जो कहीं मेरे इर्द-गिर्द ही थे. लेकिन मेरे दोस्त ख़ुश थे. मैंने उस इंसान से शादी की, जो मुझसे बिल्कुल अलग है. आखिर अरोड़ा लड़की ने अपने क्लासमेट तमिल ब्राह्मण से और एक अहोम ने कन्नड़ से शादी कर ली. हम अपने इस फैसले से काफी खुश थे. राष्ट्रीय एकता को हमने एक नया आयाम दे दिया था.

खैर, बात करते हैं विवाह समारोह में हंगामा करने वाले लोगों की, जिनका इस हंगामे को लेकर बेतुका जवाब है. वो लोगों के धर्म की रक्षा करना चाहते हैं. पर मेरी एक नसीहत याद रखिएगा. अनेकों विवाह समारोह, करोड़ों देवी-देवताओं के साथ-साथ त्रिदेवों के आशीर्वाद के बावजूद बुरी शादी से आपको कोई नहीं बचा सकता. मेरी खुद मुश्किल से एक साल चल पाई. अब मैं फिर से अपनी मां की गोद में हूं.

मैं अब उसे लव जेहादी कहती हूं. पर मैं खुश हूं कि इसके बदले मुझे एक सुंदर सी बेटी मिली, जो सिर्फ मेरी है.

ज़रा सोचिए, कितना मज़ाकिया लगता है. मैं उन धर्म के रखवालों के लिए शायद एक “सावधान रहें” वाला पोस्टर होउंगी. एक तलाकशुदा लड़की, जिसने एक ईसाई लड़के से शादी की और इस वजह से उसका धर्म उससे छिन गया. तलाक और नैतिक मूल्यों की वजह से मुझे संदिग्ध नारी की संज्ञा दे दी गई होगी, जिसे एक बेटी की मां होने की वजह से सिर्फ दया की नज़रों से देखा जाना चहिए.


ये आर्टिकल दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रहे भूपेंद्र ने ट्रांसलेट किया है.
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